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जबलपुर की घात कांग्रेस में बड़े बवंडर का पायलट प्रोजेक्ट 

आशीष दुबे आशीष दुबे
Updated Thu , 05 Mar

सार

भाजपा ने भंवर में फंसी कांग्रेस की नाव में छेद करने का तैयार कर लिया खाका..!! 

janmat

विस्तार

लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा ने मप्र में भंवर में फंसी कांग्रेस की नाव में छेद करने का प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। जबलपुर के कांग्रेस महापौर जगत बहादुर सिंह का भाजपा में पलायन इसका पायलट पीस माना जा रहा है। वहीं महाकौशल के ही कम से कम दो बड़े नेताओं की कांग्रेस छोड़ने की वह आशंका गहरा गई है, जो पार्टी के अंदरखाने महीने भर से तैर रही थी। 

विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि भाजपा इन दिनों कांग्रेस के उन इलाकों नेताओं को रडार पर रखे है, जहां विस चुनाव की हार के बाद भी लोकसभा के लिये उजले संकेत निकले हैं। जबलपुर के बगल की सीट छिंदवाड़ा समेत सूबे की आठ सीटें इसमें शरीक है। खास यह है कि इसी महीने मप्र में दाखिल हो रही राहुल गांधी की न्याय यात्रा से पहले भाजपा उसी तरह के घटनाक्रम रचने की फिराक में है, जैसे महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड में पेश आए हैं।

वैसे तो, भाजपा का जबलपुर मिशन काफी समय से चल रहा था, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल में एक मंच पर सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस के नेताओं की प्रकारांतर से तारीफ व आमंत्रण दे दिये थे, उन्होंने महापौर का भी जिक्र किया था। यानी तब तक सब कुछ 'फाइनल' हो चुका था। यादव के जिक्र में आदिवासी कांग्रेस विधायक ओंकार सिंह मरकाम भी थे, जिन्हें हाल में कांग्रेस हाईकमान ने काफी वजनदार बना दिया है। आदिवासियों का पूर्ण समर्थन हासिल करने में चुकी भाजपा शायद लोकसभा चुनाव में यह कसर पूरी करने पर आमदा है।

जहां तक जगत बहादुर का मामला है तो वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए कारोबारी विधायक संजय पाठक के बेहद करीबी हैं। कांग्रेस इससे सजग भी थी लेकिन एक कांग्रेस नेता का कहना है कि 'जगत बहादुर को साधने की कोशिश हुई थीं, मगर भाजपा ने कांग्रेस के महापौरों की बुरी तरह घेराबंदी कर रखी है, मुरैना व ग्वालियर के महापौरों की हालत भी अधिकारों व हैसियत के मामले में दयनीय हैं।

कांग्रेस की इस बेबसी में कई संकेत भी छिपे हैं। वैसे जगत बहादुर की तैयारी पुरानी इसलिये भी लगती है क्योंकि हाल के विस चुनाव में जगत बहादुर ने टिकट लेने से इंकार किया था, बताते हैं उन्होंने सुरजेवाला से कहा था कि वे लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं, इसलिए हाल में कांग्रेस में इकलौता नाम पैनल में रखा था।

बहरहाल, इस एपिसोड से महाकौशल के कुछ प्रभावी नेताओं के भावी रुख पर निगाहें जम गई हैं, तो अपने प्रभावी ओबीसी नेताओं को भी साधे रखने की चुनौती कांग्रेस के निजाम पर आ गई है, माना जा रहा है कि भाजपा के पास देने के लिये राज्यसभा का लॉलीपॉप भी है। विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से रास्ते कांग्रेस की तरफ मुड़ते नजर आए थे, अब मंजर दूसरा है। जाहिर है कांग्रेस के लिए यह 'जागते रहो' का वक्त है।

गडकरी की चिंताः यहां वरिष्ठ भाजपा नेता व मंत्री नितिन गडकरी का जिक्र मौजूं हैं, जिन्होंने हाल में अवसरवादी राजनेताओं के सत्ताधारी दल से जुड़े रहने की इच्छा पर गहरी चिंता जताई व कहा है, कि इस तरह की 'विचारधारा में गिरावट' लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। हमारी बहसों और चर्चाओं में मतभेद समस्या नहीं है, हमारी समस्या विचारों की कमी है। विचारधारा के आधार पर डटे लोगों की घटती संख्या लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।