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चेतावनी के साथ विदा लेता  मानसून

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Fri , 23 Apr

सार

सबसे पहले जाते मानसून की बात देश की आधी से अधिक खेती सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर करती है, जो अमूमन जून में केरल से शुरू होता है तथा इसका अंतिम चरण सितंबर के मध्य में राजस्थान से प्रारंभ होता है..!

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विस्तार

प्रतिदिन विचार-राकेश  दुबे

देश में इस साल के मानसून की वापसी के आसार नज़र आ रहे हैं | जाता हुआ मानसून अगले साल के लिए कुछ अग्रिम चेतावनियाँ देकर जा रहा है | बंगलुरु के हालात के हम सब साक्षी हैं | बड़े शहरों की बात तो छोड़ ही दें , मौसम मध्यम शहरों की भी त्रासदी बन गया है कि थोड़ी-सी बरसात हो या आंधी चले, तो सारी मूलभूत सुविधाएं जमीन पर आ जाती हैं| मध्यप्रदेश के शहर भी अब इस फेहरिस्त में जुड़ गए है |

सबसे पहले जाते मानसून  की बात देश की आधी से अधिक खेती सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर करती है, जो अमूमन जून में केरल से शुरू होता है तथा इसका अंतिम चरण सितंबर के मध्य में राजस्थान से प्रारंभ होता है. पूर्वानुमानों में बताया गया था कि इस वर्ष मानसून सामान्य रहेगा, लेकिन जून से सितंबर के बीच देश के अनेक हिस्सों में कम बारिश हुई|

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के समाप्त होने में देरी से कई जगहों पर अधिक बरसात हुई, रिपोर्टों की मानें, तो आठ राज्यों में पानी कम बरसा है| इस कारण धान की उपज को लेकर चिंताएं पैदा हो गयी हैं. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष के पहले तीन महीनों में तापमान अधिक होने से गेहूं की फसल पर असर पड़ा था| खाद्यान्न उत्पादन में इस कमी से एक ओर किसानों की आमदनी पर ग्रहण लगा है, तो दूसरी तरफ बाजार में अनाज महंगा बिक रहा है|  आने वाले साल के लिए अभी से इंतजाम जरूरी है |

भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा बुलेटिन में छपे एक लेख में भी रेखांकित किया गया है कि मानसून की वापसी में देरी से खाद्यान्न कीमतों पर फिर से दबाव बढ़ने के आसार दिख रहे हैं| सितंबर की अनियमित बरसात ने गर्मी से कुछ राहत तो दी है, परंतु इस वजह से कुछ मुख्य सब्जियों के भाव बढ़ गये हैं| मानसून की अनियमितता के दो मुख्य हिस्से हैं- एक, लंबे समय तक बारिश का नहीं होना तथा दूसरा, थोड़े ही अंतराल में बहुत अधिक बरसात होना| बादल फटने की घटनाएं, सूखे जैसी स्थितियां, औचक बाढ़ आदि आम हैं|

प्राकृतिक आपदाओं की बारंबारता बढ़ने तथा लगातार कमजोर व अनियमित मानसून के पीछे प्रधान कारक जलवायु परिवर्तन है. इसी के कारण तापमान भी बढ़ता जा रहा है तथा जाड़े का मौसम छोटा होने लगा है| हालांकि यह वैश्विक समस्या है तथा यूरोप व अमेरिका जैसे समृद्ध क्षेत्र भी इससे प्रभावित हैं, लेकिन भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह स्थिति कहीं अधिक चिंताजनक है|

देश में वर्षा का एक कारक बंगाल की खाड़ी भी है |बंगाल की खाड़ी दुनिया में सबसे बड़ी है और विशेष रूप से जैव विविधता वाले समुद्री वातावरण के साथ प्रकृति के वरदान में से एक है| गंगा, ब्रह्मपुत्र, इरावदी, महानदी, गोदावरी और कावेरी सहित दुनिया की कुछ बड़ी नदियां इसमें मिलती हैं| यह कई दुर्लभ और लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों और मैंग्रोव के बड़े विस्तार का घर है, जो पारिस्थितिकी और मछली पकड़ने के क्षेत्र के अस्तित्व के लिए आवश्यक है|

प्रमुख शक्तियों के अपने आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने के कारण क्षेत्र का समुद्री वातावरण बदल गया है| खाड़ी का अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान में व्यापक पर्यावरणीय दोहन और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है| प्रजातियों के विलुप्त होने की उच्चतम दर समुद्री पर्यावरण के प्रति लापरवाही का परिणाम है, जिसका जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ा है|

वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि, परिवर्तित भूमि उपयोग, संसाधनों का अत्यधिक दोहन, लवणीकरण, समुद्र के स्तर में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं खाड़ी के पर्यावरण पर दबाव डाल रही हैं| छोटे और मध्यम फीडर जहाजों से परिचालन निर्वहन, शिपिंग टकराव, अनजाने में तेल रिसाव, औद्योगिक अपशिष्ट, अनियोजित प्रदूषण और गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कूड़े का संचय आदि स्थिति को बिगाड़ने में योगदान दे रहे हैं|

बहुत बड़ी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पर्यावरण को बेहतर बनाना तथा प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करना जैसे कार्य दिन-ब-दिन चुनौतीपूर्ण होते जायेंगे. पानी का संकट, मिट्टी का क्षरण, वनों का लोप, नदियों में गाद भरना, पारिस्थितिक असंतुलन, जल, वायु व मिट्टी का प्रदूषण समुद्री जल स्तर बढ़ने से तटीय इलाकों से पलायन जैसी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं| यही सब अग्रिम चेतावनी हैं , जलवायु संकट से निपटने के उपायों को गंभीरता से अपनाने की आवश्यकता है|राज्य सरकारें  हाइकोर्ट के आदेशों की परवाह नहीं करतीं और हाइकोर्ट भी अपनी नाफरमानी पर मौन रहता है, तो जाहिर है कि आम आदमी क्यों और कहाँ आवाज उठायेगा?