‘औकात में रहो’, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर बवाल, सीएम ने मांगी माफी..विपक्ष की इस्तीफे की मांग


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स्टोरी हाइलाइट्स

CM मोहन यादव के माफी मांगने के बाद भी विजयवर्गीय का रुख नहीं बदला, उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री तो कप्तान हैं, तो माफी मांगने से क्या होता है, दोस्त..कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है..!!

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की "अपनी औकात में रहो" वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में सियासी भूचाल आ गया है। टिप्पणी से मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा मच गया। अडानी पावर डील को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विजयवर्गीय के बयान को लेकर सदन में माफी मांगी।

जी हां मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार 19 फरवरी को उस समय जंग के मैदान में बदल गया जब संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विपक्ष के नेता उमंग सिंह के बीच तीखी बहस हो गई। अडानी ग्रुप के साथ पावर परचेज़ एग्रीमेंट पर चर्चा के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि विजयवर्गीय ने सिंह को "अपनी औकात में रहने" की चेतावनी दी।

इस असंसदीय शब्द के इस्तेमाल से सदन में इतना हंगामा हुआ कि विपक्ष ने विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा कर दिया। विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने अफ़सोस जताया और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने माफ़ी मांगी।

विपक्ष के नेता उमंग सिंह ने सिंगरौली में बिजली खरीदने के लिए सरकार और अडानी ग्रुप के बीच हुए एग्रीमेंट पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार अगले 25 सालों में कंपनी को ₹1.25 लाख करोड़ देने की तैयारी कर रही है। जब सिंह ने सबूत पेश किए तो सत्ता पक्ष ने इसे गलत जानकारी बताकर खारिज कर दिया। बहस गरमा गई और विजयवर्गीय ने विवादित टिप्पणी कर दी। विपक्ष ने इसे न सिर्फ़ विपक्ष के नेता बल्कि राज्य के 7.5 करोड़ लोगों का अपमान बताया।

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में शिष्टाचार बिगड़ने पर गहरा दुख जताया। हालात बिगड़ते देख मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिम्मेदारी ली और सदन में हुई "जानबूझकर या अनजाने में" गलती के लिए माफी मांगी। हालांकि, सदन के बाहर कैलाश विजयवर्गीय के तेवरों में कोई बदलाव नहीं दिखा।

सदन में हंगामे के बाद जब मीडिया ने कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किए, तो उन्होंने कोई पछतावा या अफ़सोस नहीं दिखाया। उन्होंने सहजता से कहा, "कभी-कभी ऐसा हो जाता है, दोस्त... यह बहुत आम बात है।" जब मुख्यमंत्री ने माफी मांगी, तो उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री तो कप्तान हैं, तो माफी मांगने से क्या होता है, दोस्त?" उन्होंने अपने व्यवहार को इंसानी बताते हुए कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है।

मंत्री के बयान का विरोध करते हुए विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने उनकी उम्र का ज़िक्र करते हुए उनका मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा, "कैलाश विजयवर्गीय बूढ़े हो गए हैं, उन्हें अब राजनीति में कुश्ती नहीं लड़नी चाहिए।" सिंघार ने आरोप लगाया कि जब वह अडानी ग्रुप और भागीरथपुरा मौत मामले जैसे गंभीर मुद्दों पर सबूतों के साथ बोलते हैं तो सरकार चिढ़ जाती है।

वहीं, PCC अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे "घमंड की पराकाष्ठा" बताया और घोषणा की कि पूरे राज्य में विजयवर्गीय के पुतले जलाए जाएंगे। यूथ कांग्रेस ने भी भोपाल में उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।