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ऐसे आरोप घटाते विपक्ष की विश्वसनीयता

सार

राहुल गांधी एक बार फिर कांग्रेस और टीएमसी की हार को वोट चोरी बता रहे हैं. राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम पर अपनी प्रतिक्रिया में दावा किया कि पश्चिम बंगाल और असम चुनाव आयोग के समर्थन से भाजपा द्वारा चुनाव चोरी के स्पष्ट मामले हैं..!!

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विस्तार

    उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में सौ से अधिक सीटें चुराई गई हैं. ममता बनर्जी ने भी ऐसा ही आरोप लगाया है. राहुल गांधी कहते हैं, हम ममता बनर्जी से सहमत हैं. राहुल गांधी अपनी प्रतिक्रियाओं पर स्थिर नहीं रहते हैं. बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वह ममता बनर्जी की सरकार को कोस रहे थे. सभाओं में कह रहे थे, कि ममता बनर्जी ने पोलराइजेशन किया है. अगर उन्होंने अच्छी सरकार चलाई होती तो राज्य में बीजेपी को उभरने का मौका नहीं मिलता.

    जो राहुल गांधी चुनाव प्रचार में ममता का बनर्जी की सरकार के कामकाज की आलोचना कर रहे थे, जो टीएमसी की सरकार को हराने के लिए सभी सीटों पर कांग्रेस को चुनाव लड़ा रहे थे, जो यह स्थापित कर रहे थे, कि ममता बनर्जी की सरकार ने जिस तरह से शासन चलाया है, उससे उनको नुकसान होगा. उस समय राजनीतिक विश्लेषक ऐसा मान रहे थे, कि राहुल गांधी बंगाल की जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं.

    अपने गठबंधन में विपक्ष का सहयोगी दल होने के बावजूद कांग्रेस का राज्य में वजूद नहीं होने पर भी ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं, इसका मतलब वह बंगाल में जनाक्रोश के कारण कांग्रेस की संभावनाएं तलाश रहे थे. अब जब चुनाव परिणाम आए हैं और टीएमसी के खिलाफ जनाक्रोश परिणामों में परिलक्षित हुआ है, तब वह फिर वोट चोरी की थ्योरी लाकर अपनी कमजोरी छुपाने की ना केवल कोशिश कर रहे हैं, बल्कि जनादेश के साथ सीना जोरी भी करते दिखाई पड़ रहे हैं.

    असम में कांग्रेस 10 साल बाद भी बीजेपी के मुकाबले में खड़ी नहीं हो पाई. कांग्रेस का मुख्यमंत्री फेस खुद ही विधानसभा चुनाव हार गए. लोकसभा में जो कांग्रेस का उपनेता है, वह अपनी विधानसभा सीट को नहीं बचा पाया. असम में कांग्रेस संगठन बिल्कुल खराब हालत में है. प्रो मुस्लिम छवि कांग्रेस को लीलती जा रही है. कांग्रेस के बड़े हिंदू नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. 

    असम के मुख्यमंत्री भी कांग्रेस छोड़कर ही बीजेपी में आए थे. जो आज बीजेपी का नॉर्थ ईस्ट में सबसे पावरफुल फेस बन गए हैं. कांग्रेस ने जिस तरीके का प्रचार अभियान चलाया, राहुल गांधी सार्वजनिक सभा में असम के मुख्यमंत्री को उनकी सरकार बनने पर जेल में डालने की धमकी दे रहे थे. दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रवक्ता मुख्यमंत्री की पत्नी पर तीन पासपोर्ट रखने का झूठा आरोप लगा रहे थे. पुलिस में एफआईआर होने के बाद अंग्रिम जमानत के लिए अदालतों में भटकते रहे. 

    कांग्रेस अपने संगठन की कमजोरी और गलत नीतियों को कभी भी अपनी हार के लिए जिम्मेदार नहीं मानती है. राहुल गांधी की वोटचोरी की थ्योरी भी वहीं सामने आती है, जहां वह या उनके सहयोगी चुनाव हारते हैं. जहां उन्हें चुनाव में सफलता मिलती है, वहां वह चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष मानते हैं. तमिलनाडु में भी डीएमके धराशायी हुई है. वहां चूंकि भाजपा को फायदा नहीं हुआ है, इसलिए राहुल गांधी तमिलनाडु में वोट चोरी का आरोप नहीं लग रहे हैं. केरल में तो कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली है, इसलिए वहां तो राहुल गांधी की वोट चोरी के थ्योरी कैसे चल पाएगी. राहुल गांधी और विपक्षी दल अपनी राजनीतिक गलतियों को जनादेश की चोरी में छुपाना चाहते हैं. 

    बंगाल और तमिलनाडु में चलते चुनाव लोकसभा के विशेष सत्र में परिसीमन के साथ महिला आरक्षण का बिल गिराने के लिए इन चुनावों में सभी जिम्मेदार दलों को महिलाओं ने सजा दी है. चुनाव परिणाम पर अपनी प्रतिक्रिया में पीएम नरेंद्र मोदी भी यह कह रहे हैं कि जहां चुनाव हुए हैं, वहां महिला आरक्षण विधेयक गिराने के लिए जिम्मेदार दलों को महिलाओं ने सजा दी है और भविष्य में होने वाले चुनाव में भी उन दलों को सजा मिलकर रहेगी. उन्होंने समाजवादी पार्टी का भी नाम लिया. आगे होने वाले चुनाव में यूपी में भी विपक्ष को इस राजनीतिक भूल का सामना करना पड़ सकता है.

    अपनी राजनीतिक गलतियों, अक्षमताओं और कामचोरी को वोट चोरी की थ्योरी से ढंकने की कोशिश राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं की विश्वसनीयता को ही कम कर रही है. जो राहुल गांधी चुनाव प्रचार में ममता बनर्जी के गवर्नेंस के खिलाफ स्पीच दे रहे थे. वही आज उनकी पराजय को वोट चोरी की थ्योरी से ढंककर इलेक्शन कमीशन को टारगेट करने की कोशिश कर रहे हैं. इलेक्शन कमीशन निष्पक्ष और निर्भीक चुनाव कराने के लिए निश्चित रूप से प्रशंसा का पात्र है.

    जिस तरह से आयोग ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी ताकत से अंजाम दिया, यह प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक और विधि सम्मत सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकार की है. लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया ही अगर गलत मतदाता सूची पर निर्भर रहेगी तो फिर पूरा चुनाव ही दोषपूर्ण हो जाएगा.

        चुनावी प्रक्रिया को सिलेक्टिव रूप से एक राज्य में निष्पक्ष और दूसरे राज्य में पक्षपाती बताने की राहुल गांधी की नीति उनके ही खिलाफ जा रही है. जनता के बीच उनकी ही छवि खराब हो रही है. उनका व्यक्तित्व ही अस्थिर सोच का प्रमाणित हो रहा है. उनकी ही निर्बलता और विफलता प्रमाणित हो रही है. जहां जीते उस राज्य में चुनावी प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं है. जिस राज्य में हारे वहीं उन्हें वोट चोरी दिखाई पड़ती है. जहां भाजपा को जनादेश मिला वहां वोट चोरी हो रही है और जहां कांग्रेस को जनादेश वहां चुनाव निष्पक्षता से हो रहा है. राहुल गांधी का यह दृष्टिकोण उनकी मानसिक कमजोरी प्रदर्शित कर रहा है.

    राहुल गांधी डेमोक्रेसी को मजबूत करने की बात करते हैं. लेकिन अपने ऐसे आरोपों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का पाप कर रहे हैं. 

        वोट चोरी का फेक नेरेटिव राहुल गांधी के पॉलीटिकल कैरेक्टर को ही फेक साबित करने लगा है.