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बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है 

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 22 Jul

सार

अप्रैल के साप्ताहिक आंकड़ों में मार्च की तुलना में उच्च स्तर पर बेरोजगारी दर दर्ज की गई थी..!

janmat

विस्तार

वर्ष की शुरुआत से ही बेरोजगारी दर में वृद्धि का जो सिलसिला शुरू हुआ लगातार चौथे महीने तक जारी है जनवरी 2023 में यह 7.14 प्रतिशत थी। इसकी तुलना में अप्रैल में बेरोजगारी दर 0.97 प्रतिशत अंक अधिक है। पिछले 12 महीनों में बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत से 8.3 प्रतिशत के बीच रही, जो औसतन 7.6 प्रतिशत थी। इसी वजह से अप्रैल में दर्ज 8.11 प्रतिशत की बेरोजगारी दर उच्च स्तर पर दिखती है।अप्रैल के साप्ताहिक आंकड़ों में मार्च की तुलना में उच्च स्तर पर बेरोजगारी दर दर्ज की गई थी। अप्रैल के चार हफ्तों में से प्रत्येक में बेरोजगारी दर पहले के महीने में दर्ज 7.8 प्रतिशत से अधिक हो गई। यह दर औसतन 8.27 प्रतिशत के करीब थी। अप्रैल में उम्मीद से कम बेरोजगारी दर राहत के रूप में नजर आई। ये आँकड़े सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने 1 मई को जारी किए हैं ।

श्रम भागीदारी दर में वृद्धि के कारण बेरोजगारी दर में वृद्धि हुई है। श्रम भागीदारी दर मार्च में 39.77 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2023 में 41.98 प्रतिशत हो गई। यह पिछले तीन वर्षों में दर्ज की गई सबसे अधिक LPR है। मार्च 2020 के बाद के प्रत्येक महीने में जब श्रम भागीदारी दर 41.9 प्रतिशत थी तब यह दर 41 प्रतिशत से नीचे तक सीमित थी। इसलिए अप्रैल में श्रम भागीदारी दर देखी गई वृद्धि हैरान करती है।

श्रमबल का दायरा अप्रैल में 2.5 करोड़ बढ़कर 46.7 करोड़ हो गया। यह श्रमबल से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में तेजी के संकेत देता है जो संभवतः रोजगार खोजने की उम्मीदों की वजह से बढ़ी है। इस महीने श्रमबल से जुड़ने वाले लोगों में से लगभग 87 प्रतिशत नौकरी हासिल करने में सक्षम थे जबकि इसके एक छोटे हिस्से को रोजगार नहीं मिल सका। देश में बेरोजगारों की संख्या मार्च के 3.45 करोड़ से बढ़कर अप्रैल में 3.79 करोड़ हो गई। वहीं लगभग 34 लाख अतिरिक्त लोग बेरोजगार हो गए। 

अप्रैल के महीने में भारत में श्रम भागीदारी दर और रोजगार दर में उल्लेखनीय वृद्धि रोजगार की तलाश करने की लोगों की बढ़ती इच्छा को दर्शाती है। इस महीने श्रमबल में शामिल होने वाले लोगों का एक बड़ा हिस्सा भी नौकरी पाने में सक्षम था। इसके अलावा देश के शहरी क्षेत्रों की तुलना में देश के ग्रामीण इलाकों में श्रम भागीदारी में वृद्धि काफी अधिक थी। अप्रैल में नौकरियों के जो मौके तैयार हुए, उनमें से अधिकांश देश के ग्रामीण हिस्से में बने थे।

अप्रैल में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 2 करोड़ लोग श्रम बल से जुड़े जिसकी वजह से देश के ग्रामीण श्रमबल में कुल 32.12 करोड़ लोग थे। अप्रैल में ग्रामीण  श्रम भागीदारी दर 2.7 प्रतिशत अंक बढ़कर 43.64 प्रतिशत हो गई। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में यह रोजगार दर पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक देखी गई है। इसी तरह, भारत के ग्रामीण इलाके में बेरोजगारी दर मार्च के 7.47 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 7.34 प्रतिशत हो गई।

वहीं दूसरी ओर, शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 9.8 प्रतिशत हो गई जो पिछले महीने 8.5 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण यह है कि अप्रैल में बढ़कर 38.75प्रतिशत हो गई। देश के शहरी हिस्से में अप्रैल में 23 लाख से अधिक लोग बेरोजगार हो गए। कुल मिलाकर, अप्रैल के महीने के मुख्य मापदंडों से पता चलता है कि ग्रामीण श्रम बाजार ने भारत के शहरी श्रम बाजार की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते श्रमबल का बड़ा हिस्सा शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रोजगार हासिल करता है।