फ़ैशन के नाम पर कम कपड़े पहनने में क्या बुराई है?

*नुक्कड़ नाटक – फ़ैशन के नाम पर निर्वस्त्र होते युवा*

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(बच्चे आपस में बात करते हुए, कॉलेज के फर्स्ट ईयर की पहली फ्रेशर पार्टी की तैयारी में)

*रीना* - अरे यार मैं तो डिसाइड ही  नहीं कर पा रही पार्टी में क्या पहनूं?

*सुनीता* - कुछ ऑनलाइन आर्डर कर लो, आजकल सारा लेटेस्ट फ़ैशन ऑनलाइन उपलब्ध है।

*मीना* - चल मोबाईल में एक साथ शॉपिंग करते हैं।

(तीनों के साथ मोबाईल में ड्रेस देखती हैं)

*रीना* - ये कितनी कूल और सेक्सी ड्रेस हैं न?

*मीना* - है तो लेकिन थोड़ी ज्यादा छोटी और डीप है। क्या तुम्हारी मम्मी इसे पहन के कॉलेज आने देगी?

*रीना* - अरे बाबा, घर से पहन के आने की क्या जरूरत, बैग में लाऊंगी और कॉलेज के वॉशरूम में चेंज कर लूंगी।

(सविता बड़े गौर से उन लोगों की बातें सुन रही थी, उन्हें टोंकते हुए बोली)

*सविता* - रीना, मम्मी से पूंछे बिना कोई ड्रेस ऐसे छुप के पहनना गलत है। फ़ैशन के नाम पर युवा लड़कियां  निर्वस्त्र होने की तरफ़ बढ़ रही हैं। स्कर्ट छोटी होते होते अति मिनी हो गयी है और जीन्स निक्कर बन गया । और उसमें भी कई फ़टे कट वाले डिज़ाइन के साथ। यह अनुचित है, भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है। पढ़ने आये हो, फैशन परेड से रिज़ल्ट नहीं मिलेगा।

*रीना* - व्यंग में हंसते हुए , अगर मैं अपनी मम्मी की सुनूँगी तो पार्टी में बिल्कुल बहनजी लगूंगी।

सविता plz प्रवचन मत दो, तुम न समय से पहले मम्मी लोगों जैसी मैच्योर बातें करती हो। अरे हां, याद आया तुम तो गायत्री परिवार की हो। अश्लीलता के विरुद्ध आंदोलन चला रखा है। होली में मैंने देखा था।

*सुनीता* - चलो मिलकर लड़को की बातें सुनते हैं छुप के, वो क्या तैयारी  कर रहे हैं।

(चारों खिड़की के पास छुपकर लड़कों की बातें सुनती हैं)

*रवि* - और भाई मोहन पार्टी में क्या पहन के आ रहे हो?

*मोहन* - मैं तो पार्टी में एन्जॉय करने आ रहा हूँ, मुफ़्त में इन कॉलेज गर्ल के अंग प्रदर्शन का शो देखने को मिलेगा। बहुत कुछ एन्जॉय करने को मिलेगा।

*मोहित*- भाई मैं तो उसको ही मिस फ्रेशर बनाऊंगा जो सबसे कम कपड़े में होगी।

(तीनों ठहाके लगा के हंसते हैं)

*रवि* - ये लड़कियां कितनी बेवकूफ़ होती हैं, पहले हमें ही दिखाने के लिए कम कपड़े पहनती हैं,फिर हमें ज्ञान देती हैं कि हम स्कर्ट छोटी से छोटी करेंगे और लड़कों तुम सोच बड़ी से बड़ी रखो😄😄😄😂😂

*मोहन* - यार हमें पता है उस सविता को छोड़कर सबकी सब सेक्सी शब्द सुनने के लिए हमारे मुंह से बेताब होंगी।

*मोहित* - हां भाई सही कहा, सविता में कुछ बात है। पढ़ने में भी अच्छी है। किसी अच्छे संस्कारी घर से है।

*मोहन* - भाई मैं तो सविता जैसी लड़की से ही शादी करूंगा। जो व्यवस्थित और संस्कारी हो।

*रवि* - अरे वाह, अभी तो तू लड़कियों पर कमेंट पास कर रहा था। गर्लफ्रेंड के लिए सेक्सी अंगप्रदर्शन वाली लड़की और घर बसाने के लिए सविता जैसी सुंस्कारी।

*मोहन*  - भाई ये जो सेक्सी दिखने वाली फैशनपरस्त लड़कियां हैं ये टाइमपास और गर्लफ्रेंड के लिए ठीक हैं। लेकिन घर को घर एक सुंस्कारी लड़की ही बनाती है। जिस पर आप विश्वास कर सको, जो बच्चों को भी अच्छे संस्कार दे।

*रवि* - बड़े उच्च ख्याल हैं, चलो पार्टी की तैयारी करते हैं।

*मोहित* - कल मेरी बहन सरिता भी पार्टी में आ रही है, याद रखना उसका भाई इसी कॉलेज में है। तुम लोग उस पर टुच्ची नज़र से मत घूरना।

*रवि* - कितनी अजीब बात है न, अपनी बहन की सबको फिक्र है।दूसरे की बहन को स्वयं घूरते हो और अपनी बहन को गार्ड करते हो?

*मोहित* - रवि को धक्का देते हुए, क्या बोला, मैंने किसी लडक़ी को नहीं बोला खुली तिजोरी की तरह सामने आओ। लड़कियां किसके लिए अंग प्रदर्शन करती हैं हम लड़कों को दिखाने के लिए। कोई लड़की दूसरी लड़की को देख के इन कपड़ो में खुश नहीं होती। खुद सोचो।

ये लड़कियां महंगे मोबाइल में स्क्रीन गार्ड लगाती हैं, कवर करके रखती हैं कि महंगा मोबाईल खराब न हो। तो क्या ख़ुद को कवर नहीं रख सकती जिससे किसी की कुदृष्टि उनपर न पड़े।

आसमान की बारिश नहीं रोका जा सकता लेकिन छाते से या बरसाती कोट से स्वयं को तो बचाया जा सकता है।

सविता भी तो लड़की है,क्या हम में से किसी ने उसके बारे में अभद्र कमेंट पास किया। ये इज्ज़त उसने खुद कमाई है।

मैंने तो अपनी बहन सरिता से बोल दिया है कि सविता के साथ ही  दोस्ती रखे। और उन अश्लील वस्त्रो वाली तितलियों से दूर रहे।

( *रोहित* ने बीचबचाव किया और बोला अच्छा काम पर लगो बातें बहुत हो गयी, और प्लीज़ आपस मे मत लड़ो। ।ग़लती हम सबकी है, हम लड़के यदि इनके भौंडे अंग प्रदर्शन को सपोर्ट न करें, तो यह किनको दिखाने के लिए पहनेगी।इस बार हम सबको उस लड़की को वोट करना चाहिए जो सबसे शालीन हो। हम सुधरेंगे तो ये भी जरूर सुधरेंगी। कम से कम अपना कॉलेज की अपनी क्लास तो सुधर ही जाएगी)

(इधर उन चारों लड़कियों ने उनकी बातें सुनी तो स्तब्ध रह गयी)

*रीना* - मुस्कुराते हुए बोली, मैं वही कपड़े पहन के आऊंगी जो मम्मी कहेगी ठीक है।वैसे भी हम यहां पढ़ने आते हैं फैशन परेड करने नहीं।

(चारों हंसते हुए चली गईं)
श्वेता चक्रवर्ती

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