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 ग्लोबल वार्मिंग : गर्मी में सर्दी का अहसास

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Mon , 19 May

सार

अगले 4 दिन मध्यप्रदेश में बारिश और आंधी का पूर्वानुमान है, प्रदेश के कुछ जिलों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने या चमकने की संभावना भी है..!

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विस्तार

आधा मई गुजरने को है, मध्यप्रदेश में इस बार गर्मी जैसी गर्मी नहीं पड़ी। अभी अधिकतम तापमान 40 डिग्री से नीचे है। आने वाले सप्ताह में भी यह  तापमान बहुत ज्यादा नहीं चढ़ेगा। 7 से 9 मई के बीच बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान ‘मोचा’ उठेगा। जिससे अगले 4 दिन मध्यप्रदेश में बारिश और आंधी का पूर्वानुमान है। प्रदेश के कुछ जिलों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने या चमकने की संभावना भी है। मौसम विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। 

इस माह की शुरुआत में जब पूरा देश लू की चपेट में होता है उस समय मौसम के ये रंग ग्लोबल वार्मिंग संकट की है। कहने को यह मौसम पश्चिमी विक्षोभ की देन है, लेकिन सवाल यह है कि समुद्र के मिजाज में यह परिवर्तन क्यों आ रहा है? बताया जा रहा है कि दस मई तक किसी भी इलाके में गरम लहरें नहीं महसूस होंगी। तमाम इलाकों में बारिश व ओलावृष्टि तथा पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हैरत में डाल रही है। 

कमोबेश देश के अधिकांश भागों में मौसम के मिजाज में यह तीव्र बदलाव महसूस किया गया है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में कल सुबह धुंध जैसी स्थिति नजर आई है। लोग भले ही इस मौसम को सुहावना बता रहे हों, लेकिन किसान अभी खेतों में खड़ी फसल को पूरी तरह काट नहीं पाये हैं। यदि अन्न बर्बाद होता है तो हमारी खाद्य शृंखला भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेगी। महंगाई की मार से हमें दो-चार होना पड़ेगा। यही वजह है कि किसान के माथे पर भी चिंता की लकीरें हैं। मई के महीने में जब फरवरी-मार्च के मौसम का अहसास होने लगे तो इसे खतरे की घंटी के तौर पर देखा जाना चाहिए। 

जब देश के विभिन्न भागों में भीषण गर्मी पड़ती है और तापमान पचास डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचता है। इस समय सूर्य पूरे ताप के साथ नजर आता है। हालांकि, अप्रैल में कुछ समय भरपूर गर्मी रही लेकिन बाद में माह के अंत और मई की शुरुआत में तापमान अचानक बदल गया। यह स्थिति सिर्फ उत्तर भारत में ही हो, ऐसा भी नहीं है। इसका प्रभाव दक्षिणी, पश्चिम, मध्य व पूर्वी भारत में भी नजर आ रहा है। यहां तक कि कई इलाकों में तापमान में दस डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई।

मौसम के मिजाज में आये इस अप्रत्याशित बदलाव को देखकर लोग हैरत में हैं कि क्या वाकई ये मई का महीना है? क्या गर्मी आएगी भी? दरअसल, जिस समुद्री व्यवहार में बदलाव को इस मौसम की वजह बताया जा रहा है, उसके निकट भविष्य में फिर दोहराये जाने की बात भी कही जा रही है। कमोबेश भारत ही नहीं, पूरे यूरोप भी में मौसम की ऐसी तल्खी नजर आ रही है। तमाम यूरोपीय देशों में तापमान के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। 

यह कटु सत्य है कि जब भारत में ठंड का अहसास हो रहा है तो पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। वहीं दक्षिण भारत में तेज बारिश से तापमान में गिरावट आई है। सभी राज्यों में मई में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है। पूर्वोत्तर भारत में ऐसी ही स्थिति है। भविष्य में कई राज्यों में तूफान व बारिश की भविष्यवाणी की जा रही है। कुछ लोग पाकिस्तान की तरफ से अरब सागर के जरिये उठने वाले वातावरणीय दबाव को बारिश व तूफान का कारण बता रहे हैं। जिसके चलते मौसम के रोज नये रिकॉर्ड बन रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान में जुटे हैं कि किस वजह से इस साल फरवरी के महीने में अप्रत्याशित गर्मी पड़ी थी। बताते हैं कि पिछली पूरी सदी में भी पृथ्वी फरवरी में कभी इतनी गर्म नहीं रही। 

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस साल अभी नौ बार पश्चिमी विक्षोभ का असर नजर आयेगा। जिसकी वजह से बार-बार मौसम में बदलाव महसूस होंगे। आखिर क्या वजह है कि जब भारत में तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है तो यूरोप, कनाडा व उत्तरी एशिया में तापमान में लगातार वृद्धि महसूस की जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव देखिये कि एक समय में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति है। कहीं गर्मी में सर्दी का अहसास हो रहा है तो कहीं ठंडे इलाकों में लगातार गर्मी बढ़ रही है। सबसे बड़ा डर इस बात का है कि भारत में ग्लेशियरों पर पिघलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। जिसका स्थायी प्रभाव भारतीय मौसम पर नजर आ सकता है।