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मध्य प्रदेश सरकार की ऐतिहासिक दरियादिली! क्या प्रतिमाओं के साथ महानता की यशोगाथा भी लिखेगी सरकार ? अतुल विनोद 

अतुल विनोद अतुल विनोद
Updated Tue , 18 Jun

सार

मध्यप्रदेश में जल्द ही प्रदेश के 13 महान नेताओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी. सभी 13 महान नेता और कोई नहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं. मध्य प्रदेश का मंत्रालय अब उन महान विभूतियों की मूर्तियों से शोभायमान होगा जिन्होंने मध्य प्रदेश की सत्ता पर मुख्यमंत्री बन कर राज किया...

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विस्तार

मंत्रालय, वल्लभ भवन, मध्यप्रदेश यहाँ जल्द ही प्रदेश के 13 महान नेताओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी| ये 13 महान नेता और कोई नहीं प्रदेश पर राज कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री हैं| इनकी महानता की यशोगाथा वल्लभ भवन में विराजित इनकी प्रतिमायें ही बयान करेंगी| चाहे ये बीजेपी से CM बने हों या कांग्रेस से या संविद सरकार के, ये वर्तमान सरकार की दरियादिली है कि वो सबकी प्रतिमा स्थापित करने जा रही है| सरकार के निर्णय में संगठन का निर्णय भी शामिल होता है, तो बीजेपी और आरएसएस ने भी इसके लिए सहमति दी होगी ?

ये बात अलग है कि इन “प्रतिमाशाली” नेताओं में वे भी शामिल होंगे जिन्हें संघ और बीजेपी प्रदेश के बंटाधार के लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं| इनमे वे भी शामिल होंगे जिन्होंने संघ पर प्रतिबंध लगाया होगा, इनमे वे भी शामिल होंगे जिन्हें संघ और संगठन ने इनके कामकाज से असंतुष्ट होकर बदला होगा| इनमे वे भी शामिल हैं जिनके ऊपर गंभीर आरोप हैं, इनमे वे भी होंगे जिनके चलचित्र लोग चटखारे लेकर देखते हैं|  आज इन सबकी आत्माएं कितनी गदगद होंगी? भई जिसे अपनी ही पार्टी ने भुला दिया, कभी जनता ने CM रहते ही हरा दिया, पद से हटे तो आखिरी दम तक गुमनामी और बेबसी कि जिंदगी जीते रहे| लेकिन आज इनकी दिव्य मूर्तियाँ मंत्रालय में शोभायमान होंगी तो उन्हें अपने अच्छे बुरे कर्मों का इससे अच्छा प्रतिसाद और कैसे मिल सकता है| 

वैसे तो ऐसा कोई नहीं जिसमें अपनी प्रतिमा स्थापित करने की इच्छा ना हो| लेकिन मूर्तियाँ तो महान लोगों की स्थापित होती हैं| मंत्रालय में स्थापित होने वाले पूर्व मुख्यमंत्री “महान” ही होंगे| क्योंकि महानता,त्याग,तपस्या और बलिदान राजनेताओं की ही बपौती है, सभी नहीं वे तो अब महान हो ही जाएंगे जो मुख्यमंत्री बनने भर से मंत्रालय में मूर्ती बनने जा रहे हैं | मध्यप्रदेश विकास के “सूचकांकों” में जहां है, उसमें इन महान मुख्यमंत्रियों का अमूल्य योगदान है| आज सरकार इनके अहसानों का बदला प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक भवन में इनकी प्रतिमा लगाकर चुका रही है| जिनकी सरकारों को हटाने के लिए पार्टी और संघ ने वर्षों तक संघर्ष किया ये इस संघर्ष को भी बड़ी “श्रद्धांजली” होगी! 

मध्य प्रदेश का मंत्रालय अब उन महान विभूतियों की मूर्तियों से शोभायमान होगा जिन्होंने मध्य प्रदेश की सत्ता पर मुख्यमंत्री बन कर राज किया| इन मूर्तियों को लगाने यह बात तो साफ हो जाती है कि भले ही वह कांग्रेसी हो या भाजपाई ईमानदार हो या बेईमान हो बस मुख्यमंत्री बनने भर से वह मंत्रालय में मूर्ति लगवाने में कामयाब हो सकता है| मूर्ति तो उसी की लगती है जो देव तुल्य, महान, त्यागी, बलिदानी और सिद्ध हो| बेईमान, चरित्रहीन, अपराधी और आरोपी की प्रतिमा तो चौराहे पर स्थापित नहीं हो सकती तो मंत्रालय तो दूर की बात है| हो सकता है जनता इनमे से किसी को इनमे से एक या कई गुणों से युक्त मानकर मूर्ती पर काला रंग पोतना चाहे लेकिन उसकी पहुंच मंत्रालय तक कहाँ होगी, तो ये पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे| 

मध्यप्रदेश सरकार का यह अनोखा कदम भारत के राजनीतिक इतिहास में अब तक का अभूतपूर्व निर्णय साबित होगा| सियासत के शिखर पर पहुंचने के बाद सत्ता से दूरी,बदनामी, उपेक्षा ,अकेलेपन का दर्द मरने के बाद भी नहीं छोड़ता| लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसी तमाम आत्माओं को ठंडक देने का प्रयास किया है| यह आश्चर्यजनक है कि सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री ही क्यों मंत्रालय के गलियारे में उन पूर्व मुख्य सचिवों की प्रतिमाएं भी शोभायमान होनी चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक मंत्रालय में बैठकर सरकार की शोभा बढ़ाई| मुख्यमंत्रियों से ज्यादा कार्यकाल तो इन प्रशासनिक अफसरों का रहा| सभी नहीं तो कम से कम उन्हें तो मंत्रालय में प्रतिष्ठित करें जो मुख्य सचिव बने| क्योंकि मुख्यमंत्री के साथ साथ प्रशासनिक मुखिया कभी अपना महत्व होता है।

मध्य प्रदेश की जनता यह सौभाग्य होगा कि वह मंत्रालय में इतिहास के उन राजनीतिक नायकों को मूर्ति के रूप में देख पाएगी जिन पर दलबदल, सियासी षड्यंत्र, भ्रष्टाचार, बेईमानी और सत्ता के लिए गलत समझौते करने तक के आरोप लगे| निश्चित ही वर्तमान सरकार ने इतिहास को बदलने का साहस किया है| ऐसी दरियादिली दिखाई है जो आप जो आज तक कोई भी दल नहीं दिखा पाया| आमतौर पर हर राजनीतिक दल अपने दल से जुड़े हुए उन नायकों की प्रतिमाएं लगवाने का काम करता आया है जिसे वह अपनी पार्टी और देश के लिए महानायक मानता रहा है| 

मायावती ने मुख्यमंत्री रहते जीते जी अपनी मूर्तियां बनवा दी| प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ये देखकर दर्द से भर गये वे ऐसा नहीं कर पाए, उनकी पार्टी की आगे की सरकारों ने भी उनकी कोई मूर्ति नहीं लगवाई लेकिन भला हो इस सरकार का कम से कम उसे उनकी सुध तो आई| हालांकि आम लोगों के लिए मंत्रालय की चौखट पर कदम रखना आम बात नहीं| लेकिन कभी ये सौभाग्य मिले तो उन्हें इन मूर्तियों के नीचे महान विभूतियों की उपलब्धियों के बारे में तो पता होना चाहिए| भाई दर्शन के साथ इनके कृत्यों को जानकर धन्यता तो महसूस होगी| 

मूर्ती लगाने भर से नयी पीढ़ी इन्हें नहीं पहचानेगी| नयी पीढ़ी को इनके उन महान कार्यों से भी अवगत कराना होगा| जो प्रतिमा के नीचे लिखकर  बखूबी किया जा सकेगा|  ये परम्परा शुरू हुयी है तो दूर तक जाएगी| विधानसभा में स्पीकरानों की प्रतिमाएं लगेंगी, कलेक्ट्रेट में कलेक्टर्स की अदालतों में जजेस की| हर कार्यालय में वहाँ बैठने वाले पूर्व सियासी या प्रशासनिक प्रमुख की प्रतिमा लगनी चाहिए| नगर निगम,पालिकाओं में पूर्व महापौर विराजित होंगे|