आईएमसॉरी बेटा अब से आप ऑनलाइन गेम नहीं खेलोगे- अतुल विनोद

आईएमसॉरी बेटा अब से आप ऑनलाइन गेम नहीं खेलोगे- अतुल विनोद

 

छतरपुर के कृष्णा ने “आई एम सॉरी मम्मी” कह कर ऑनलाइन गेम फ्री फायर के चलते सुसाइड कर लिया। यदि कृष्णा के मम्मी डैडी समय रहते आई एम सॉरी बेटा कर लेते तो शायद यह नौबत नहीं आती। दरअसल बच्चे मोबाइल पर क्या कर रहे हैं इसकी तरफ मां-बाप का ध्यान जाता ही नहीं है। हो तो यह भी रहा है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी बच्चे फ्री फायर जैसे गेम खेल रहे हैं।

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पैरंट्स अपने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में मदद करने के लिए मोबाइल खरीद कर उन्हें दे रहे हैं। लेकिन छतरपुर में जो कुछ हुआ वह आंखें खोलने के लिए पर्याप्त है।

13 साल की उम्र थी उसकी, कृष्णा नाम था। विवेक और प्रीति का लाडला बेटा। लेकिन ऑनलाइन गेम में ₹40000 गवा दिए। बेटे ने कैसे यह लत पाल ली माता-पिता को पता ही नहीं चला। पढ़ाई के लिए पिता ने उसे एंड्रॉयड फोन दिया था। लेकिन वह स्टडी की जगह गेम में उलझ गया। हालांकि खुदकुशी से पहले वह पकड़ में आ गया था। ₹900 कटे तो पेरेंट्स को शक हुआ लेकिन बेटा टाल गया। सुसाइड नोट में फ्री फायर गेम का जिक्र है। गेम में उसने ₹40000 गंवा दिए। लेकिन मां-बाप को पता न चल सका। वह निराश हो गया और उसने खुदकुशी कर ली।

 

बच्चे इसी तरह से ऑनलाइन गेम के गिरफ्त में आ जाते हैं। इससे पहले बच्चे पब्जी का शिकार हुए। पबजी मार्केट से बाहर हुआ लेकिन बताया जाता है कि वह फिर से पैर पसारने लगा है। फ्री फायर गेम भी बच्चों में काफी लोकप्रिय है पेरेंट्स को पता नहीं होता कि फ्री फायर बच्चों के जरिए पेरेंट्स की जेब भी काटता है।

बच्चे अब 24 घंटे घर पर रहते हैं। ऑनलाइन एजुकेशन के बहाने वह मोबाइल पर गेम खेलते हैं। मां बाप शायद ही कभी ध्यान देते हैं कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या कर रहा है। ऐसे कितने पेरेंट्स हैं जिन्होंने अपने मोबाइल पर पैरेंटल कंट्रोल लगा रखा है।

 

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ऐसे कितने मां-बाप हैं जिन्होंने अपने बेटे बेटी को दिए मोबाइल पर सर्विलेंस एप लगा रखी है। हालांकि बच्चे इतने होशियार होते हैं कि वह ऐसे तमाम ऐप जो उनके मोबाइल में उनकी निगरानी के लिए इंस्टॉल किए गए हैं उन्हें घटा बढ़ा सकते हैं। तो अब सावधान होने की जरूरत है। फ्री फायर के चलते अभी कृष्णा की जान गई है। लेकिन ऐसे कितने बच्चे हैं जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं,इस तरह के गेम्स के जरिए।

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विशेषज्ञ बताते हैं कि यह गेम बच्चों का मनोवैज्ञानिक संतुलन बिगाड़ देते हैं। उनकी नींद डिस्टर्ब होती है। उनकी फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है। वह सहज नहीं रह पाते। जब भी आपको ऐसा लगे कि आपका बच्चा थोड़ा असामान्य है नींद कम ले रहा है आपसे बातचीत कम कर रहा है तो आप सावधान हो जाइए।

उसके मोबाइल पर निगरानी रखना शुरू कर दीजिए। ऑनलाइन क्लासेज के अलावा उन्हें मोबाइल मत दीजिए। सख्ती से मोबाइल पर पाबंदी लगाईये। बच्चों की बातों में आकर यदि आप उनके सामने आत्मसमर्पण कर देते हैं तो समझिए आपने उसके भविष्य के साथ खतरनाक समझौता कर लिया। अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ अकाउंट पर भी नजर रखें देखे की उनसे किस किस मद में पैसा डिडक्ट हो रहा है।

अतुल विनोद

Atul Vinod Pathak atulyam

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