प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। इसके तहत सिंचाई की कई परियोजनाओं का काम प्रदेश में चल रहा है। अकेले नर्मदा विकास प्राधिकरण में 22 बड़ी योजनाएं चल रही हैं। यह भी सच है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ेगा, जिसका लाभ किसानों को मिलना तय है। वहीं यदि बात जल संसाधन विभाग करें तो इसके अधीन भी केन-बेतवा सहित 18 वृहद परियोजना एवं 26 मध्यम और कई लघु परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन यह दोनों विभाग इंजीनियरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में परियोजना को पूरा होने के लिए किसानों को दशकों तक इंतजार करना होगा।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में मुख्य अभियंता के चार पद हैं और चारों खाली पड़े हैं। वहीं मेंबर इंजीनियर के पद पर भ्रष्टाचार के आरोपी डीएल वर्मा को पदस्थ किया गया है। जिनके जिम्मे इन खाली चारों पदों की भी जिम्मेदारी के साथ मेंबर ऊर्जा और मेंबर वित्त का भी प्रभार है। मतलब एक ही इंजीनियर पूरे विभाग के दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, जिससे काम और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि एक इंजीनियर विभाग में चल रहे अरबों की दो दर्जन परियोजना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसी से मिलती-जुलती स्थिति जल संसाधन विभाग की है।
एनवीडीए में मुख्य अभियंताओं के पद रिक्त
बात करें नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की तो इस विभाग में चार मुख्य अभियंता के पद सृजित हैं, जिनमें जबलपुर का बरगी बांध, बरगी नहर, सनावद और इंदौर शामिल हैं। इसके अलावा मेंबर इंजीनियर, मेंबर ऊर्जा के पद भी शामिल हैं। उक्त पदों पर मुख्य अभियंता स्तर के इंजीनियरों की पदस्थापना होती रही है। लेकिन अगर वर्तमान की स्थिति देखें तो यह सभी पद खाली पड़े हुए हैं। यानि कि विभाग बिना मुख्य अभियंताओं के ही चल रहा है। इन सभी पदों पर संचालन सिर्फ एक इंजीनियर के द्वारा किया जा रहा है। पूरे विभाग का जिम्मा अधीक्षण यंत्री से दो पद ऊपर के इंजीनियर को देकर उसे मेंबर इंजीनियर बनाया गया है। मेंबर इंजीनियर बनाए गए डीआर वर्मा के पास मेंबर ऊर्जा और मेंबर वित्त की भी जिम्मेदारी है।
वर्मा की नियुक्ति भी विवादों के घेरे में
डीआर वर्मा की मेंबर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति भी विवादों के घेरे में है। उनकी नियुक्ति के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के कारण शास्ति आरोपित की गई थी। इसके बाद भी सरकार द्वारा मजबूरी में उनको नियुक्ति दी गई। यहां तक तो ठीक है आज स्थिति यह है कि उनके पास मेंबर इंजीनियर के अलावा चारों चीफ इंजीनियर का प्रभार भी है। गौरतलब है कि इस समय नर्मदा घाटी अधीन लगभग 22 बड़ी योजनाएं चल रही हैं, जो कि अरबों रुपए की है। यह सभी परियोजनाएं एक ही इंजीनियर डीएल वर्मा की देखरेख में चल रही हैं। एक इंजीनियर द्वारा इन सभी परियोजनाओं का निरीक्षण-परीक्षण करना कैसे संभव है। यह यक्ष प्रश्न है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल गुणवत्ता को लेकर है।
जल संसाधन विभाग में 80 फीसदी पद खाली
बात करें जल संसाधन विभाग की तो इस विभाग में इंजीनियर के 80 फीसदी पद खाली पड़े हुए हैं। जल संसाधन विभाग 11 जोनों में बंटा हुआ है। प्रत्येक जोन में एक मुख्य अभियंता पदस्थ होना चाहिए। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि लगभग 9 जोन में मुख्य अभियंता नहीं है। भोपाल, सिवनी, रीवा, राजगढ़, बोधि बिना मुख्य अभियंताओं के ही चल रहे हैं। वहीं उज्जैन के मुख्य अभियंता के पास इंदौर का अतिरिक्त प्रभार है। सागर के मुख्य अभियंता केन-बेतवा का काम देख रहे हैं।
गणेश पाण्डेय