देश के रक्षकों का सम्मान-दिनेश मालवीय

देश के रक्षकों का सम्मान

-दिनेश मालवीय

जिस देश के लोग सीमा पर अपना घर-परिवार छोड़ कर और अपने प्राणों को संकट में डालकर सबकी रक्षा करने वाले रक्षकों का सम्मान करना जानते हैं, वह देश कभी असुरक्षित नहीं हो सकता. दुनिया के अनेक देशों में ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति कहीं भी बैठा हो और अगर सामने से उसके देश का कोई सैनिक गुजरे तो वह उसके सम्मान में खड़ा हो जाता है. उसे सेल्यूट करता है. हमारे देश में भी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार देशवासियों से ऐसा ही करने का आह्वान किया था.

मोदीजी के आह्वान को लोग भले ही अक्षरश: नहीं मानें, लेकिन भारतवासियों के मन में भी अपनी सेना और सैनिकों के प्रति सम्मान किसी भी देश के लोगों की तुलना में कम नहीं है. हमारे सामने कोई सैनिक आ जाने पर हमारा मन उसके प्रति सम्मान से भर अवश्य जाता है.

विश्व में अमेरिका की सेना सबसे ताकतवर मानी जाती है. अमेरिका को सुपरपावर कहा जाता है. सुपरपावर उस देश को कहा जाता है, जो एक ही समय में अनेक मोर्चों पर समान रूप से प्रभावी युद्ध कर सकता हो. अनेक देश उसपर एकसाथ आक्रमण कर दें, तब भी वह उन्हें हरा सकता है. अमेरिका के सैनिकों में अपने देश की रक्षा और प्रतिष्ठा के प्रति जज्बा है वह अनुकरणीय है. इसी प्रकार अमेरिकावासियों का अपने सैनिकों के प्रति प्रेम भी अनुकरणीय है. वहाँ एक सैनिक की मौत को भी बहुत बड़ा नुकसान माना जाता है.

अमेरिका में यह जज्बा कोई नयी बात नहीं है. इसका एक बहुत सुंदर प्रसंग कहीं पढने में आया था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्राहम लिंकन बहुत गरीब परिवार के थे. उन्हें दोनों समय भोजन के लिए तक बहुत संघर्ष करना पड़ता था. एक बार उनका परिवार दो दिन से भूखा था और उनके भाई-बहन भूख से तड़प रहे थे. लिंकन काँटा लेकर मछलियाँ पकड़ने नदी पर गये. वहाँ उन्हने सिर्फ एक ही मछली मिली. वह उस मछली को लेकर यह सोचते हुए घर लौट रहे थे कि चलो दो दिन से भूखे परिवार को कुछ तो आहार मिल सकेगा.

रास्ते में उन्हें एक सैनिक मिला. लिंकन ने परम्परा के अनुसार उसे सेल्यूट किया. उसने लिंकन से पूछा कि मछली कहाँ से लाये हो? लिंकन ने कहाकि शिकार कर के ला रहा हूँ. सैनिक ने कहा कि मैं बहुत दिनों से ऎसी जगह जंग में था जहाँ मछली नहीं मिलती. मुझे मछली खाए बहुत दिन हो गये. क्या तुम यह मछली मुझे दे सकते हो?

लिंकन बड़े धर्मसंकट में पड़ गये. एक तरफ भूखे परिवार के चेहरे उनकी आँखों के सामने थे, तो दूसरी ओर अपने देश के सिपाही की इच्छा. उन्होंने मछली तुरंत सिपाही को दे दी. वह खाली हाथ घर लौट आये. माँ के पूछने पर उन्होंने पूरा प्रसंग उसे बता दिया. माँ ने उसे शाबाशी देते हुए कहा कि तुमने अपने कर्तव्य को बहुत अच्छी तरह निभाया है.

यही अब्राहम लिंकन आगे चलकर अमेरिका के यशस्वी राष्ट्रपति बने. यह प्रसंग हमें प्रेरणा देता है कि देश की रक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाले सैनिकों और अन्य रक्षकों के लिए हमें जो कुछ भी सम्भव है अवश्य करना चाहिए.

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