MP: न्यायालय के आदेश के बाद भी जारी है, प्रभार का खेल.. गणेश पाण्डेय 

MP: न्यायालय के आदेश के बाद भी जारी है, प्रभार का खेल.. गणेश पाण्डेय
गणेश पाण्डेय 

GANESH PANDEY 2भोपाल: घपले-घोटाले मामले में सुर्खियों में आने के बाद संचालनालय में नए आयुक्त मनोज अग्रवाल ने प्रभार का खेल खेलना शुरू किया है. यानी जूनियर अधिकारियों को वरिष्ठ अफसरों की अनदेखी करते हुए उच्च पदों का प्रभार देने का सिलसिला शुरू है. जबकि हाईकोर्ट जबलपुर में जूनियर कृषि विस्तार अधिकारियों को प्रभारी उपसंचालक का प्रभार दिए दिए जाने संबंधी शिकायतों का निराकरण करने के आदेश दिया है.

उच्च न्यायालय ने याचिका क्रमांक 563/2021 सुनवाई करते हुए 24 फरवरी 21 को आदेश दिया कि वरिष्ठ पदों पर प्रभार देने संबंधित मामलों का निराकरण 120 दिनों में करें. इसके बाद भी नियम विरुद्ध प्रभाव देने का खेल जारी है. मसलन गंभीर सिंह तोमर वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी जिनका वरिष्ठता क्रम 46 है, उन्हें प्रभारी सहायक संचालक उद्यान दतिया के पद पर नियुक्त किया गया. जबकि दतिया में ही पदस्थ है सर्वेश कुमार तिवारी वरिष्ठता में गंभीर सिंह से काफी सीनियर है. यह बात अलग है कि शिकवे-शिकायतें होने पर आयुक्त मनोज अग्रवाल को अपना आदेश निरस्त करना पड़ा.


पर वे यहीं नहीं रुके. इसी प्रकार यंत्रीकरण घोटाले में लिप्त रहे वरिष्ठ विकास अधिकारी मनीष सिंह चौहान को प्रभारी उप संचालक मंदसौर के साथ-साथ शाजापुर डिप्टी डायरेक्टर का प्रभार दिया गया. दिलचस्प पहलू यह है कि मंदसौर और शाजापुर की दूरी 400 किलोमीटर है. यदि प्रभार ही देना था तो आगर में पदस्थ डिप्टी डायरेक्टर को शाजापुर का प्रभाव दिया जा सकता था. तृतीय श्रेणी के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी राजू बड़बाय को प्रभारी सहायक संचालक उद्यान रिछी एवं उप संचालक उद्यान खंडवा प्रथम श्रेणी का प्रभार दिया गया.

इसी प्रकार नीरज सांवलिया पृथ्वी के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी हैं, प्रभारी उप संचालक उद्यान देवास प्रथम श्रेणी का प्रभार दिया गया. ऐसे ही तृतीय श्रेणी के वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी आर एन एस तोमर, सोमनाथ राय, अंतर सिंह कनौजी, कौशलेंद्र सिंह चंदेल, सूर्यभान सिंह, राम अभिलाख साकेत, यश कुमार जाटव, राजकुमार सगर, इंद्राणी बोकाडे, बहादुर सिंह चौहान, राजकुमार कोरी और मदन लाल परस्ते को भी नियम विरुद्ध वरिष्ठ पदों का प्रभार दिया गया. उच्च न्यायालय जबलपुर ने प्रभार देने में हुई गड़बड़ियों के निराकरण करने के निर्देश दिए.


* 106 अधिकारियों को नहीं मिली पदोन्नति

उद्यानिकी विभाग में 106 वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी ऐसे है, जिनक पदस्थापना 1989 में हुई है. इन अधिकारियों को आज दिनांक तक एक भी पदोन्नति नहीं दी गई. यहां तक कि 30 साल की सेवा के बाद तीसरा समयमान वेतनमान नहीं मिल पाया. ये अधिकारी आज भी अपने पदोन्नति हक के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं. इन अधिकारियों की पैरवी करने वाले जेएन कंसोटिया जैसे नौकरशाह नहीं है.


* लोकसेवा आयोग भी संदेह के दायरे में

पदोन्नति से वंचित अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2007 में की गई डीपीसी में लोक सेवा आयोग इंदौर भूमिका पर संदेह जताया है. अधिकारियों का कहना है कि आयोग ने डीपीसी से संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्षता से जांच नहीं की. आयोग की संदेहास्पद भूमिका की वजह से ही राजोरिया को नियम विरुद्ध पदोन्नति मिल गई.


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