जीवन यात्रा कैसे करें

जीवन यात्रा कैसे करें

मनुष्य जीवन श्री भगवान द्वारा प्रदत्त अमूल्य उपहार है। मनुष्य जीवन से ज्यादा अमूल्य कोई भी निधि नहीं हो सकती। अतः हमें अपनी संपूर्ण जीवनयात्रा विचारपूर्वक धर्मपूर्ण ढंग से करनी चाहिए।



हम इस संसार में अकेले खाली हाथ आएं हैं और अकेले ही खाली हाथ जाएंगे। अपने मन में हमें यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि इस जीवन के संघर्ष में कोई दूसरा व्यक्ति हमारी मदद करेगा, कोई भी नहीं। परिवार का कोई भी सदस्य अथवा पत्नी भी नहीं। हमें अपना जीवन संघर्ष अकेले और अकेले अपने दम पर करना है।

इस संसार में कोई भी कार्य असंभव नहीं है। हमें दृढ़ संकल्पवान, साहसी, दृढ़ निश्चय आलस्य हीन होकर पूरे मनोयोग से जीवन यात्रा करनी चाहिए। इस संसार में कोई भी खराब या बुरा नहीं है। अपने को भी अच्छा समझें और पूरे संसार को भी अच्छा समझें। किसी की बुराई न करें दूसरों की बुराई करोगे तो जीवन बुरा हो जाएगा और दूसरों की बड़ाई करोगे तो जीवन बड़ा हो जाएगा। किसी को अपना दुश्मन न मानें, दुश्मन का भी सदैव हित करें।

मनुष्य जीवन-भर केवल उन वस्तुओं का चिंतन करता रहता है, जो उसके साथ नहीं जाने वाली हैं। जो वस्तुएं उसके साथ जाने वाली हैं, उसके बारे में वह एक पल के लिए भी चिंतन नहीं करता। अत: संपूर्ण जीवन यात्रा में केवल उन वस्तुओं का चिंतन करो जो मरने के बाद तुम्हारे साथ जाने वाली हैं। इस जीवन में स्वास्थ्य और चरित्र सर्वाधिक मूल्यवान है। अरब-खरब शंख पदम से भी ज्यादा। अतः हर पल, हर समय अपने स्वास्थ्य और चरित्र के प्रति सदैव जागरूक रहें। जिस तरह हम प्रतिदिन एक घंटा मोबाइल चार्ज कर उसे ऊर्जावान बनाते हैं, उसी प्रकार नित्य ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रतिदिन 50 मिनट प्रात: सैर, 20 मिनट व्यायाम, 10 मिनट प्राणायाम करें। भोजन निश्चित समय पर निश्चित मात्रा में ग्रहण करें। इससे हम निरोगी बनकर शतायु होंगे।

थोड़ा-सा भी नुकसान होने पर हम रोने लगते हैं, छटपटाने लगते हैं हमें सदा ध्यान रखना चाहिए कि 'यश अपयश, जीवन-मरण, लाभ-हानि,प्रभु हाथा' इन छः वस्तुओं का संचालन भगवान के हाथ में है फिर रुदन कैसा? क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है?

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आए, जो कुछ लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है।


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