अब भोपाल में सरकारी आवास ट्रांसफर होने या रिटायर होने के बाद छह माह से अधिक नहीं रखा जा सकेगा


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स्टोरी हाइलाइट्स

राज्य के गृह विभाग ने इसके लिये शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 में संशोधन कर उसे प्रभावशील कर दिया है..!!

भोपाल: अब राजधानी भोपाल में सरकारी आवास सरकारी सेवक के ट्रासंफर होने या रिटायर होने पर छह माह से अधिक नहीं रखा जा सकेगा। इसके लिये राज्य के गृह विभाग ने शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 में संशोधन कर उसे प्रभावशील कर दिया है।

नये संशोधन के अनुसार, ट्रांसफर होने पर अधिकतम छह माह तक सामान्य किराया दर पर आवास रखा जा सकेगा तथा इसके उपरान्त दाण्डिक दर से किराया वसूला जायेगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी। इसी प्रकार, रिटायर होने या त्यागपत्र देने, सेवा से पृथक होने अथवा अन्य किसी कारण से आवास अनधिकृ रुप से रखने पर शासकीय सेवक छह माह तक ही आवास रख सकेगा परन्तु प्रथम तीन माह तक सामान्य किराये पर आवास रखा जा सकेगा तथा अगले तीन माह के लिये सामान्य किराये के 10 गुना के बराबर किराया देना होगा और इसके उपरान्त दाण्डिक दर से किराया वसूला जायेगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी। 

इसके अलावा, केंद्र सरकार के शासकीय सेवकों से आवास का किराया उन्हें दिये जाने वाले गृह भाड़ा भत्ते के बराबर वसूला जायेगा। इसी प्रकार, शासकीय आवासों के किराये में भी वृध्दि कर दी गई है। सामाजिक एवं राजनैतिक संस्थाओं व मान्यता प्राप्त अधिकारी कर्मचारी संगठनों व सरकारी उपक्रमों के कर्मियों को ज्यादा मासिक किराया भी देना होगा जोकि बी टाइप हेतु 12 हजार रुपये, सी टाइप हेतु 9 हजार रुपये, डी टाइप हेतु 7200 रुपये, ई टाइप हेतु 6 हजार रुपये, एफ टाइप हेतु 3600 रुपये, जी टाइप हेतु 2400 रुपये, एच टाइप हेतु 1200 रुपये व आई टाइप हेतु 400 रुपये होगा।