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अफ़सर हैं कि सुधरते नहीं

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Mon , 22 Jul

सार

केंद्र सरकार ने देश के सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को एक सख्त चेतावनी जारी की थी। कर्मचारियों को काम को लेकर सतर्क रहने और लापरवाही नहीं बरतने के आदेश दिए गए हैं..!

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विस्तार

केंद्र सरकार ने 1994 बैच की अरुणाचल प्रदेश सरकार में सेवारत आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। केंद्र सरकार ने इस अनिवार्य सेवानिवृत्ति से नौकरशाहों को संदेश दिया है कि जनता जनार्दन देश में सर्वोच्च है। इस मामले में किसी भी तरह की कोताही, लापरवाही और भ्रष्टाचार केंद्र सरकार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। 

इससे पहले भी केंद्र सरकार ने देश के सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को एक सख्त चेतावनी जारी की थी। कर्मचारियों को काम को लेकर सतर्क रहने और लापरवाही नहीं बरतने के आदेश दिए गए हैं। अगर ऐसा होता है तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन व ग्रेच्युटी रोकने के निर्देश दिए गए। इस आदेश पर राज्य सरकारों से अपने स्तर पर फैसला लेने को कहा गया था। केंद्र में सत्ता संभालने के साथ ही सरकार को पता चला था कि दिल्ली में आईएएस और कुछ अन्य अधिकारी कार्यालय के समय में गोल्फ खेलने चले जाते हैं। इस पर सरकार एक्शन में आ गई। सभी अधिकारियों को आगाह किया गया कि कार्यालय समय के दौरान कोई भी अधिकारी-कर्मचारी निजी कार्य से नहीं जा सकता। आईएएस अधिकारियों को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उनकी लगाम थामने वाला भी कोई हो सकता है। 

केंद्र सरकार ने साफ संदेश दे दिया कि आम लोगों की कीमत पर कुछ भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सत्ता संभालने के बाद इस सरकार ने कठोर कार्रवाई करते हुए ग्रुप-ए और बी स्तर के कुल 312 अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया। सरकार ने ग्रुप-ए के 36000 कर्मचारियों और ग्रुप-बी के 82000 कर्मचारियों के काम का रिव्यू किया। इनमें से 312 अफसर नकारा मिले। इनमें ग्रुप-ए के 125 अफसर और ग्रुप-बी के 187 अफसर शामिल हैं। 

सीबीआई ने 44 आईएएस और 12 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए। पिछले छह साल में 3464 शिकायतें आईएएस अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय और आपराधिक मामलों के तहत प्राप्त हुई हैं। अहम बात यह है कि शिकायतों के मामले हर साल बढ़ते गए हैं। मसलन जहां 2015-2016 में 380 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई, वह 2019-20 में करीब दोगुनी होकर 753 तक पहुंच गई। कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा 10 मार्च 2021 को लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 से फरवरी 2021 तक आईएएस अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय और आपराधिक मामलों के तहत कुल 3464 शिकायतें प्राप्त हुईं। सीबीआई के अनुसार इस अवधि में 44 आईएएस और 12 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, जबकि इस अविध में 43 आईएएस और 17 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ केंद्र सरकार ने कार्रवाई की है। प्रतिष्ठित भारतीय राजस्व सेवा से 27 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया। 

केंद्र सरकार के 104 कर्मचारियों पर साल 2021-22 में कार्रवाई की गई। इनमें ग्रुप-ए के सबसे अधिक 45 कर्मचारी हैं। केंद्र सरकार के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा। ये कार्रवाई प्रदर्शन, हाजिरी और अनुशासनात्मक मामलों को लेकर की गई। सरकार ने मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें रिटायर कर दिया। 

सर्वाधिक आश्चर्य तो यह है कि सरकार के स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता के खिलाफ राज्यों में गैर भाजपा सरकारों ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जिससे अधिकारियों-कर्मचारियों में भय व्याप्त हो सके। विपक्षी दल बेशक केंद्र पर बदले की कार्रवाई से ईडी और सीबीआई की कार्रवाई का आरोप लगाते रहें, किन्तु गैर भाजपा शासित राज्यों में सरकारी तंत्र को सुधारने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया।