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बेचारी गाय और भाजपा की बेचारगी

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sun , 25 Jul

सार

वैसे तो गोवंश की रक्षा पूरे देश में भाजपा का प्रमुख एजेंडा रहा है, लेकिन यह एजेंडे तक ही सीमित रहा |

janmat

विस्तार

बेचारी गाय गरीब है और कोई भी, उसके साथ कुछ भी कर सकता है | भोपाल जिले में की उस गौशाला , जहाँ गाय रंभाई कम और रोई ज्यादा की कहानी ताजा है | बेचारी गाय के साथ देश में जो बीतता है , उसका आर्तनाद सुनकर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा होगा कि “मेरे शब्द लिखकर रखिये जो पशु दूध नहीं देता, उसके गोबर से भी आय हो, ऐसी व्यवस्था आपके सामने खड़ी कर दूंगा” ईश्वर उनके यह शब्द जुमला न निकले और अपने वचन के अनुसार वे दस मार्च के बाद ऐसी व्यवस्था ला पाएं कि आवारा पशु लोगों के लिये लाभ का जरिया बने |

नरेंद्र मोदी बनारस में बन रहे बायो सीएनजी प्लांट के लिये गोबर की खरीदने की बात कह रहे हैं, मध्यप्रदेश के इंदौर में भी सीएनजी प्लांट शुरू हो रहा है | प्रधान मंत्री का यह वाक्य फलीभूत हो तो देश को ज्यादा लाभ होगा | उनका वचन है कि” हम इस समस्या का ऐसा समाधान निकालेंगे कि लोग घर लाकर गोवंश को बांधेंगे|”

उत्तर प्रदेश के लोग तो कुछ ऐसा भी कह रहे है कि जनता के मूड को भांपने वाले प्रधानमंत्री यदि समय रहते यह बाण चला देते तो ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को इसका लाभ मिलता। वैसे पूरे देश में आवारा पशु अब बड़ा मुद्दा है। विपक्ष हमलावर है और सत्तारूढ़ दल बचाव की मुद्रा में है। यही वजह है कि पश्चिम उ.प्र. में चले पलायन, धर्मांतरण, जिन्ना-गन्ना व पाकिस्तान के मुद्दे अवध व पूर्वांचल पहुंचते-पहुंचते छुट्टे जानवरों पर केंद्रित हो गया । ये आवारा जानवर, जिन्हें स्थानीय भाषा में छुट्टा जानवर कहा जाता है, सड़क से लेकर खेत तक मुसीबत का सबब बने हुए हैं, जिसे प्रतिपक्ष सरकार की नाकामी की तरह पेश करता है।

वैसे , आवारा पशुओं की समस्या नई नहीं है,उत्तरप्रदेश में चुनाव के कारण उसका रंग अलहदा दिखा | वैसे तो गोवंश की रक्षा पूरे देश में भाजपा का प्रमुख एजेंडा रहा है, लेकिन यह एजेंडे तक ही सीमित रहा | भोपाल में गौ दूध उत्पादक एक मित्र को गौ दूध बेचने के लिए ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ा , पर दूध के ग्राहक और ग्राहकी सिरे नहीं चढ़ी | वैसे शिवराज के परिजन मध्यप्रदेश में दूध का धंधा करते हैं, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोवंश प्रेम जगजाहिर है। दोनों सरकारों अपने-अपने राज्य में अवैध बूचड़खानों पर रोक लगाई गई, जिससे अवैध रूप से गायों को काटना कथित रूप से रुका। सरकार ने यहाँ और वहां गोवंश की सुरक्षा, स्वास्थ्य व देखभाल के कई बड़े फैसले लिये। बड़े पैमाने पर गोशालाओं का बड़ी संख्या में निर्माण किया गया, लेकिन उत्कृष्टता के स्थान पर दुर्घटना की कहानी ज्यादा सामने आईं । गौ शाला के संचालक और गौ पालक बजट पर्याप्त न होने की शिकायत करते हैं । असल में जब बेचारी गाय दूध देना बंद कर देती है तो लोग उसे खुला छोड़ देते हैं। सरकारों की सख्ती के कारण उसकी बिक्री बाजारों में नहीं हो पाती खेती की नई व्यवस्था में बैल की कोई जगह नहीं है। बछड़ों को छोड़ दिया जाता है। ये छुट्टे जानवर खेतों में खड़ी फसलों को निशाना बनाते हैं। किसान दिन में खेती करते हैं और रात में फसलों की रखवाली करते हैं। उन्हें खेतों की सुरक्षा के लिये कंटीली तारों पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इतना ही नहीं, आवारा पशुओं की वजह से सड़कों पर लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। खासकर एक्सप्रेस-वे और फोर लेन वाली सड़कों पर यह खतरा ज्यादा रहता है जहां वाहन तेज गति से चलते हैं। अब ग्रामीण इलाकों में लोगों के गुस्से को देखते हुए उत्तर प्रदेश की जनसभा में योगी आदित्यनाथ को घोषणा करना पड़ी कि नई सरकार बनने के बाद नौ सौ से हजार रुपये किसानों को पशुओं की देखभाल के लिये दिये जाएंगे। आवारा पशुओं को गोद लेने वालों को भी इसका लाभ देने की बात कही जा रही है। भाजपा हमेशा देर से जागती है, इस बार भी देर से जागी है।