भोपाल: नवागत हॉफ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभ रंजन सेन ने वन विभाग के सेवानिवृत हॉफ के एक और निर्देश को पलटते हुए फील्ड के अधिकारियों को प्रचलित पॉलीपॉट पध्दति से सागौन पौधों का रोपण करने का आदेश दिया है। सेन के आदेश को क्षेत्रीय अधिकारियों ने स्वागत योग्य बताया है।
सेन ने जारी आदेश में कहा है कि पूर्व में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (वीएन अंबाड़े) द्वारा समस्त सागौन पौधों का रोपण रूटशूट तकनीक के माध्यम से करने हेतु निर्देशित किया गया है। इसके तारतम्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, अनुसंधान एवं लोकवानिकी द्वारा समस्त सामाजिक वानिकी वृत्तों को सामाजिक वानिकी रोपणियों में मानक आकार के सागौन रूटशूट तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। सेन ने अपने आदेश में कहा है कि क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा चर्चा में अवगत कराया गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार संदर्भित पूर्व जारी निर्देशों के पहले ही वन क्षेत्रों में सागौन रोपण हेतु क्षेत्र तैयारी के कार्यों के लिए पॉलीपॉट पौधों के लिए गड्डा खुदाई का अधिकांश कार्य पूर्ण कराया जा चुका था।
पीसीसीएफ कैम्पा की भी आपत्ति
पीसीसीएफ कैम्पा द्वारा अवगत कराया गया है कि वर्ष 2026 में रोपित किये जाने वाले पौधों के लिए क्षेत्र तैयारी कार्य भारत सरकार द्वारा स्वीकृत एपीओ के अनुसार पूर्ण किये जा चुके हैं।जिसमें गड्डा खुदाई कार्य भी हो चुका है। उनके द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि शासकीय रोपणियों के निरीक्षण में यह पाया गया है कि रोपण अवधि तक उचित गुणवत्ता के आवश्यक मात्रा में रूटशूट तैयार हो पाना संभव नहीं है।
निज़ाम बदलते ही अफसरों की सोच बदली
निज़ाम बदलते ही अफसरों की सोच और कार्यशैली भी बदल जाती है। इसका ताज़ा उदाहरण पीसीसीएफ कैम्पा मनोज अग्रवाल हैं। अग्रवाल, पूर्व वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े के थिंक टैंक माने जाते थे। जब अंबाड़े सागौन पौधों का रोपण रूटशूट तकनीक से लगाने के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे रहे थे तब पीसीसीएफ कैम्पा उनके कक्ष में बैठे थे। इस सम्बन्ध में अंबाड़े ने रूटशूट तकनीक सागौन पौधों का रोपण के निर्देश के बारे संवाददाता को बता रहे थे तब अग्रवाल ने भी समय और धन की बचत के लाभ गिनाये थे।
सप्लायर्स और अधिकारियों का सांठगांठ: अंबाड़े
पूर्व वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े का कहना है कि तब कतिपय अधिकारियों ने आकर मुझे बताया था कि अक्टूबर-नवंबर में गड्डा खुदाई कार्य भी हो चुका है। ऐसा कहने वाले अधिकारियों से मैंने प्रतिप्रश्न किया कि चलो बताओ कि प्रदेश कहां-कहां गड्डे हुए है, कोई जवाब नहीं दे सका। दरअसल हो रहा है कि सप्लायर्स और अधिकारियों का सांठगांठ बना हुआ है, इसलिए मेरे निर्देश को पलटा गया। मैं तो रिटायर्ड हो चुके हूं। नए अपने हिसाब से काम करेंगे।
कमेटी बनाने पर विवाद फिर संशोधन
वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने एसडीजी रोडमैप तैयार करने और लक्ष्यों के साथ योजनाओं की मैपिंग और समय-समय पर नीति आयोग को सहयोग आदि के लिये मनोज अग्रवाल पीसीसीएफ वर्किंग प्लान की अध्यक्षता एसडीजी कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी में एसडीओ वर्किंग प्लान को सदस्य सचिव और एसडीओ विकास, एसडीओ कैम्पा, एसडीओ ग्रीन इंडिया मिशन एवं बांस मिशन के साथ प्रबंधक संचालक राज्य लघुवनोपज और प्रबंधक संचालक वन विकास निगम को बतौर सदस्य शामिल किया गया। यानि मूलत: एसडीओ की कमेटी में दो वरिष्ठ पीसीसीएफ को शामिल किया गया। कमेटी गठित होने के आदेश की प्रति जैसे ही अधिकारियों के व्हाट्सअप ग्रुप पर वायरल हुआ वैसे ही विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। वरिष्ठ अधिकारियों को लगा कि उन्हें जानबूझकर अपमानित करने की मंशा से कमेटी मे शामिल किया गया है। इस संबंध जब वन बल प्रमुख से पूछा तो उन्हें तत्काल अपनी गलती को स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों प्रबंधक संचालक अपने प्रतिनिधि के रूप मे किसी को नामांकित करेंगे। इस संबंध में संशोधित आदेश भी जारी हो रहें है।
गणेश पाण्डेय