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भ्रष्टाचार पर एक्शन की गारंटी, भारत के लिए वारंटी

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल से लोकसभा और राज्यों के चुनाव के लिए एजेंडा सेट कर दिया है. करप्शन पर एक्शन की गारंटी देकर मोदी ने भारत के लोकतंत्र की वारंटी दी है. नरेंद्र मोदी अमेरिका में व्हाइट हाउस में जब राष्ट्रपति जो बाइडेन के गले मिल रहे थे तब पटना में उनका विजय रथ रोकने के लिए विपक्षी दल गला काट प्रतिस्पर्धा छोड़कर एक साथ आने की जुगलबंदी कर रहे थे.

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विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी का विदेशी दौरे से लौटने के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ यह पहला कार्यक्रम था. इसमें इस साल और अगले साल होने वाले चुनाव के लिए पार्टी को दिशा देनी थी. पीएम मोदी ने भोपाल से जो संदेश दिया है उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले सभी चुनावों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद सबसे बड़ा मुद्दा होगा. भ्रष्टाचार पर नरेंद्र मोदी ने जो हुंकार भरी है आने वाले चुनाव में विपक्ष के लिए उसका मुकाबला करना कठिन होगा.

कर्नाटक की हार के बाद बीजेपी के सामने ध्रुवीकरण से चुनावी सफलता की गारंटी के लिए नए फार्मूले की जरूरत थी. विपक्षी एकता भी जिस तरह से आगे बढ़ रही थी उसके बीच भी चुनावी मुद्दों को धार देने की जरूरत बीजेपी में महसूस की जा रही थी.

भारत की राजनीति में भ्रष्टाचार राजनीतिक मुद्दा तो बनता आ रहा है लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन में कोई भी दल अभी तक गारंटीड सफलता हासिल नहीं कर सका है. नरेंद्र मोदी के केंद्रीय राजनीति में पदार्पण के पहले हालात ऐसे थे कि चुनावी जीत या हार लेकिन भ्रष्टाचार सदाबहार. राष्ट्रीय राजनीति के उस दौर में स्थापित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल घुमा फिरा कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखते रहे और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एक्शन की बजाय एक दूसरे की पीठ खुजलाते रहे.

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद करप्शन के खिलाफ एक्शन में कोई भी समझौता करते हुए नहीं दिखाई पड़े. यही कारण है कि अनेक विपक्षी नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए हैं. विपक्षी दलों की ओर से मोदी सरकार पर खुला आरोप लगाया जा रहा है कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को फंसाया जा रहा है. राजनीति में फंसाने और बचाने के आरोप-प्रत्यारोप आम बात है लेकिन भ्रष्टाचार की असलियत लोक धारणाओं में किसी से छुपी नहीं है.

प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार पर एक्शन की गारंटी देते हुए विपक्षी नेताओं के चेहरे देखकर भ्रष्टाचार की गारंटी का हिसाब बताया. उन्होंने यहां तक कहा कि विपक्षी एकता में जो चेहरे दिखाई पड़ रहे थे उन सब को मिलाकर बीस लाख करोड़ रुपए के घोटालों की गारंटी है. विपक्षी एकता का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम घोटाले की जांच से बचना और येन केन प्रकारेण सत्ता हासिल कर भ्रष्टाचार करते रहना है.

प्रधानमंत्री ने दलों का नाम लेकर भ्रष्टाचार के आरोप सिलसिलेवार गिनाए. यह बात जरूर है कि करप्शन के खिलाफ एक्शन की गारंटी पर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि इसे पूरा करने में कितना समय लगेगा? बीजेपी भी राष्ट्र और राज्यों में लंबे समय से सरकार चला रही है इसलिए अब तो गारंटी देने से नहीं बल्कि परफारमेंस से ही संतुष्टि का समय है.

मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना जैसे चुनावी राज्यों में चुनावी मुद्दा भ्रष्टाचार पर केंद्रित रह सकता है. मध्यप्रदेश में तो कमलनाथ और शिवराज सिंह के बीच भ्रष्टाचार पर आधारित पोस्टरवार चालू हो चुका है. दोनों दलों के लोग एक दूसरे को भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि भ्रष्टाचार के किन आरोपों को सही माना जाए और उसका आधार क्या है? जुबानीवार में तो एक दूसरे को भ्रष्ट साबित करने में कोई भी पीछे नहीं है.

मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने कमलनाथ सरकार के दौरान आयकर छापे के संबंध में रिपोर्ट में शामिल तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं. सेवानिवृत्त न्यायाधीश यह जांच कर रहे हैं. आयकर विभाग की जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच हो रही है. उसमें इस तरीके के विवरण शामिल बताए जा रहे हैं. जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनसे जुड़े लोगों और काला धन के प्रवाह में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं. जांच वास्तव में जिम्मेदार राजनीतिक लोगों की होना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विभागीय जांच का सामना करना पड़ रहा है. राजनीतिक रूप से भाजपा और कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर आरोप-प्रत्यारोप में जनता के लिए बड़ी कठिन परिस्थिति है कि वह तो किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार की परिस्थितियों का शिकार होने के लिए मजबूर है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने 'मेरा बूथ-सबसे मजबूत' कार्यक्रम में न केवल भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दे के रूप में खड़ा किया बल्कि समान नागरिक संहिता के बारे में भी संकेत दिए हैं. राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा के अगले सत्र में देश में समान नागरिक संहिता लागू हो सकती है. मुस्लिम और हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के कारण चुनाव पर बढ़ रहे असर को देखते हुए प्रधानमंत्री ने मुस्लिम मतदाताओं के प्रति भी सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया है. पसमांदा मुसलमानों के साथ अन्याय-अत्याचार और गरीबी को दूर करने का संकल्प व्यक्त किया गया है.

भारत का भविष्य भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाने में नहीं है भारत का भविष्य भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन को सरकार का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने में है. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को देख कर तो ऐसा लगता है कि पूरा राष्ट्र भ्रष्टाचार के अलावा किसी दूसरे उद्देश्य की तरफ आंखें ही नहीं उठा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर किसी भी तरह के आरोप पर चर्चा हो सकती है लेकिन उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाना टेढ़ी खीर है. विपक्षियों के लिए नरेंद्र मोदी का यही व्यक्तित्व सबसे बड़ी चुनौती सा है. भ्रष्टाचार को विपक्ष के खिलाफ बड़ा मुद्दा स्थापित कर नरेंद्र मोदी ने यही चुनौती विपक्षियों के सामने खड़ी कर दी है. प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार पर एक्शन की हुंकार के निहितार्थ यही निकाले जा रहे हैं कि चुनाव से पूर्व ऐसे मामलों में और सख़्ती दिखाई पड़ सकती है.