पाप की अग्नि में तपते मन को शीतल करने वाला एक दिव्य आश्रयजहाँ पश्चाताप स्वयं प्रायश्चित बन जाता है…और जहाँ देवता भी मार्ग खोजते थे- वहीं मनुष्य को मिलता है मोक्ष का सहारा..!!
उज्जैन, केवल नगर नहीं, सनातन चेतना की धड़कन। उज्जैन कोई साधारण नगर नहीं है। यह वह पावन भूमि है जहाँ काल स्वयं रुककर शिव का साक्षात्कार करता है। पुराणों में वर्णित महाकाल वन किसी भौगोलिक सीमा का नाम नहीं, बल्कि वह दिव्य चेतना-क्षेत्र है जहाँ कण-कण में शिवत्व व्याप्त है- जहाँ श्वास साधना है और मौन मंत्र बन जाता है।
इसी आध्यात्मिक महिमा को साकार करता है चौरासी महादेवों में प्रतिष्ठित एक विशिष्ट शिवधाम- श्री नागचन्द्रेश्वर महादेव।यह मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि क्षमा, आत्मशुद्धि और करुणा का केंद्र है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय देवराज इंद्र की दिव्य सुधर्मा सभा में देवर्षि नारद धर्म, तीर्थ और मोक्ष की महिमा का वर्णन कर रहे थे। तभी देवताओं के मन में जिज्ञासा जागी-
“पृथ्वी लोक में वह कौन-सा स्थान है, जो दर्शन मात्र से मोक्ष प्रदान करता है?”
देवर्षि नारद का उत्तर स्पष्ट और निर्णायक था- “प्रयाग पुण्यदायी है, किंतु उससे दस गुना अधिक पवित्र है अवंतिका की महाकाल भूमि। वहाँ शिव स्वयं असंख्य रूपों में विराजमान हैं।”यह सुनते ही इंद्र सहित समस्त देवता दिव्य विमानों में सवार होकर अवंतिका- आज की उज्जैन की ओर प्रस्थान कर गए।
महाकाल वन में प्रवेश करते ही देवता विस्मय में पड़ गए।
चारों ओर असंख्य शिवलिंग…
सर्वत्र शिव निर्माल्य…शास्त्र कहते हैं- शिव निर्माल्य का लंघन महादोष है। दर्शन सामने था, किंतु भय आड़े खड़ा था। देवता असमंजस में पड़ गए और बिना दर्शन किए लौटने को विवश हो गए।उसी समय देवताओं ने एक तेजस्वी दिव्य पुरुष को आनंदित भाव से स्वर्ग की ओर जाते देखा।पूछने पर उसने कहा-“मैं महाकाल का भक्त नागचन्द्रेश्वर हूँ। मुझे शिवगण होने का वर प्राप्त हुआ है।”देवताओं ने विस्मय से पूछा “इतने निर्माल्य के बीच तुम्हें दोष क्यों नहीं लगा?”
शिवभक्त का उत्तर ही इस तीर्थ का सार है-“ईशान कोण में स्थित एक दिव्य शिवलिंग का दर्शन,शिव निर्माल्य के समस्त दोषों को भस्म कर देता है। वहाँ पहुँचने वाला हर प्राणी—देव हो या मनुष्य—पवित्र हो जाता है।”देवता उस स्थान पर पहुँचे…दर्शन हुआ…और समस्त दोष विलीन हो गए। उसी शिवभक्त के सम्मान में भगवान शिव वहाँ नागचन्द्रेश्वर नाम से प्रतिष्ठित हुए। यह कथा केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है-मनुष्य त्रुटियाँ करता है,अनजाने पाप करता है,ग्लानि से घिर जाता है…
पर सच्ची श्रद्धा, पश्चाताप और शरणागतिउसे पुनः पवित्र कर देती है।शिव दंड नहीं देते-
वे शुद्धि का अवसर देते हैं।
दर्शन फल और लोकमान्यताएँ
मान्यता है कि श्री नागचन्द्रेश्वर महादेव के दर्शन सेज्ञात-अज्ञात पापों का क्षय होता है।शिव निर्माल्य दोष का निवारण होता है।मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भीतर ऐसा हल्कापन अनुभव होता है, मानो वर्षों का बोझ उतर गया हो। इसी कारण सावन, श्रावण सोमवार, नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर यहाँ अपार श्रद्धालु उमड़ते हैं। पटनी बाजार क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन मंदिर चौरासी महादेव परिक्रमा का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है।श्रद्धालुओं की मान्यता स्पष्ट है-“नागचन्द्रेश्वर के बिना महाकाल की यात्रा अधूरी है।”
यहाँ की पूजा केवल बाह्य कर्म नहीं,यह अंतरात्मा का स्नान है।
महाकाल की नगरी का शाश्वत संदेश हैं दोष हो सकते हैं, भूलें हो सकती हैं- पर शिव करुणा के महासागर हैं।
जो सच्चे मन से उनके चरणों में आता है,उसका कल्याण अवश्यंभावी है। जय शिव।
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