मथुरा :मधुपन्न से इस्लामाबाद तक….!………………रावण की त्रैलोक्य विजय- 58

मथुरा :मधुपन्न से इस्लामाबाद तक….!  रावण की त्रैलोक्य विजय -58 
रमेश तिवारी
मित्रो, आप सोच रहे होंगे कि रावण की त्रैलोक्य विजय से इस्लामाबाद का क्या संबंध हो सकता है। किंतु संबंध तो है।कथा का उद्देश्य सत्य को जानना और कथाकार का उद्देश्य अपने पाठकों को सत्य की घूंटी पिलाना भी तो होता है। रावण अपनी मौसेरी बहन कुंभीनसी के जिस अपह्रता मधु दैत्य को प्रताड़ित करने निकला था। आखिर वह था कौन..? उसका इतिहास और भूगोल जान लेना पाठकों का अधिकार और इतिहास बताना कथाकार का कर्तव्य बनता है। मधु ,दैत्य वंश का सुप्रतिष्ठित और धार्मिक पृवृत्ति का चरित्रवान राजा था। वह था तो मथुरा का अधिपति किंतु उसकी राज्य सीमा में तब आनर्त और सौराष्ट्र (गुजरात) भी आते थे।वह शिव जी का परम भक्त था। सो अवढ़रदानी शिव ने उसको भी एक अमोघ शूल (बम) थमा रखा था। उस शूल की मर्यादा थी कि उसके रहते हुए कोई भी उद्भट से उद्भट योद्घा मधु का बाल भी बीका नहीं कर सकता था।
रावण की ननिहाल के बहुत से लोग दैत्य राक्षस थे। सो संबंधों के सिलसिले में मधु लंका पहुंचा और माल्यवान की दौहित्री अपूर्व सुंदरी कुंभीनसी के सौन्दर्य पर आकर्षित हो गया। दोनों में प्रेम का आधिक्य हुआ। शरीर के चुंबकीय खिंचाव ने उन्हें एक दिशा दी। शिव के अमोघ शूल से प्रतिष्ठित मधु ने उस समय की मर्यादा के अनुसार कुंभीनसी का अपहरण कर लिया। बाकी कथा हम कल ही सुन चुके हैं।
अब हम मधुपन्न और मथुरा के संबंध में भी जान ही लें। विश्व के सर्वाधिक प्राचीन नगरों में अति धार्मिक नगर है मथुरा। श्रीकृष्ण जन्म के हजारों वर्ष पूर्व यहीं कालिन्दी (यमुना) के तट पर सनातन सत्य के शिरोमणि ध्रुव ने भी तपस्या की थी। उनका मंदिर और ध्रुव घाट आज भी कायम है। मथुरा में अति प्रतिष्ठित शक्ति पीठ भी है। हां, यहां श्रीकृष्ण के उद्भव के समय का रोचक इतिहास भी तो जान लें। पहले महान स्थानों को वन के नामों से पुकारा जाता था। जैसे -आगरा नगर को “अग्रवन “और मुल्तान को “मूल वन “।इतिहास बहुत विशाल और विषद व्याख्या योग्य है, परन्तु स्पेस की मर्यादा में हम बहुत संक्षेप में वर्णन कर रहे हैं। मुल्तान का नाम मूलवन था फिर नरसिंह अवतार के समय मूल स्थान हुआ। श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब द्वारा सूर्यमंदिर की स्थापना के बाद से साम्बपुर और फिर विदेशी आक्रांताओं ने इस पवित्र नगर का नाम मुल्तान कर दिया।
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                                                                                    रावण की त्रैलोक्य विजय -58 
इसी प्रकार जब 1660 में इस्लाम का चश्मा चढा़कर औरंगजेब का फौजदार अब्दुन्नबी खां निकला। मथुरा के विध्वंश की रोंगटे खडे़ कर देने वाली काली कथा लिख गया।आध्यात्म की ऐतिहासिक नगरी को धराशायी कर दिया।सनातन के सौष्ठव पर सरह की इबारत लिखने लगा। केशवदेव मंदिर (कृष्ण) सहित सैकड़ों मंदिरों को तोड़कर आगरा की मस्जिदों की सीढि़यों में दफ्न करवा दिया। नगर को लूटा। नेहसनाबूत किया और औरंगजेब के संकेत पर श्रीकृष्ण मंदिर की जगह पर मस्जिद बना डाली। यही नहीं औरंगजेब ने श्रीनगर और विदिशा की तरह मथुरा का नाम भी इस्लामाबाद रख दिया।
यहां आप यह भी जान लें कि ध्रुव के समय मथुरा का जो नाम मधुवन था, वह धीरे धीरे कैसे बदलता गया। देखें -जब यहां दैत्य मधु का राज्य स्थापित हुआ तब इसको मधुपुरी कहते थे। फिर नाम हुआ मधुरा अथवा मधुपन्न। और जब शत्रुघ्न यहां के राजा बने तो नाम हो गया मथुरा।मित्रो वैसे बृज की सीमा कोई 80 कोस की थी। जिसके अंतर्गत 12 वन थे -मधुवन, कुमुदवन, काम्यक वन, बहुलवन,भ्रद्रवन,खादिरवन,श्रीवन,महावन,लोहजंग वन,, बिल्बवन, भांडीरवन (भांडेर जहां जरासंध द्वारा मथुरा पर प्रक्षेपित मिसाइल गिरी थी) और वृंदावन।
रावण, मधु के साथ क्या व्यवहार करने वाला है, यह देखने के पूर्व हम यह भी जान लें कि मधु लोला नामक दैत्य का पुत्र था। यमुना तट के आश्रमवासी ऋषियों और मुनियों का सम्मान करता था। हां, वह अपने एक पुत्र लवणासुर की करतूतों से परेशान रहता था। अतः वह उसी दुष्ट पुत्र को राज्य और वह अद्भुत शक्तिशाली शिव शूल को सौंपकर अरण्य में चला गया। किंतु अपनी एकमात्र पुत्री मधुमती का विवाह यदु के वंशज हर्यश्व के साथ कर उसको दहेज में आनर्त और सौराष्ट्र भेंट कर गया।
मित्रो मधु की संक्षिप्त कथा के पश्चात हम रावण की मथुरा में धमक, कुंभीनसी और मधु से रावण की भेंट और देवलोक अभियान की चर्चा करेंगे।किंतु कल। आज बस यहीं तक।


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