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 कोरोना  दुष्काल गया नहीं है, सतर्क रहिये

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Tue , 20 Apr

सार

कुछ राज्यों ने भी अपनी तरफ से यह घोषणा की कि वे तीसरी खुराक अपनी ओर से देंगे, लेकिन अनेक राज्य, जैसे- महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि, में ऐसा नहीं हुआ या हो रहा है..!

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विस्तार

प्रतिदिन -राकेश दुबे

19/07/2022

कोरोना के  बढ़ते  मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने ७५ दिनों के लिए कोरोना टीके की तीसरी खुराक मुफ्त देने का जी फैसला लिया है |एक  समयोचित कदम है ,अभी तक केवल स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत लोगों तथा साठ साल की आयु से अधिक के बुजुर्गों को ही सरकारी केंद्रों पर तीसरा टीका मुफ्त दिया जा रहा था| कुछ राज्यों ने भी अपनी  तरफ से यह घोषणा की कि वे तीसरी खुराक अपनी ओर से देंगे, लेकिन अनेक राज्य, जैसे- महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि, में ऐसा नहीं हुआ या हो रहा है , कम सेकम मानवता पर आये संकट से मुकाबला करने के लिए एकमत होना जरूरी है |

कोई दो माह पहले वयस्कों को तीसरी खुराक यानी बूस्टर डोज देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी| तीसरी खुराक को मुफ्त देने की मांग कई दिनों से हो रही थी| जब दूसरी और तीसरी खुराक के बीच में नौ महीने का अंतराल रखा गया था, तब इसकी बड़ी वजह यह थी कि हमारे पास समुचित मात्रा में टीकों की आपूर्ति नहीं थी|  टीके से प्राप्त सुरक्षा छह महीने तक बहुत अच्छी तरह से कारगर रहती है और छह से नौ माह के बीच उसकी क्षमता में कमी आती है तथा नौ महीने के बाद वह मामूली रूप से कारगर रहता है| विज्ञान को यहाँ से आगे काम करना था, जोइस दुष्काल की समाप्ति तक निरंतर होना चाहिए |

जब वयस्क आबादी के लिए तीसरी खुराक को मुफ्त नहीं देने का फैसला हुआ था, तभी यह अनुमान लगाया गया था कि इससे टीकाकरण की गति में कमी आयेगी| इसकी एक वजह तो यह थी कि आबादी के बहुत बड़े हिस्से को टीकों की दो खुराक निशुल्क दी गयी थी, तो तीसरा टीका खरीदने में बहुत से लोगों को हिचक हुई|दूसरा कारण यह रहा कि कोविड संक्रमण में जनवरी-फरवरी के बाद से तेजी से कमी आयी और लोग कुछ निश्चिंत होने लगे, ऐसे में तीसरी खुराक लोगों की प्राथमिकता में नहीं रही| यह भी समझना होगा कि जब मुफ्त में टीका देने के बावजूद कई लोगों में उत्साह नहीं होता, तो पैसा देकर खुराक लेना तो और भी मुश्किल मामला है|कुछ राज्यों ने अपने तरफ से यह घोषणा की कि वे तीसरी खुराक अपनी ओर से देंगे, लेकिन अनेक राज्य, जैसे- महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि, में ऐसा नहीं हुआ| इन राज्यों में १८  साल से ऊपर के लोगों में तीसरी खुराक का कवरेज एक प्रतिशत के आसपास है, जबकि साठ साल से ऊपर के आयु वर्ग(जिन्हें मुफ्त में तीसरी खुराक दी जा रही है) में यह आंकड़ा लगभग २६  प्रतिशत है|

आज यह समस्या आ रही है कि जो लोग को-मॉर्बिडिटी यानी जिन्हें कुछ गंभीर बीमारियां हैं और जिनकी आयु साठ साल से अधिक है, उनमें संक्रमण हो रहा है| इसी आयु वर्ग में मौतें भी हो रही हैं, अभी जो वायरस अधिक सक्रिय है, वह बहुत कम घातक है| इससे संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं कराना पड़ रहा है और न ही उन्हें ऑक्सीजन या अन्य आपात सहायता की आवश्यकता हो रही है|जो मृत्यु दर एक हजार लोगों में१२ मौतों की थी, वह एक पर आ गयी| यही दर कमोबेश फ्लू संक्रमण में है तो, जब आप फ्लू से नहीं डरते, तो वैसा ही इस वायरस के साथ हुआ और लोग शांत बैठ गये|संक्रमित होने से या वैक्सीन लेने से प्रतिरोधक क्षमता आती है, संक्रमण और वैक्सीन के संयुक्त रूप से प्राप्त क्षमता सबसे कारगर मानी जाती है| अनुमान है कि ऐसी क्षमता के ९०  प्रतिशत लोग हमारे देश में हैं|

अभी बारह साल से कम आयु के बच्चों को  टीका नहीं दिया जा रहा है, जबकि हमारे पास टीका भी है और इस संबंध में अध्ययन भी हो चुके हैं| इसका कारण यह है कि बच्चों में संक्रमण नहीं आया है और कुछ बच्चों में वायरस आया भी, तो वह गंभीर रूप से बीमार नहीं बनाता है| इस संबंध में तीन  मुख्य बातें हैं- एक, बच्चों को संक्रमण से बचाना है, दूसरा, स्कूल चलते रखना है और तीसरा, बच्चे जब घर में वायरस लायेंगे, तो बुजुर्ग उसके शिकार बन सकते हैं,जिसकी सतर्कता जरूरी है | यह हमारे सामने बड़ी चुनौती भी है| इसमें टीकाकरण का दायरा बढ़ाकर कुछ कमी की जा सकती है| हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना संक्रमण उतनी बड़ी चुनौती नहीं रहा है, पर हमें बचाव को लेकर गंभीर बने रहना होगा|