अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक समुद्री अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इस मिशन का नाम प्रोजेक्ट फ्रीडम रखा गया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि कई देशों ने अमेरिका से मदद मांगी है। उनके जहाज यहां फंस गए हैं।
ट्रम्प ने इन जहाजों और उनके कर्मचारियों को निर्दोष बताया और कहा कि वे हालात के कारण मुश्किल में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाएगा ताकि वे बिना किसी खतरे के अपना काम जारी रख सकें। यह ऑपरेशन सोमवार सुबह से शुरू होगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर इस ऑपरेशन में ईरान ने कोई रुकावट पैदा की तो अमेरिका सख्त जवाब देगा।
वहीं अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक होर्मुज में शुरू किए गए नए अभियान में हर जहाज के साथ सीधे अमेरिकी नौसेना की एस्कॉर्ट नहीं होगी। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत आसपास मौजूद रहेंगे और अगर ईरान की सेना किसी जहाज को निशाना बनाती है तो तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्तों की जानकारी भी देगा। इसमें उन समुद्री मार्गों की पहचान शामिल होगी जिन्हें बारूदी सुरंगों से मुक्त माना जा रहा है, ताकि जहाज कम जोखिम वाले रास्तों से गुजर सकें।
इस रणनीति से साफ है कि अमेरिका लगातार सुरक्षा देने के बजाय डर पैदा करने की नीति पर काम कर रहा है। यानी जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए मौजूद रहना, लेकिन हर समय जहाजों के साथ चलने की जिम्मेदारी न लेना।
अमेरिका की तरफ से शुरू किए गए प्रोजेक्ट फ्रीडम मिशन को अब युद्ध की रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। अल जजीरा के मुताबिक पिछले 60 दिनों में अमेरिका के मकसद काफी बदल गए हैं और अब फोकस सीधे तौर पर हॉर्मुज पर आ गया है।
शुरूआत में अमेरिका का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसके परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना था। लेकिन अब हॉर्मुज को खोलने और वहां से जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
अगर टकराव होता है, तो अमेरिकी नौसेना को सिर्फ जहाजों को एस्कॉर्ट नहीं करना पड़ेगा बल्कि उनकी रक्षा भी करनी होगी। इससे जोखिम काफी बढ़ जाएगा और बीमा कंपनियों के लिए भी यह नया खतरा पैदा करेगा, क्योंकि समुद्री व्यापार की लागत और अनिश्चितता दोनों बढ़ सकती हैं।
पुराण डेस्क