आखिर डिप्रेशन यानी अवसाद है क्या? अवसाद के क्या लक्षण हैं? अवसाद के क्या कारण हैं?

आखिर डिप्रेशन यानी अवसाद है क्या?

डिप्रेशन एक भयानक दानव का रूप ले चुका है| दुनिया में हर सात व्यक्ति में से एक डिप्रेशन का शिकार है| हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति को निगलने वाला यह राक्षस  दिन-ब-दिन और खतरनाक होता जा रहा है|

शहरी और शिक्षित लोगों में अवसाद का प्रतिशत अशिक्षित और ग्रामीणों से ज्यादा है|

अवसाद हमारी मनोदशा को प्रभावित करता है| लगातार चिंता,अंसतोष, ख़ालीपन, उदासीनता खिन्नता, अपराध-बोध निराशा से घिरे रहना भी अवसाद के लक्षण हैं| 
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अवसाद से घिरा व्यक्ति सोच सोच कर अपनी उर्जा घटाता रहता है|  वो अपने आप को हीन समझने लगता है| इस दशा में व्यक्ति खुद को हानि पहुंचाने के काम करने लगता है|  लाचारी और निराशा के कारणों से कोई अच्छा नहीं लगता| उसे आत्महत्या के विचार आने लगते हैं| दूसरों पर डाउट करने लगता है|  कुछ एकदम चुप हो जाते हैं तो कुछ क्रोधी और चिडचिडे| कुछ लोग सबके साथ अच्छा महसूस करते हैं लेकिन अकेले होते ही टेंशन में आ जाते हैं| 

अवसाद के क्या लक्षण हैं? इन संकेतों से पहचानें अवसाद के लक्षणों को

कम नींद या ज्यादा नींद,आलस, थकान, बेचैनी,भूलना,कब्ज, सिरदर्द, वजन गिरना अवसाद के लक्षण हैं| 

डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति रियलिटी से दूर भागने लगता है, डरपोक हो जाता है,  नशे का शिकार हो जाता है, उल्टा सीधा खाने लगता है, शरीर में भी कुछ खास तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं|

अवसाद के क्या कारण हैं?

अवसाद के लक्षण कारण प्रकार व उपचार
अवसाद के कई कारण हो सकते हैं|  हेरिडिटी, असफलता, रोग से डर या पीड़ा, हार्मोन असंतुलन, घर की कलह,  लक्ष्य पूरे ना होना, आर्थिक तंगी, प्रिय जन का बिछड़ना, डायवोर्स, ब्रेकअप,  शारीरिक कमजोरी या कमी, पढ़ने लिखने में कमजोर होना, मां बाप प्यार ना मिलना, कुछ गलत कर बैठना और उसके उजागर होने का डर|

छोटे-छोटे तनाव, दुख, पीड़ा, शोक, रोग, दोष आगे चलकर बड़ा रूप ले लेते हैं और ये अवसाद का कारण बनते हैं|

अवसाद के कितने प्रकार हैं? 

अवसाद कई प्रकार का होता है, अनेक तरह के पर्सनैलिटी डिसऑर्डर्स  और Syndroms डिप्रेशन से जुड़े हुए हैं|

अवसाद से कैसे निकलें? 

अवसाद एक गंभीर समस्या है| लेकिन इसका निवारण संभव है|  आपका खान-पान जीवन शैली इसे ठीक करने में मदद करती है| प्राणायाम,  आसन, एरोबिक्स, एक्सरसाइज, डांस सहित सभी तरह की तीज शारीरिक गतिविधियां इसे ठीक करने में सहायक हैं|  मेडिटेशन यानी ध्यान को अवसाद का एक इलाज बताया जाता है लेकिन ध्यान की कृत्रिम विधियां कई बार डिप्रेशन को और ज्यादा बढ़ा देती हैं|  इसलिए अवसाद से ग्रसित व्यक्ति सीधे ध्यान ना करें| ध्यान से पहले यम, नियम, आसन, प्रत्याहार, प्राणायाम से खुद को ही ध्यान के लिए तैयार करें|

विटामिन B12, सेलेनियम, विटामिन डी, ओमेगा 3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, बीटा कैरोटीन, विटामिन सी जिंक और प्रोटीन डाइट से अवसाद ठीक करने में हेल्प मिलती है|

मैदा, शक्कर,  नमक, तेल, घी,  कैफीन, शराब, चाय, तंबाकू   का सेवन कम से कम करें|

विपरीत परिस्थिति में धैर्य ना खोएं,  धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े,  नेगेटिव लोगों से दूर रहे, रहें, दर्गद भरे गजलें और गीत ना सुने, बाहर घूमने निकले,  मोबाइल पर अवसाद से जुड़ी हुई सामग्रियां सर्च ना करें, पॉजिटिव लोगों से मिलें| 

अवसाद जीवन को जटिल बनाता है|  लेकिन अवसाद को जटिल हम बनाते हैं|   यदि हम ठान लें कि हमें अवसाद से बाहर निकलना है तो हम यह जरूर कर सकते हैं|

अतुल विनोद 


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