भोपाल: प्रदेश में नर्मदा पथ परिक्रमा के ऐसे स्थल जहां वृक्षारोपण का कार्य हो चुका है, वहां 20 से 25 किमी की दूरी पर आश्रय स्थल/यात्री प्रतीक्षालय बनाये जायेंगे। इसके लिये पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे इसके प्रस्ताव बनाकर भेजें। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्षा ऋतु के चार माह छोडक़र साल भर नर्मदा पथा परिक्रमा चलती है।
नर्मदा नदी मप्र के 16 जिलों से होकर गुजरती है, जिनमें शामिल हैं : अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, देवास, रायसेन, सीहोर, खंडवा, खरगोन, धार, बड़वानी, अलीराजपुर एवं शहडोल। इनमें करीब 2 हजार किमी की यात्रा होती है। नर्मदा परिक्रमा के 3 स्वरूप माने गए हैं: पहली- पूर्ण परिक्रमा है जिसे करने में लगभग 3 साल 3 महीने 13 दिन लगते हैं। साधु-संत इसे पैदल करते हैं। दूसरी - सामान्य परिक्रमा होती है जिसे पैदल यात्रा करने में 90 से 180 दिन लगते हैं तथा परिक्रमा वासी प्रति दिन 20 से 40 किलो मीटर की दूरी पैदल तय करते हुए आगे बढ़ता है। तीसरी- संक्षिप्त परिक्रमा होती है जिसे कार, बस या बाइक से कुछ ही दिनों में पूरी की जा सकती है। यह परिक्रमा वे लोग करते है जो चलने में सक्षम नहीं है या समय का अभाव है। ऐसे लोग 15 से 20 दिन में ही यात्रा पूरी कर लेते है।
डॉ. नवीन आनंद जोशी