नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए गांधी मैदान ेपहुंच चुके हैं। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। कैबिनेट में पुराने और नए नेताओं को शामिल करके जाति और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
जी हां पटना का गांधी मैदान गुरुवार 20 नवंबर को इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज 10वीं बार शपथ लेंगे। यह ना केवल नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा में एक नया अध्याय है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। समारोह के लिए कड़ी सुरक्षा और इंतज़ाम किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी मौका दिया जाएगा। चर्चा है कि पुराने नेता राम कृपाल यादव (BJP) को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, पूर्व शूटर और युवा नेता श्रेयसी सिंह (BJP) को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है।
बीजेपी की तरफ से ज्यादातर मौजूदा मंत्रियों को नीतीश कैबिनेट में जगह दी जा सकती है और वो आज शपथ ले सकते हैं। सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के अलावा कई नामों की चर्चा है। इनमें - सुनील कुमार, हरि साहनी, जनक राम, सुरेंद्र मेहता, नीतीश मिश्रा, रेणु देवी, मंगल पांडेय, प्रेम कुमार, जिबेश मिश्रा, नीरज कुमार सिंह, सुरेंद्र मेहता शामिल हैं। बीजेपी की तरफ से कुछ नए चेहरे भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इनमें विजय कुमार खेमका, गायत्री देवी, पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा (बक्सर से निर्वाचित) और राणा रणधीर हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, RLM के दीपक प्रकाश और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को भी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। BJP से रमा निषाद और संजय टाइगर भी लिस्ट में हैं। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी के राजू तिवारी को मंत्री पद मिलने की भी बात चल रही है। इन नए चेहरों को शामिल करने से साफ है कि कैबिनेट में जाति और क्षेत्रवाद के बीच बैलेंस बनाए रखने की कोशिश की गई है।
नीतीश कुमार का शपथ ग्रहण ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने बिहार की राजनीति में लगातार अपना असर बनाए रखा है। हाल के विधानसभा चुनावों में NDA 202 सीटें जीतकर सत्ता में वापस आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नए चेहरों को शामिल करके नीतीश कुमार सरकार का मकसद विकास और सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाने का संदेश देना है।
गांधी मैदान में हो रहे इस समारोह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। लोग उत्साहित हैं कि नई सरकार राज्य में विकास की गति को और तेज करेगी। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को नई दिशा मिलने की उम्मीद एक बार फिर जगी है।
आपको बता दें कि बुधवार को सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया। एनडीए की बैठक 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में हुई। इसमें केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेन्द्र कुशवाहा, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह भी शामिल थे।नीतीश कुमार को नेता बनाने का प्रस्ताव सम्राट चौधरी ने पेश किया। एनडीए विधायकों ने दोनों हाथ उठाकर उनका समर्थन किया। बैठक में जदयू, भाजपा, LJP(R)), हम और रालोमो के सभी विधायक शामिल हुए।
पुराण डेस्क