कैसे हुई महात्मा गांधी की हत्या. जानिए पूरी कहानी…

कैसे हुई महात्मा गांधी की हत्या. जानिए पूरी कहानी.
साल 1948 में 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसीलिए इस दिन को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए सभी जगह सभाएं आयोजित की जाती है. इस दिन महात्मा गांधी को याद करते हुए देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए भी जाते हैं.



अगर हम  महात्मा गांधी के जीवन परिचय की बात करे तो उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में ही लगा दिया. अपनी इस देश भक्ति के कारण उन्होंने अपनी पहचान देश और विदेश में भी बनाई. इसीलिए आज भी उनका नाम ना केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में भी एक स्थायी छाप की तरह मौजूद है. गांधी ने देश को आजादी दिलाने के लिए कई अहिंसक आन्दोलन भी किये लेकिन उनकी जिंदगी का आखरी अनशन आन्दोलन 13 जनवरी 1948 को हिन्दू-मुस्लिम एकता बनाए रखने और साम्प्रदायिक उन्माद के खिलाफ कलकत्ता में किया था.



यह आन्दोलन उनकी जिंदगी का आखरी आंदोलन इसलिए था क्योंकि 18 जनवरी 1948 को आंदोलन खत्म करने के करीब 11 दिन बाद 30 जनवरी 1948 को गांधी की हत्या कर दी गई. कुछ इतिहास के जानकर बताते है कि गांधी हत्या से तीन दिन पहले ही दिल्ली गए थे और उन्होंने वहा पर शांति स्थापित करने के उद्देश्य से महरौली स्थित कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह पर भी गए थे. उनका यह दिल्ली दोरा अचानक ही बना था क्योंकि उन दिनों दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा में जल रहा था.



किसने और कैसे की महात्मा गांधी की हत्या.

हत्या के कुछ समय पहले करीब पांच बजकर दस मिनट पर गांधी और पटेल की बातचीत खत्म हुई. वल्लभभाई पटेल अपनी बेटी के साथ गांधीजी से मिलने पहुंचे करीब शाम चार बजे वह वहा पर पहुच गए थे और उनकी एक घंटे तक बातचीत हुई. उसके बाद महात्मा गांधी प्रार्थना वाली जगह की ओर जाने लगे. उस स्थान पर जाते हुए गांधी आभा और मनु से बात कर रहे थे, तभी उनकी और नाथूराम गोडसे आए और झुक गए कुछ समय तक तो यह लगा की वह गांधी के पैर छूने की कोशिश कर रहा था लेकिन उनके झुकते ही आभा ने कहा कि उन्हें पहले ही देर हो गई हैं.



तभी गोडसे ने मनु को धक्का दे दिया और उनके हाथ से माला और पुस्तक  गिर गई. मनु पुस्तक उठाने के लिए नीचे झुकीं ठीक उसी समय  गोडसे ने अपनी पिस्टल से लगातार तीन गोलियां गांधीजी के सीने और पेट में मार दीं. तभी गांधीजी निचे गिरने लगे तभी आभा ने उनके सिर को अपने हाथों का सहारा दिया.

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