तुलसी अमृत क्यों

तुलसी अमृत क्यों

'पद्म पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, उस घर में यमराज भी प्रविष्ट नहीं हो पाते। तुलसी का पौधा एक दिव्य औषधि वृक्ष है. जो एक बार तो मृत प्राणी को भी जीवित करने की क्षमता रखता है। तुलसी से तो कैंसर जैसी असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाती है। इतना ही नहीं, ज्वर,खांसी, जुकाम,मलेरिया और अनेक भयानक संक्रामक रोगों की यह रामबाण औषधि है।



तुलसी का नाम वृंदा भी है अर्थात् तुलसी की लकड़ी की बनी माता पहनने से जो इससे विद्युत शक्ति निकलती है, वह रक्त संचार में रुकावट नहीं आने देती। कलाई में माला पहनने से नब्ज नहीं छूटती. हाथ सुन्न नहीं होते और भुजाओं का बल बढ़ता है। कमर में तुलसी की माला पहनने से पक्षाघात नहीं होता, कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशयऔर यौवन अंगों के विकास नहीं होते। गले में पहनने से आवाज सुरीली और मुख गोरा-गुलाबी रहता है। हृदय पर झूलने वाली तुलसी की माला फेफड़ों और हृदय रोगों से बचाती है।

'पद्म पुराण' में लिखा है कि संसार भर के फूलों और पत्तों के पराग या रस से जितने भी पदार्थ या दवाएं बनती हैं,तुलसी के आधे पत्ते से ही उन सबसे अधिक आरोग्य मिल जाता है।

क्या कभी आपने अमृत पिया है? यदि आप मंदिर जाते हैं तो जरूर अमृत पिया होगा मंदिरों में जो चरणामृत पिलाया जाता है, उसमें एक साथ पांच अमृत मिले होते हैं-दूध, गंगाजल,शहद, गौमूत्र और तुलसीदला| हमारे दूरदर्शी ऋषि-मुनियों ने अमृतदान की यह परंपरा यूं ही धार्मिक अनुष्ठान' नहीं बना दी थी। इसके पीछे यह विचारधारा थी कि निर्धन-से-निर्धन व्यक्ति को यह पंचामृत आसानी से मिल सके और यह अमृत हर किसी को भगवती प्रसाद समझकर पीना पड़े।

बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान विष्णु ने अमृत-मंथन से पहले ही प्राणिमात्र के स्वास्थ्य के लिए तुलसी पैदा कर दी थी।मंदिरों में जब ब्राह्मण इस अमृत को देते हैं तो इसके बारे में मंत्र बोलकर प्रत्येक प्राणी को इसकी महत्ता बताते हैं-

ॐ अकाल मृत्यु हरणम् सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णोदोकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते॥

अर्थात् यह अकाल मृत्यु को हरने वाली, सर्वव्याधियों का विनाश करने वाली, भगवान विष्णु के चरणों का अमृत जो पीता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता अर्थात् वह मोक्ष प्राप्त करके ज्य मरण के बंधन से छूट जाता है।

पवित्रता में तुलसी का स्थान गंगा से भी ऊंचा है। गंगा भले ही उफनकर गांव-नगर बहा ले जाएं, परंतु तुलसी कभी हानि नहीं पहुंचाती। इसके एक पत्ते में भी इतनी शक्ति है कि यदि उसे तोड़कर पानी में रख दिया जाए तो वह पानी भी टॉनिक बन जाता है।


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