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देश के आर्थिक मोर्चे की चेतावनी

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sun , 22 Jul

सार

भारत की अर्थव्यवस्था के वास्तविक हालात क्या हैं? कहाँ हैं चुनौतियां

janmat

विस्तार

चेतावनी देता देश का आर्थिक मोर्चा

बैंकों का कुल फंसा हुआ कर्ज देश केलिए चेतावनी के रूप में उभरने की सम्भावना है | कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, वैसे भी बढ़ती महंगाई भी फंसे कर्ज को बढ़ा ही रही है| मार्च, २०२२ तक बैंकों का कुल फंसा हुआ कर्ज [जीएनपीए ]९.८० प्रतिशत रहने की सम्भावना है,यदि हालात ऐसे ही बने रहे और फौरन कोई उपाय नहीं हुए ज्यादा खराब होंगे, तो यह फंसा हुआ कर्ज ११.२२ प्रतिशत तक पहुंच सकता है|यह चेतावनीनुमा अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी दूसरी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में लगाया है| रिजर्व बैंक का मानना है कि सितंबर, २०२२ तक बैंकों का फंसा कर्ज ८.१ प्रतिशत से ९.५ प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो सितंबर, २०२१ में ६.९ प्रतिशत था|

रिपोर्ट के अनुसार मार्च, २०२१तक अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों का फंसा कर्ज ६११८० करोड़ रुपये था जो बैंकों के कुल फंसे हुए कर्ज (जीएनपीए) का ७.५ प्रतिशत था, जबकि शुद्ध फंसा कर्ज २.४ प्रतिशत था | सूचीबद्ध बैंकों का जीएनपीए जून, २०२१ में ८.११ लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून, २०२० में यह ८.३२ लाख करोड़ रुपये था| जो इस बात का संकेत देता है कि सरकारी बैंकों का प्रदर्शन निजी बैंकों से बेहतर था |

जहाँ सरकारी बैंकों का जीएनपीए ४.२ प्रतिशत कम हुआ, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों का ३.३ प्रतिशत बढ़ा| इस तरह इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शुद्ध फंसे कर्ज में चार प्रतिशत की कमी आयी, जबकि निजी क्षेत्र में यह २२ प्रतिशत की दर से बढ़ा|

ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार निजी निवेश अभी भी कोरोना-पूर्व स्तर पर नहीं पहुंच सका है| स्पष्ट है कि आम लोगों की आय उस स्तर पर नहीं पहुंच सकी है और वे अपने खर्च में कटौती करने पर मजबूर हैं| बढ़ती महंगाई भी जेब में सेंध लगा रही है| इस पर काबू पाने के लिए मांग और आपूर्ति के बीच समन्वय की जरूरत है, लेकिन इस मोर्चे पर संबंधित तंत्र आगामी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं| महंगाई बढ़ाने में कुव्यवस्था का भी बड़ा हाथ है|निर्यात से आयात ज्यादा होने से चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में चालू खाते का घाटा९.३ अरब डॉलर हो गया, जो जीडीपी का १.३ प्रतिशत है. जबकि, पहली तिमाही में यह ६.६ अरब डॉलर रहा था, जो जीडीपी का ०.९ प्रतिशत था| रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तिमाही में चालू खाते का घाटा बढ़ने का कारण व्यापार घाटा का बढ़कर ४४.४ अरब डॉलर हो जाना है| चालू खाते का घाटा वित्तवर्ष २०२१-२२ की तीसरी तिमाही में २५ अरब डॉलर से ऊपर रहने की संभावना है| ओमिक्रॉन वैरिएंट अर्थव्यवस्था को फिर से नुकसान पहुंचा सकता है| 

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और सरकार विविध जरूरी मदों पर अपेक्षित खर्च नहीं कर पा रही है, जिससे मांग में वृद्धि नहीं हो रही है| चूंकि, मांग में बढ़ोतरी से ही आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है, इसलिए, अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार धीमी है| अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने से कारोबारी और आम आदमी की आमदनी में कमी आयेगी, जिससे लोग अपने ऋण की किस्त एवं ब्याज नहीं चुका पायेंगे और उससे फंसे कर्ज में वृद्धि हो सकती है|

पहले से फंसे कर्ज की वसूली का काम करने वाले कानून या संस्थान फंसे कर्ज की वसूली करने के मामले में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाये हैं, इसके बावजूद फंसे कर्ज की वसूली में पहले से तेजी आयी है| विगत छह वर्षों में बैंक पांच लाख करोड़ रुपये से ज्यादा फंसे कर्ज की वसूली करने में सफल रहे हैं |मौजूदा परिप्रेक्ष्य में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में फंसे कर्ज में वृद्धि की आशंका को गलत नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि फिलवक्त ओमिक्रॉन देश के हर हिस्से में तेजी से बढ़ रहा है और महंगाई में भी बढ़ोतरी हो रही है।