सोयाबीन भावांतर योजना के लिये मंडी बोर्ड की आय में किया नया प्रावधान


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स्टोरी हाइलाइट्स

नये प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक मंडी समिति अपनी कुल प्राप्तियों (लायसेंस फीस तथा मंडी फीस) के 15 प्रतिशत को आरक्षित निधि के रुप में रखेगी तथा मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक को अधिकार होगा कि वह इस 15 प्रतिशत को 20 प्रतिशत तक बढ़ा सके..!!

भोपाल: राज्य सरकार ने सोयाबीन भावांतर योजना के लिये धनराशि जुटाने के लिये राज्य मंडी बोर्ड की आय में नया प्रावधान किया है। इसके लिये 45 साल पुराने मप्र कृषि उपज मंडी मंडी निधि लेखा नियम 1980 में बदलाव किया गया है। नये प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक मंडी समिति अपनी कुल प्राप्तियों (लायसेंस फीस तथा मंडी फीस) के 15 प्रतिशत को आरक्षित निधि के रुप में रखेगी तथा मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक को अधिकार होगा कि वह इस 15 प्रतिशत को 20 प्रतिशत तक बढ़ा सके। 

पहले मंडी समिति को 5 प्रतिशत राशि आरक्षित निधि में रखने का प्रावधान था तथा प्रबंध संचलक इसे 10 प्रतिश्त तक बढ़ा सकते थे। इसे अलावा, पच्चीस साल पुराने राज्य विपणन विकास निधि नियम 2000 में भी बदलाव कर दिया गया है जिसके तहत अब किसान सडक़ निधि और कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास निधि को छोडक़र शेष सकल प्राप्तियों के 15 प्रतिशत की दर से राज्य मंडी बोर्ड द्वारा पृथक बैंक खाते में प्रत्येक तीन माह में आरक्षित निधि के रुप में राशि जमा कराया जायेगा। 

इसके अलावा, मंडी बोर्ड साल के अंत में होने वाली अतिरिक्त बचत को भी, जिसकी अधिकतम सीमा मंडी बोर्ड के एमडी तय करेंगे, उक्त बैंक खाते में जमा करेंगे। पहले पांच प्रतिशत राशि जमा करने का प्रावधान था।