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युद्ध की विभीषिका और भारत का अर्थ जगत- राकेश दुबे

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 05 Mar

सार

भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने रूस-यूक्रेन युद्ध नयी चुनौतियां खड़ी कर रहा हैं. युद्ध का असर शेयर बाजार, उद्योग-कारोबार पर दिखने लगा है...!

janmat

विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने रूस-यूक्रेन युद्ध नयी चुनौतियां खड़ी कर रहा हैं। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा के अनुसार मौजूदा भू-राजनीतिक संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़े भारत कच्चे तेल का आयातक है। अपनी जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत तेल भारत द्वारा आयात किया जाता है।

युद्ध का असर शेयर बाजार, उद्योग-कारोबार पर दिखने लगा है। बीती 25 फरवरी को सेंसेक्स 55858 अंकों पर था, रुपये में भी गिरावट आ रही है। कई प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में डॉलर मजबूत हुआ है। लगभग सभी उद्योगों में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने लगी हैं, वाहनों की परिचालन लागत बढ़ गयी है। यूरिया और फॉस्फेट महंगे हुए हैं। खाद्य तेल की कीमतों पर बड़ा असर हुआ है। चीन और पाकिस्तान की निरंतर रक्षा चुनौतियों के बीच भारत के लिए मजबूत नेतृत्व और सुदृढ़ आर्थिक पहचान जरूरी है। 

देश को आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना होगा। क़हने को वर्ष 2022-23 के नये बजट का फोकस तकनीक के साथ कृषि के तेज विकास पर है। कृषि को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कॉरपोरेट सेक्टर बड़ी भूमिका निभा सकता है। वैसे इस वर्ष रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है।इससे खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि दुनिया को 25 प्रतिशत से अधिक गेहूं का निर्यात करने वाले रूस और यूक्रेन के युद्ध में फंस जाने के कारण भारत के करीब 2,42 करोड़ टन के विशाल गेहूं भंडार से गेहूं के अधिक निर्यात की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।भारत को गेहूं निर्यात के लिए मिस्र, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों को बड़ी मात्रा में निर्यात पूरा करने का मौका मिलेगा। अब भारत द्वारा चावल, बाजरा, मक्का और अन्य मोटे अनाज के निर्यात में भी भारी वृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकेगा। अनुमान है कि आगामी वर्ष में कृषि निर्यात 55-60 अरब डॉलर मूल्य की ऊंचाई पर पहुंच सकता है।

अब देश को मेक इन इंडिया अभियान से मैन्युफैक्चरिंग का नया हब और मैन्युफैक्चरिंग निर्यात करने वाला प्रमुख देश बनाना होगा। वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हो रहे बदलावों के मद्देनजर आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की अहमियत बढ़ गयी है।अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना बेहद जरूरी है। एक फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए कहा गया कि सरकार द्वारा सेज के वर्तमान स्वरूप को परिवर्तित किया जायेगा। सेज में उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए विनिर्माण किया जायेगा। जहां पीएलआई योजना की सफलता से चीन से आयात किये जाने वाले कई प्रकार के कच्चे माल के विकल्प तैयार हो सकेंगे, वहीं औद्योगिक उत्पादों का निर्यात भी बढ़ सकेगा।

रूस और यूक्रेन युद्ध संकट से निर्मित चुनौतियों के बीच भी रणनीतिपूर्वक भारत सेज का अधिकतम उपयोग करने के साथ मेक इन इंडिया को सफल बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा। रूस और यूक्रेन युद्ध संकट के बीच खाद्यान्न की आपूर्ति संबंधी वैश्विक चुनौतियों के मद्देनजर एक बार फिर भारत वैश्विक खाद्य जरूरतों की आपूर्ति करने वाले मददगार देश के रूप में दिखायी देगा,ऐसी उम्मीद की जा सकती है।