बेचैनी से कैसे निपटें? 10 उपाय जो आपकी एंग्जाइटी को खत्म कर देंगे| ATUL VINOD 

बेचैनी से कैसे निपटें? 10  उपाय जो आपकी एंग्जाइटी को खत्म कर देंगे| ATUL VINOD 

मंच पर खड़े होकर लोगों को संबोधित करना हो, परीक्षा हो या छोटा काम एंग्जाइटी अलग-अलग तरह से हमारे सामने पेश आती है| 

चिंता, व्याकुलता, उद्विग्नता, बेचैनी, व्यग्रता, घबराहट ये सभी एंजाइटी के लक्षण है| 

किसी भी हाल में नर्वस होने की जरूरत नहीं है, चाहे एग्जाम हो| ऐसी किसी भी स्थिति में आप यदि चिंतित हो भी जाएं तो अपनी चिंताओं को उन लोगों से शेयर करें जो आपके नज़दीकी हैं चाहे वो आपका मित्र हो आपका बॉस हो या सहकर्मी हो|

किसी भी तरह की एक्टिविटी, टास्क या सिचुएशन में एंग्जाइटी फील करना हमारे प्रदर्शन को बिगाड़ सकता है|

इससे हम अनकंफरटेबल हो जाते हैं, हमारा दिमाग अव्यवस्थित हो जाता है और इसका सीधा असर हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है|  कमजोर व्यक्तित्व के कारण हमें समाज से रिजेक्शन मिलने की आशंका होती है| अच्छे काम बिगड़ने का खतरा तो बना ही रहता है|

आजकल कोरोनावायरस भी  एंग्जाइटी का सबब बन रहा है|  कई लोग संक्रमण की आशंका से बिना संक्रमित हुए ही बीमार पड़ जाते हैं| दरअसल एंग्जाइटी वैचारिक संक्रमण है जो हमारी थॉट प्रोसेस को ब्लॉक कर देती है|

जितना खतरा वास्तविक परिस्थितियों में नहीं होता उससे ज्यादा खतरा वैचारिक आशंकाओं से जुड़ा होता है|

एक बात और है कि हम जब ये सोचते हैं कि हम डरेंगे नहीं, चिंतित नहीं होंगे, हम मजबूती से खड़े रहेंगे, उतना ही हम डरते हैं, चिंतित होते हैं और कमजोर बनते हैं|

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हमें ना तो खुद को चिंतित होने से रोकना है ना हीं बार-बार ये कहना है कि हमें डरना नहीं है| हमें कॉन्फिडेंट रहना है|

डरना, चिंतित होना और घबराना ये मानव का स्वभाव है|  इन तीनों को बुरा मत मानिए|  ये तीनों हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं|  सोचिए मानव को हमेशा के लिए यदि अभय बना दिया जाए तो क्या होगा?  

जब आप इन तीनों के प्रति बुरा महसूस नहीं करेंगे, ना ही इन्हें बुरा मानेंगे तो ये आपको कम से कम सताएंगे|

अपने व्यक्तित्व की कमजोरियों को स्वीकार कीजिए और ये सोचिए कि आपकी जो कमजोरियां हैं वो ही  सब की कमजोरियां हैं| कोई भी व्यक्ति मंच पर कितना ही कॉन्फिडेंट नजर आए, निडर और साहसी दिखे वो भी अंदर से कहीं न कहीं किसी रूप में चिंतित, डरा हुआ और घबराया हुआ होता है|

एंग्जाइटी को कभी भी भगाने की कोशिश मत कीजिए|  ना ही एंग्जाइटी के लिए किसी तरह की दवाओं का सहारा लीजिए|

भगाना उसे पड़ता है जो गलत और बुरा है हम उसे बुरा मानेंगे ही नहीं तो उसके इलाज की जरूरत क्या है?

जिसे हम दोस्त बना देते हैं वो हमें परेशान नहीं करता, जिसे हम दुश्मन बना देते हैं वो बार-बार हमें भूत की तरह तंग करता है|  एंग्जाइटी को भी दोस्त बना लीजिए|  जब ये दोस्त बन जाएगी तो आपको उस वक्त कभी भी परेशान नहीं करेगी जब आप किसी निर्णायक स्थिति में होंगे|

प्रेम के साथ धीमी लंबी गहरी सांसो के साथ एंग्जाइटी को प्रेम दीजिए|  मुस्कुराहट के साथ उसका स्वागत कीजिए|  एंग्जाइटी के साथ खुद को सुरक्षित महसूस कीजिए| सोचिए  कि इससे आप मजबूत बनते हैं|

हुईये वही जो राम रचि राखा …. “समय और जगह” बहुत महत्वपूर्ण है|  ईश्वर ने आप का सही वक्त और सही जगह निर्धारित की हुई है इसलिए आपको  सही समय पर सही जगह मिल ही जाएगी|  चिंता करने की कोई बात नहीं है| 

एंग्जाइटी हमारी इगो से भी जुड़ी हुई है|  लोग क्या सोचेंगे यदि मैं असफल हो गया, लोग क्या सोचेंगे जब मैं मंच पर बोलूंगा, लोग क्या सोचेंगे यदि मैंने कुछ गलत कर दिया|

कौन असफल नहीं होता? कौन गलत नहीं करता? मंच पर कौन लड़ख्डाता नहीं है?

यदि बहुत ज्यादा तनाव है तो थोड़ा सा घूम लें| नेचर से बातें कीजिए अपने आप को डायवर्ट कीजिए|  उन पलों को याद कीजिए जब आप बहुत खुश थे|  उन यात्राओं को जहन में लाइए जिनमें आपने अपने आपको बहुत रोमांचक महसूस किया|

तनाव हमारी सोच, विश्वास तंत्र और प्रोग्रामिंग पर डिपेंड करता है|  इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं हैं, अपने आप से भी परफेक्शन की उम्मीद मत कीजिए|  अपनी कमजोरियों को खुलकर व्यक्त कीजिए, अपने ऊपर हंसिये|

जब आप एंग्जाइटी फील करें तब उन अनुभवों को लिखना शुरु कर दें| आपके पास मोबाइल होता ही है| मोबाइल पर ही टाइप करना शुरू करें| तब आपको क्या होता है जब आप तनाव और चिंता में होते हैं| क्या आपकी हार्ट की धड़कनें बढ़ जाती है लिखिए| क्या आपको पसीना आता है लिखिए| क्या आपके सोचने समझने की क्षमता खत्म हो जाती है लिखिए|

तूफान के सामने खड़े होने से उड़ जाओगे और झुक जाने से बच जाओगे| एंग्जाइटी का तूफान भी ऐसा ही होता है उसके सामने समर्पण कर दो| खड़े रहने की और सामना करने की बकवास बातों को जहन से हटा दो |

बहुत ज्यादा स्ट्रेस हो जाने पर लोगों से चर्चा करें| अपनी समस्या के बारे में अपने करीबियों से बात करने में कोई बुराई नहीं है| जिसकी वजह से ये स्टार्ट हो रहा है उससे भी शेयर करें|

ना तो लड़े न खड़े हो न प्रतिरोध करें नहीं बदलने की कोशिश करें|

“atulyam”

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