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संगीत उद्योग में खामोश क्रांति 

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Thu , 29 Feb

सार

एनएफटी और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल करके आदर्शवादी उद्यमियों को क्रिएटर इकॉनमी की मदद करनी चाहिए और वे ऐसा कर सकते हैं।

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विस्तार

इस आँकड़े को देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। भारत में हर तीन मिनट में 10 लाख गानों की स्ट्रीमिंग होती है अर्थात् हर दिन 48 करोड़ स्ट्रीम। आंकड़ों को लेकर काम करने वाली वेबसाइट स्टेटिस्टा के मुताबिक इससे सालाना 90 करोड़ रुपये का राजस्व आता है।विकिपीडिया के मुताबिक पिछले दशक में हर महीने भारत में 4.9 करोड़ कैसेट टेप बिके जिनमें से एक तिहाई पायरेटेड थे और उनका बाजार पर कब्जा ॰भी था, उनकी जगह अब इंटरनेट पर संगीत की स्ट्रीमिंग ने ले ली थी।

यह तो खेद की बात है कि पुराने दौर की तरह इंटरनेट के दौर में भी एक दर्जन से भी कम कंपनियां ही भारतीय स्ट्रीमिंग बाजार में दबदबा रखती है। इससे भी अधिक दुख की बात है कि उनका मौजूदा कारोबारी मॉडल उनके बड़े घाटे की वजह है।आखिर देश के उस सपने का क्या हुआ जिसमें यह सोचा गया था कि वर्ल्ड वाइड वेब सूचनाओं की साझेदारी को लोकतांत्रिक बनाएगा,कि यह हर व्यक्ति को इस बात की आजादी मिलेगी कि वह अपने विचारों को साझा कर सके और लेनदेन कर सके। सवाल यह है कि ऐसे में इस पर आधा दर्जन कंपनियों का दबदबा कैसे कायम हुआ?

इस दबदबे की एक वजह समझ आती है कि भारत तथा दुनिया के अन्य देशों के आर्थिक नीतिकारों ने इंटरनेट और वेब के एक खास पहलू पर समुचित ध्यान नहीं दिया और वह है नेटवर्क प्रभाव की शक्ति। इसके चलते इस उद्योग पर छह कंपनियों का दबदबा कायम हो गया क्योंकि उनके पास नेटवर्क के एक हिस्से को सब्सिडी देने की आर्थिक क्षमता थी।

नेटवर्क प्रभाव के दौर में प्रतिस्पर्धा को नियमित करने के नए तरीके भी दुनिया के किसी प्रतिस्पर्धा नीति संबंधी कानून में नहीं सामने आए हैं, परंतु संगीत उद्योग में एक खामोश क्रांति घटित हो रही है। उदाहरण के लिए क्रिएटर इकॉनमी का विकास। इस पर नजर डालना जरूरी है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में विस्तारित हो सकती है।

जानकारों के अनुसार इसे दो प्रौद्योगिकियां रेखांकित करती हैं: नॉन-फंजिबल टोकंस (एनएफटी) और ब्लॉकचेन। एनएफटी को किसी भी मीडिया से जोड़ा जा सकता है जबकि आमतौर पर एनएफटी की जो सामग्री होती है वह दरअसल चित्र, वीडियो, संगीत या किसी अन्य रूप में होती है।

इस एनएफटी को ब्लॉकचेन पर भंडारित किया जाता है। किसी गीत या तस्वीर या आलेख में उकेरा गया एनएफटी उसके स्वामित्व को पुष्टि योग्य बनाता है और बिचौलियों मसलन गैलरीज या रिकॉर्ड लेबल की जरूरत को खत्म करता है और क्रिएटर को यह अवसर देता है कि वह अपनी सामग्री को सीधे श्रोताओं को बेच सकें।इस तरह क्रिएटर अपने काम का अधिक मुनाफा रख सकेंगे। ब्लॉकचेन का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करता है कि भंडारण का विकेंद्रीकरण इस प्रकार किया जाए कि कोई एक व्यक्ति या समूह नियंत्रण न रखे बल्कि सभी उपयोगकर्ता सामूहिक नियंत्रण रखते हैं।

एनएफटी और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल करके आदर्शवादी उद्यमियों को क्रिएटर इकॉनमी की मदद करनी चाहिए और वे ऐसा कर सकते हैं। इससे जो आर्थिक तंत्र उभरेगा वह क्रिएटरों को यह अवसर देगा कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का फायदा उठाएं और अपनी खुद की सामग्री, उत्पाद ओर सेवाओं का वितरण करें। क्रिएटर इकॉनमी रचनाकारों और उनके दर्शकों या श्रोताओं के बीच सीधा रिश्ता कायम करने में मदद करती है।

इसका एक पहलू रचनात्मक स्वतंत्रता का भी है, जिसमें क्रिएटरों के पास यह स्वतंत्रता होगी कि वे ऐसी सामग्री तैयार कर सकें जो उनके नजरिये और उनके मूल्यों के अनुकूल हो। इससे नए श्रोता और दर्शक आकर्षित होंगे जिन्हें विश्वसनीय और विशिष्ट सामग्री की जरूरत होगी जो पारंपरिक मीडिया में उपलब्ध नहीं होती।