भारत: कुछ पुरातात्विक एवं एतिहासिक स्थल..

स्वर्ण मंदिर अमृतसर- अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर भारत के प्रमुख ऐतिहासिक और मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। यह अपनी अद्भुत बनावट और रहस्यों के लिए पूरी दुनिया भर में मशहूर हैं। यह सिख धर्म का मुख्य धार्मिक स्थान भी है, जिसकी खूबसूरत शिल्पकारी और वास्तुकला देखते ही बनती है। विश्व प्रसिद्ध इस गोल्डन टेम्पल का इस्तेमाल सोने की धातु का इस्तेमाल कर किया गया है।इस मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है, यहां मत्था टेकने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। इसे  श्री दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। स्वर्ण मंदिर से जुड़ी रोचक बात यह है कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी किचन है, जहां रोजना करीब 1 लाख से भी ज्यादा लोगों को लंगर करवाया जाता है।

सांची स्तूप-  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पास स्थित सांची स्तूप भारत की मुख्य ऐतिहासिक स्मारको में से एक है, जिसे अपने अद्भुत बनावट एवं उत्कृष्ट कलाकृतियों के लिए पूरी दुनिया भर में जान जाता है। इस अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व की वजह से यूनेस्कों द्धारा विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है। इस प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक के पास भगवान बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं। भारत की सबसे प्राचीन संरचना सांची स्तूप को तीसरी सदी में सम्राट अशोक महान द्धारा बनवाया गया था।

खजुराहो के मंदिर-  मध्यप्रदेश के खजुराहो के मंदिर अपनी अनूठी मूर्तिकला और अनुपम शिल्पकारी के लिए पूरे विश्व भर में विख्यात है। यह भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों का विशाल समूह है। इन मंदिरों की दीवारों पर बनी कामोत्तेजक मूर्तियां यहां आने वाले सैलानियों के मुख्य आर्कषण का केन्द्र है। खजुराहों के मंदिरों को अपनी भव्यता और आर्कषण की वजह से यूनेस्कों की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। आपको बता दें कि खजुराहों के विश्व प्रसिद्ध मंदिर मुख्य रुप से जैन और हिन्दू धर्म के मंदिरों का समूह है, जिनका मंदिर चंदेल सम्राज्य के शासन के समय में किया गया है।

रानी की वाव-  रानी की वाव भारत के गुजरात शहर के पाटन गांव में स्थित है। इस प्राचीन ऐतिहासक इमारत का निर्माण 11वीं सदी में सोलंकी वंश के राजा भीमदेव की याद में उनकी पत्नी रानी उदयमती ने करवाया था। सरस्वती नदी के किनारे स्थित इस बावड़ी को इसकी अद्भुत एवं विशाल संरचना की वजह से यूनेस्को द्धारा साल 2014 में विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है। यह अपने आप में एक अनूठी संरचना है, जो कि भूमिगत पानी के स्त्रोतों से थोड़ी अलग है। इस विशाल ऐतिहासिक संरचना के अंदर 500 से भी ज्यादा मूर्तिकलाओं का बेहद शानदार ढंग से प्रदर्शन किया गया है।

कोणार्क सूर्य मंदिर-  कोणार्क का सूर्य मंदिर देश की सबसे प्राचीन और मुख्य ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह अपनी अद्भुत बनावट, भव्यता और आर्कषण की वजह पूरी दुनिया भर में मशहूर है। सूर्य देवता को समर्पित यह भव्य मंदिर उड़ीसा के पुरी जिले के कोणार्क कस्बे में स्थित है। रथ आकार में बने होने की वजह से इस मंदिर को भगवान का रथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही इस मंदिर से  एक ऊंचा काला टॉवर भी दिखाई देता है, जिसकी वजह से इसे ब्लैक पैगोडा नाम से जाना जाता है। इसकी बेमिसाल खूबसूरती एवं अद्भुत महत्व की वजह से कोणार्क का सूर्य मंदिर को साल 1984 में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया  गया है।

बीबी का मकबरा-  महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित इस मकबरे को ”दक्कन के ताज” से नाम से जाना जाता है। इस मकबरे का निर्माण मुगल औरंगजेब के शहजादे आजमशाह ने अपनी मां बेगम रबिया की याद में बनवाया है। दुनिया के सात अजबूों में से एक ताजमहल से प्रेरित होकर बनवाए गए इस ऐतिहासिक इमारत को ”गरीबों का ताजमहल” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस मकबरे के मुख्य गुंबद को छोड़कर अन्य हिस्सा प्लास्टर से तैयार किया गया है। इसके निर्माण में कई गई खर्च कटौती से न तो इसकी चमक आगरा के ताजमहल जैसी है और न ही यह पूरी तरह संगमरमर के पत्थर से बना हुआ है।लेकिन फिर भी, यह स्मारक भी विशिष्ट मुगल वास्तुकला का एक अनुपम उदाहरण है।

हुंमायूं का मकबरा-  राजधानी दिल्ली में स्थित हुंमायूं का मकबरा भारत के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मुगल शासक हुमायूं की कब्र है, जिसे उनकी पत्नी हमादा बानू बेगम के द्धारा बनवाया गया है। यह मकबरा भारत का पहला गार्डन मकबरा है, जिसके निर्माण में लाला पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अद्भुत संरचना और आर्कषण की वजह से  इसे यूनेस्को द्धारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। यह मुगलकालीन वास्तुशैली से निर्मित मुख्य इमारतों में से एक है। इसकी खूबसूरती को देखने काफी संख्या में पर्यटक आते हैं।

ग्वालियर का किला-  मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित ग्वालियर का किला देश के सबसे प्राचीन एवं प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इसका निर्माण 8 वीं सदी में राजा मान सिंह तोमर द्धारा किया गया है। करीब 35 मीटर ऊंचाई वाला यह भव्य किला 10 वीं सदी के पहले से भी आस्तित्व में है। इस ऐतिहासिक किले पर कई राजाओं ने शासन किया। इतिहासकारों की माने तो इस विशाल किले का निर्माण गुजरी महल का रानी मृगनयनी द्धारा करवाया गया था।

ताजमहल-  ताजमहल, भारत के मुख्य ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों में से एक है। यह भारत की शान का प्रतीक है। ताजमहल अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अद्भुत संरचना के कारण दुनिया के सात अजूबों में से एक है। यह उत्तरप्रदेश के आगरा शहर में स्थित है, ताजमहल के अद्भुत सौन्दर्य को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। वहीं ताजमहल की वजह से  भारत में टूरिज्म को भी काफी बढ़ावा मिला है। ताजमहल की भव्यता और इसके अद्भुत आर्कषण की वजह से इसे विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है।

कुतुब मीनार-  भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार देश के प्रमुख ऐतिहासिक एवं मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मुगलकाल में बनी एशिया की सबसे ऊंची मीनार है। इसकी अद्भुत बनावट और आर्कषण की वजह से इसे यूनेस्कों की विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है।  वहीं इसके बाद 1508 ईसवी में आए भयंकर भूकंप की वजह से इसकी इमारत काफी क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद सिकंदर लोदी ने कुतुबमीनार की मरम्मत करवाई थी। करीब 73 मीटर ऊंची इस मीनार के परिसर कुतुब कॉम्लेक्स को भी यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज की साइट में शामिल किया गया है।

चारमीनार-  भारत के मुख्य ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों की लिस्ट में चारमीनार का नाम सबसे ऊपर आता है। यह भारत के मुख्य आर्कषणों में से एक है, जो तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित है। यह एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जिसने हैदराबाद को पूरे देश में एक अलग पहचान दिलवाई है। इसकी भव्यता को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं, यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ऐतिहासिक इमारत है। इसकी अद्भुत संरचना एवं उत्कृष्ट वास्तुशिल्प की वजह से यह इमारत देश के 10 मुख्य ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इस भव्य ऐतिहासिक स्मारक को कुतुब शाह ने उस दौरान बनवाया था, जब उन्होंने अपनी राजधानी गोलकुंडा से हैदराबाद स्थानांतरित किया था।

लाल किला-  भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित लाल किला भारत का गौरव है। यह देश की आजादी का प्रतीक है। मुगलकाल में बनी यह अद्भभुत इमारत अपनी भव्यता और अद्धितीय आर्कषण की वजह से पूरी दुनिया में जानी जाती है। इसकी बेमिसाल खूबसूरती के लिए इसे यूनस्को द्धारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल किया गया है। यह भारत के प्रमुख ऐतिहासिक में पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसकी भव्यता एवं बनावट को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं।

आगरा का किला- आगरा में यमुना नदी के किनारे पर स्थित यह किला भारत के मुख्य ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह अपनी अद्धितीय संरचना और सुंदर बनावट की वजह से पूरे देश में मशहूर है।इस किले को मुगलों के मुख्य निवास स्थान के साथ-साथ किला-ए-अकबरी, किला रूज, और आगरा का लाल किले के रुप में जाना जाता है।  यह मुगलकालीन वास्तुशैली का अति उत्कृष्ट मनूना है। अपनी अद्भुत बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण इस स्मारक को यूनेस्को द्धारा विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया है।

इंडिया गेट-  दिल्ली में स्थित इंडिया गेट भारत की मुख्य ऐतिहासिक एवं शहीद स्मारक के रुप में जाना जाता है। यह देश के राष्ट्रीय स्मारकों में से एक है। इसे ”अखिल भारतीय युद्ध स्मारक” के रुप में भी जाना जाता हैं। इस भव्य इमारत का निर्माण इंडियन ब्रिटिश आर्मी के उन सैनिकों के सम्मान और उन्हें श्रंद्धाजली देने के लिए किया गया है, जो कि पहले विश्व युद्द एवं तीसरे एंग्लों-अफगान युद्द के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इंडिया गेट हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाली मेजबानी के लिए भी विख्यात है। करीब 42 मीटर ऊंचे इस विशाल गेट को फांसीसी स्मारक आर्क डी-ट्रायोम्फ की तर्ज पर डिजाइन किया गया है।

हवा महल-  राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर में स्थित हवा महल भारत की प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों में से एक है, जिसे इसकी शाही बनावट की वजह से जाना जाता है। अपनी अद्धितीय बनावट के लिए मशहूर यह विशाल महल राजपूतों की शान का भी प्रतीक माना जाता है। यह विशाल किला राजस्थान के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध आर्कषणों में से एक है। इसे ”पैलेस ऑफ विंड्स” के तौर पर भी जाना जाता है। इस विशाल महल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह विश्व की बिना किसी नींव के बिना बनी सबसे ऊंची इमारतों में से एक है।

जल महल-  राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित हवा महल अपने ऐतिहासिक महत्व और आर्कषण की वजह से पूरे देश में मशहूर है। यह राजस्थान के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसकी अद्धितीय संरचना एवं भव्य् बनावट को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। 18वीं सदी में आमेर के महाराजा जय सिंह द्धितीय ने इस अद्भतु महल का निर्माण जयपुर के मानसरोवर के बीच में करवाया था। इस किले का मनमोहक नजारा यहां आने वाले सभी पर्यटकों का मन मोह लेता है।

 

 

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