समिता राजौरा बनी मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक


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स्टोरी हाइलाइट्स

बुधवार को जारी आदेश के तहत 1990 बैच के आईएफएस विभाष ठाकुर को पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार से हटाकर सीईओ अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के पद पदस्थ किया गया है, इसी आदेश के तहत पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट होने के बाद अर्चना शुक्ला को पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार शाखा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है..!!

भोपाल: राज्य शासन ने 1992 बैच की आईएफएस समिता राजौरा को मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक (CWLW ) के पद पर पदस्थ किया है। यह पद एक मार्च से रिक्त था। शासन ने सबसे बड़ा झटका 1990 बैच के आईएफएस विभाष ठाकुर को दिया है। उन्हें वन भवन से ही बाहर कर दिया है। 

बुधवार को जारी आदेश के तहत 1990 बैच के आईएफएस विभाष ठाकुर को पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार से हटाकर सीईओ अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के पद पदस्थ किया गया है। इसी आदेश के तहत पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट होने के बाद अर्चना शुक्ला को पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार शाखा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

लंबे अरसे बाद शुक्ला की वन विभाग की मुख्य धारा में वापसी हुई है। वर्ष 2000 के बाद पहली बार वन विभाग में एक और परंपरा टूटी है। एक अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक को लघु वनोपज संघ का प्रबंध संचालक बनाया गया है। कैडर प्रबंधन के तहत  यह पद पीसीसीएफ स्तर के अधिकारी को बतौर डेपुटेशन पदस्थ करने के लिए आरक्षित है। इसके पहले बीआर खरे बतौर एपीसीसीएफ लघु वनोपज संघ में एमडी के पद पर कार्य कर चुके हैं। यानि 1997 बैच की आईएफएस कमोलिका मोहन्ता को बतौर एपीसीसीएफ लघु वनोपज संघ में एमडी बनाया गया है। वर्तमान में एपीसीसीएफ कमोलिका मोहन्ता के पास प्रशासन-2 शाखा की जिम्मेदारी है।