ज्योतिष एक अकाट्य विज्ञान….ग्रह-नक्षत्र करते हैं जीवन को प्रभावित

ज्योतिष या ज्योतिर्विज्ञान का मानव से सम्बन्ध युगों पुराना है. ऋग्वेद में ग्रह-नक्षत्रों कि उस स्थिति का वर्णन है जो 95 हजार साल पहले बनी थी. शिक्षित हो या अशिक्षित, हर व्यक्ति में अपना भविष्य जानने की प्रबल इच्छा सदा से रही है. इसका क्रमबद्ध अध्ययन होता है, इसीलिए इसे विज्ञान की संज्ञा दी गयीं है. इसके अपने निश्चित नियम हैं, जिनके आधार पर भविष्यवाणी की जाती है. सारा जोतिर्विज्ञान गणित पर आधारित है. गणित का जन्म ही ज्योतिष गणना से ही हुआ है.

ज्योतिष की मूल अवधारणा यह है कि मनुष्य के अतीत, वर्तमान और भविष्य का सटीक आकलन उसके जन्म समय की ग्रहों की स्थिति के आधार पर किया जा सकता है. जन्मकुण्डली से व्यक्ति का पूरा व्यक्तित्व स्पष्ट हो जाता है. ज्योतिष को वेद पुरुष का नेत्र कहा गया है- ज्योतिषं वेद चक्षु:.वाराहमिहिर के अनुसार-“ पूर्व जन्म में जो शुभ और अशुभ कर्म किया गया हो, उसको यह शास्त्र उसी प्रकार स्पष्ट कर देता है, जिस प्रकार घने अन्धकार में दीपक सभी चीजों को प्रकाशित करता है.

आज ज्योतिष को अन्धविश्वास मानने या कहने वालों की भी कमी नहीं है, लेकिन अधिकतर लोग ज्योतिष पर विश्वास करते हैं. ज्योतिषी गलत हो सकता है या उसकी गणना में त्रुटि हो सकती है , लेकिन ज्योतिर्विज्ञान कभी गलत नहीं हो सकता. सही ज्योतिष जानने वाले जन्म के समय ग्रहों कि स्थित के आधार पर इतनी सटीक जन्मकुण्डली बनाते हैं कि उसमें कही गयी हर बात भविष्य में सत्य सिद्ध होती चली जाती है.कुण्डली  देखकर अच्छा ज्योतिषी व्यक्ति के हर एक गुण और अवगुण तथा अतीत और भविष्य के बारे में सटीक विश्लेषण कर सकता है. कुंडली देख कर वह बता सकता है कि बच्चा आगे चलकर क्या व्यवसाय चुनेगा और उसके साथ क्या-क्या दुर्घटनाएँ हो सकती हैं. उसमें क्या संभावनाएं निहित हैं यह भी वह बता देगा. ऐसे लोगों की आज कमी भले ही हो, लेकिन उनका लोप नहीं हुआ है.ज्योतिष में ग्रहों के उपचार के उपाय भी बताये गये हैं. चिकित्सा में भी इसका उपयोग होता रहा है.

आज नयी वैज्ञानिक शोधों से ज्योतिष और अधिक सटीक हो गया है. इस पर शंका करने वाले लोग तर्क देते हैं कि गृह-नक्षत्रों का करोंड़ों किलोमीटर दूर लोगों के जीवन पर क्या असर हो सकता है? उन्हें इस बात को ठीक से समझ लेना चाहिए कि पूरा जगत एक शरीर (organic unity) है, जो आधुनिक विज्ञान द्वारा भी सिद्ध किया जा चुका है.ब्रह्माण्ड में हर एक चीज का प्रभाव हर दूसरी चीज पर पड़ता है. कोई भी चीज एक-दूसरे से अप्रभावित नहीं है. यह अलग बात है कि यह प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म होती है कि हम उसे समझ नहीं पाते. भविष्य अतीत से निकलता है. आज, कल से निकला है और कल, आज से निकलेगा. जो भी घटित होता है, उसका कोई कारण होता है. भविष्य को अतीत से जुदा नहीं किया जा सकता. आप कल क्या होंगे उसका सम्बन्ध आज से है. आप आज जो हैं, उसका सम्बन्ध अतीत से है.

न्यूज़ पुराण में ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर समय-समय पर शोधपरक आलेख और दूसरी उपयोगी सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा, जो निश्चित ही पाठकों के लिए उपयोगी होगी.

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