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उपचुनाव- शिवराज की मेहनत का परिणाम या VD की कुशल रणनीति? कैसे हुई बीजेपी मध्य प्रदेश उपचुनाव में आगे - अतुल विनोद  

अतुल विनोद अतुल विनोद
Updated Tue , 05 Mar

सार

मध्यप्रदेश उपचुनाव के नतीजों ने देश को चौंका दिया है|  इन नतीजों ने कांग्रेस की मध्य प्रदेश में गिरती स्थिति को उजागर कर दिया है|

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विस्तार

शिवराज की मेहनत का परिणाम या VD की कुशल रणनीति? कैसे हुई बीजेपी मध्य प्रदेश उपचुनाव में आगे| 

 

कमलनाथ के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में कांग्रेस कुछ खास नहीं कर पाई है|

जिस तरह के नतीजे सामने आए हैं उससे लगता है कि कमलनाथ इन चुनावों का लाभ लेने से चूक गए हैं|

यदि इन चुनावों में कांग्रेस को बढ़त मिलती तो उसका सीधे तौर पर फायदा कमलनाथ को मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बाजी शिवराज सिंह चौहान जीत ले गए|

मध्यप्रदेश में चुनावों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबसे ज्यादा मेहनत की|

शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में सबसे ज्यादा 39 जनसभाएं की|

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने 21 और विपक्ष के नेता कमलनाथ ने 15 जनसभाएं की|

शिवराज सिंह चौहान और विष्णु दत्त शर्मा की जोड़ी ने जिस तेजी से चुनाव प्रचार में अगुवाई की उससे कांग्रेस पिछड़ गई|

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खंडवा लोकसभा समेत तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में जोरदार प्रचार किया, उन्होंने अधिकतम 39 जनसभाएं कीं और मतदान केंद्रों में पांच रातें बिताईं। शिवराज सिंह चौहान वैसे भी  धुआंधार चुनाव प्रचार के लिए जाने जाते हैं|  चुनाव प्रचार में उनका अंदाज जनता को खासा रास आता है|

प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनता से नजदीकी बढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी| 

कर्मचारियों को खुश करने के लिए चुनाव आयोग की परवाह किये बगैर DA में बढ़ोत्तरी का दाव काम करता दिखाई दिया| 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने भी 21 जनसभाएं की, सात स्थानों पर युवा सम्मेलन किए। विष्णु दत्त शर्मा ने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर खुदको स्थापित करने के लिए अपने वरिष्ठजनों से मार्गदर्शन लेकर एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह चुनाव प्रबंधन किया| उन्होंने ना  सिर्फ मैदानी जमावट की बल्कि उपर के स्तर पर भी समन्वय स्थापित कर त्रुटी विहीन प्रचार अभियान छेड़ा| 

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 15 जगहों पर सभा को संबोधित किया

किसकी कितनी सभाएं 

शिवराज सिंह चौहान 39 जनसभा 

विष्णु दत्त शर्मा 21 जनसभा  

कमलनाथ 15 जनसभा 

दिग्विजय सिंह 3 जनसभा 

उमा भारती 14 जनसभा 

नरेंद्र सिंह तोमर 6 जनसभा 

कैलाश विजयवर्गीय 6 जनसभा 

ज्योतिरादित्य सिंधिया 6 जनसभा 

फग्गन सिंह कुलस्ते 6 जनसभा 

पंकजा मुंडे 6 जनसभा 

प्रहलाद सिंह पटेल 3 जनसभा 

वीरेंद्र खटीक 2 जनसभा 

लाल सिंह आर्य 2 जनसभा 

केशव प्रसाद मौर्य 2 जनसभा 

नरोत्तम मिश्रा 4 केशव प्रसाद मौर्य

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच जगहों पर रात्रि विश्राम कर के कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की|  मुख्यमंत्री के रात्रि विश्राम से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ बल्कि जनता में एक अच्छा संदेश गया|

जोबट, रैगांव खंडवा, बुरहानपुर और पृथ्वीपुर में मुख्यमंत्री का रात्रि विश्राम कारगर साबित हुआ|  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के सात स्थानों पर किये गये युवा सम्मेलन भी काम कर गए|

युवाओं का समर्थन मिलने में इन सम्मेलनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|

जब कोई पार्टी जीतती है तो उसके हर कदम की सराहना होती है| इसी तरह से बीजेपी के रणनीतिक कौशल और चुनाव प्रबंधन का डंका बजता हुआ दिखाई दे रहा है|

कहीं ना कहीं कमलनाथ आत्म-मंत्रमुग्ध नजर आए, जबकि दमोह में हार के बाद बीजेपी सबक लेकर तोलमोल कर कदम रखते हुए दिखाई दी|

विष्णु दत्त शर्मा ग्राउंड जीरो पर सामाजिक लोगों के साथ चार गांव में बैठकें की। चार स्थानों पर संगठन की बैठक ली। प्रबुद्ध सम्मेलन और महिला सम्मेलन में भी शामिल हुए।

इधर कांग्रेस की ओर से अजय सिंह, अरुण यादव ने भी मोर्चा संभाला| 

यादव पूरे समय खंडवा संसदीय क्षेत्र में तैनात रहे तो सिंह ने चारों निर्वाचन क्षेत्र में सभाएं की। कांग्रेस  के महासचिव और प्रदेश के प्रभारी मुकुल वासनिक ने भी चारों चुनाव क्षेत्रों में सभाएं की। प्रचार समाप्ति से पहले राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सभाएं की।

इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही पूरी ताकत लगाई|  जरूरत के मुताबिक बड़े नेताओं की सभा की गई बूथ प्रबंधन पर जोर दिया गया और प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का दरवाजा खटखटाया|

बीजेपी ने एक कॉल सेंटर भी स्थापित किया|

बीजेपी के चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक भूपेंद्र सिंह ने अपनी टीम के साथ मतदान की तैयारियों का जायजा लिया| वहीं, वहीं कांग्रेस कोर ग्रुप को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्थानीय नेताओं और निर्वाचन क्षेत्र के प्रभारी कार्यकर्ताओं से संपर्क करने का निर्देश दिया|

चुनाव के नतीजे सामने हैं और बीजेपी खुश है क्योंकि उसकी रणनीति कामयाब रही है, हालांकि कांग्रेस के लिए यह चुनाव एक सबक की तरह है|  बीजेपी इन चुनावों में जीत से मदमस्त हो सकती है या आगे भी इसी तरह की रणनीति बनाकर जीतने का सिलसिला जारी रख सकती है|