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हैदराबाद एनकाउंटर फेक था पर न्यायोचित था ! मुकदमा सिर्फ पुलिस वालों पर ही क्यों?

सुदेश गौड़ सुदेश गौड़
Updated Sat , 19 Jun

सार

27 नवंबर 2019 को दिल दहला देने वाली हैदराबाद की वो लोमहर्षक घटना शायद ही अब आपको याद होगी..!

janmat

विस्तार

27 नवंबर 2019 को दिल दहला देने वाली हैदराबाद की वो लोमहर्षक घटना शायद ही अब आपको याद होगी। जब 25 वर्षीया वेटनरी डाक्टर (पशु चिकित्सक) स्कूटी से जा रही थी और उसका स्कूटी खराब हो गयी थी। अकेली युवती को देख स्कूटी ठीक करने के बहाने कुछ दरिंदों ने उसका अपहरण कर उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया और फिर भी दिल नहीं भरा तो जला कर मार डाला था।

इस घटना के अगले दिन युवती का जला हुआ शव मिलने पर पूरे देश में आक्रोश व्याप्त था। दिसंबर 2012 में निर्भया कांड झेल चुके देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सड़क से संसद तक चिंता और कशमशाहट महसूस की जा सकती थी। दिशा दुष्कर्म कांड में दरिंदों की दरिंदगी देखकर पुलिस भी सिहर उठी थी, क्रोध से तमतमा उठी थी।

पुलिस ने सभी दरिंदों को गिरफ्तार किया और 6 दिसंबर 2019 को क्राइम सीन पर ही ले जाकर सबका कथित तौर पर एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के अनुसार दुष्कर्मियों ने पुलिस कर्मियों से हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया था, इस कारण उनका एनकाउंटर करना पड़ा। सबको पता था एनकाउंटर फर्जी था, पर लोगों ने उन पुलिस कर्मियों का जयकारा किया, उनके ऊपर फूल बरसाए, हर जगह उनका सत्कार किया गया।

कथित वाम प्रभावित मानवाधिकारवादियों द्वारा इस मामले को लेकर हो हल्ला मचाए जाने पर मामले की जांच का जिम्मा जस्टिस वीएस सिरपुरकर जांच आयोग को सौंपा गया। आयोग ने काफी छानबीन (?) और पूछताछ (?) के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में पुलिस एनकाउंटर को फर्जी बताया है (उप्र के बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे की गाड़ी पलटने के बाद एनकाउंटर की तरह ही कौन नहीं जानता था कि यह एनकाउंटर  भी फेक था)। जस्टिस वीएस सिरपुरकर जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस फर्जी मुठभेड़ के दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। मामले की जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट को भेजने का निर्देश देते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है।

इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई 2022 को अपना मत प्रकट किया था, इस मामले को एक सप्ताह से ज्यादा हो चुका है, दोषी पाए जाने पर सब पुलिस कर्मियों को जेल की सजा भी होगी ही और नौकरी के साथ करियर भी समाप्त हो जाएगा।  दिसंबर 2019 में उन पुलिस कर्मियों के लिए जयकारा लगाने वाली, उनपर फूल माला बरसाने वाली भीड़ में से अबतक एक भी आवाज उनके पक्ष में नहीं उठी है। उनकी कार्रवाई को जायज ठहराने वाले एक भी राजनेता ने बयान देने के लिए होठ भी नही खोले हैं।

6 दिसंबर 2019 को घटना का तत्काल बाद मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उस समय हालांकि सत्ता से बाहर थे, तब उन्होंने कहा था हैदराबाद में नरपिशाचों को उनके पाप की सजा मिली। पूरे देश को बड़ा सुकून मिला। दुष्टों के साथ यही व्यवहार होना चाहिए। जो जस कीन तो तस फल चाखौं।

वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्री लेकिन उस वक्त कांग्रेस नेता के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी लीइन से इतर ट्वीट किया था कि हैदराबाद में दरिंदों को अपने पाप की सजा मिली। समाज में ऐसे पापियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। मातृशक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है।

भाजपा के प्रवक्ता राजीव जेटली ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि हमें अपनी न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना होगा, जल्दी न्याय देना होगा और सख्त से सख्त सजा देनी होगी. ये जश्न का दिन नहीं है, इस तरह के अपराधी और ना हो इसकी हमें सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी।

मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ट्वीट कर के कहा था कि इस सदी के 19 वें साल में महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी देने वाली यह सबसे बड़ी घटना है।इस घटना को अंजाम देने वाले सभी पुलिस अधिकारी एवं पुलिसकर्मी अभिनंदन के पात्र हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली लोकसभा सांसद व तेलुगू अभिनेत्री नवनीत राणा ने उस वक्त कहा था कि हैदराबाद में जो हुआ, सही हुआ। मैं बहुत खुश हूं। पुलिस को अपराधियों और बलात्कारियों के दिलों में डर पैदा करना ही होगा।

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा था कि पुलिस ने जो किया, वह बहादुरी का काम है। इससे देश के सभी लोगों को सुकून मिला है। कानून की दृष्टि से इसकी जैसी भी व्याख्या हो, लेकिन धर्म और संस्कृति को बदनाम करने वाले ऐसे अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ ऑन द स्पॉट कार्रवाई होनी चाहिए।

संजय निरुपम ने हैदराबाद में हुए एनकाउंटर को करने वाले पुलिसकर्मियों को बधाई दी थी और कहा था कि यह एक तरह से गैरकानूनी लग रहा होगा लेकिन महिलाओं के मन में एकबारगी सुरक्षा की भावना जरूर पैदा हुई होगी। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा था जो हुआ अच्छा हुआ। इससे पीड़िता को इंसाफ मिला है। निर्भया रेप कांड में 7 साल के बाद भी आरोपियों को अभी तक सजा नहीं मिल पाई है।

राजद नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा था कि हैदराबाद में जो हुआ उससे अपराधी निश्चित रूप से डरेंगे। हम इसका स्वागत करते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते हुए कहा था कि हाल ही में सामने आए रेप केसेज चाहे वह उन्नाव हो या हैदराबाद उससे लोग गुस्से में हैं, इसलिए एनकाउंटर पर खुशी जता रहे हैं।

दुष्कर्म के आरोपियों को सरेआम गोली मारने की वकालत करने वाली समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने कहा था कि देर आए, दुरुस्त आए। छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एनकाउंटर का पक्ष लेते हुए कहा था जब अपराधी भागने की कोशिश करता है तो पास के पास कोई और विकल्प नहीं बचता है। यह कहा जा सकता है कि न्याय हुआ है।

शिवसेना नेता और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने एनकाउंटर करने वाले पुलिस वालों का समर्थन करते हुए कहा था कि पुलिस पर अगर कोई अटैक करेगा तो उन्हें अपनी सुरक्षा में कदम उठाना ही होगा। उन्होंने अपनी ड्यूटी की है।
 शिवसेना प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी ट्वीट करके कहा था कि एक महिला के रूप में मुझे लगता है कि इस एनकाउंटर से ऐसे अपराध करने वालों के मन में डर बैठेगा।

राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने अपनी संतुलित टिप्पणी में कहा था कि एक नागरिक के रूप में मुझे खुशी है कि उनका वही हश्र हुआ जो हम सब चाहते थे। इस पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो उन पुलिस कर्मियों ने किसी निजी खुन्नस या फायदे के लिए एनकाउंटर नहीं ‌किया था। उन दरिंदों की दरिंदगी को देखते हुए न्याय किया था। न्याय का तरीका गलत हो सकता है पर उनकी नीयत में किसी भी तरह का खोट नहीं निकाला जा सकता है। न्यायिक प्रक्रिया में इंटेन्शन और मोटिव को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।

उन पुलिस कर्मियों पर फूल बरसाने वाली व राखियां बांधने को उमड़ी महिलाओं में से आज एक भी मुखर नहीं है। पूरा देश अबतक चुप है। उन पुलिसकर्मियों को कहीं से भी किसी भी तरह का समर्थन नही मिल रहा। उनका अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होंने अपनी एक बहन के दर्द, तकलीफ, कष्ट, जलालत को खुद महसूस किया था जबकि माननीय जस्टिस वीएस सिरपुरकर ने एनकाउंटर में मारे गए चारों दरिंदों के दर्द, तकलीफ और कष्ट को बखूबी महसूस किया होगा। देश का कानून सर्वोपरि है और होना भी चाहिए पर बड़ा सवाल यह है कि क्या मानवीयता से भी ऊपर होना चाहिए?

वैसे बात पहुत पुरानी नहीं है। अप्रैल 1993 में इंडियन एयरलाइंस की श्रीनगर- दिल्ली उड़ान संख्या 427 को हाईजैक कर के विदेश ले जाने की साजिश रची गई थी पर मजबूरन अमृतसर हवाईअड्डे पर लैंडिंग करनी पड़ी थी और वहीं पर कमांडो कार्रवाई कर के एनएसजी टीम ने एकमात्र आतंकी मोहम्मद यूसुफ को मार गिराया था और सभी यात्रियों को सकुशल सुरक्षित बचा लिया गया था। ]

जब इस मामले पर संसद में चर्चा हुई तो वामपंथी सांसदों ने मारे गए आतंकी को मारे जाने पर आपत्ति जताई कि उसको भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। एनएसजी कमांडो ने उसे मार कर उसके मानवाधिकार का हनन किया था। उन विद्वान सांसद महोदय को विमान में सवार 140 लोगों को मानवाधिकारों की जरा भी चिंता नहीं थी। उन्हें तो निहित स्वार्थ के चलते सिर्फ मारे गए आतंकी के मानवाधिकारों की चिंता थी। लगभग 30 साल बाद भी हालात व सोच में कोई बदलाव नहीं दिखता है। अब भी एक बलत्कृत महिला को मानवाधिकारों पर चार दरिंदों के मानवाधिकारों को ज्यादा तरजीह मिल रही है। 

क्या उस प्रतिभाशाली वेटनरी डाक्टर को इस देश में सम्मान के साथ जीवित रहने का अधिकार नहीं था? क्या महिला होने के कारण उसे इस देश में सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार नहीं था? उन चार दरिंदों ने जिस अमानुषिक तरीके से न केवल से साथ दुष्कर्म किया बल्कि उस भारतीय प्रतिभा को तड़पा तड़पा कर वीभत्स तरीके से जला कर मार डाला था, क्या वे सभी इसी तरह की मौत के हकदार नहीं थे।

जांच तो इस बात की भी होनी चाहिए कि आम जनता में इतना आक्रोश क्यों था कि वह इस तरह के तत्काल न्याय पर अपनी खुशी को जरा भी नहीं रोक पाई और सड़क पर जमकर प्रकट भी की। जन आक्रोश का एक कारण हमारी न्याय व्यवस्था में होने वाली देरी भी है। इस देरी के लिए सबके अपने अपने तर्क हो सकते हैं पर पीड़ित को समय पर न्याय न मिले तो दोर से मिले न्याय का कोई महत्व नहीं रह जाता है। माननीय न्यायालय को इस बारे में भी गहनता से विचार करना चाहिए था।

इस लोकतांत्रिक देश में क्या जनभावना का कोई महत्व नहीं माना जा सकता है। यह लोकतंत्र की ही ताकत है जहां जनभावना के आधार पर जनता जनार्दन की एक बार त्योरियां चढ़ने पर सरकारें तक बदल जाती हैं। हैदराबाद पुलिस ने उस वक्त जो भी कार्रवाई की थी, वह पूरी तरह जनभावनाओं के मद्देनजर की थी। इस देश में यही सबसे बड़ी त्रासदी है कि दुष्कर्म के बाद जलाकर मार डाली गई वेटनरी डाक्टर की किसी को चिंता नहीं है, चिंता है तो एनकाउंटर में मारे गए चारों दरिंदों की। मेरा मानना है कि ऐसे नरपिशाचों को तो एक क्षण भी जीवित रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

अच्छा हुआ कि मर्यादा पुर्षोत्तम राम के समय में वामपंथी और मानवाधिकारवादी इतने सक्रिय नहीं थे वरना ये लोग तो भगवान राम के खिलाफ भी एससीएसटी एक्ट और मानवाधिकार हनन के असंख्य मामले दर्ज करा चुके होते।
दूसरों को क्या कहें, जब हम यानी इस देश की जनता पेट्रोल डीजल के दामों में ही उलझी रहेगी तो बड़े मामले उसे कभी दिखेंगे ही नहीं।

इस देश के ज्यादातर लोगों की फितरत यही है कि हर कोई चाहता है कि भगत सिंह को एक बार फिर इस भारत भूमि में जन्म लेना चाहिए पर हमारे घर में नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी के घर में ताकि हमें अपना बेटा भी न खोना पड़े और  होने वाले मलाईदार लाभ का मजा पूरा मिले। शायद समाज की इसी प्रवृत्ति की वजह से अच्छे लोग ‌हतोत्साहित होकर बैठ जाते हैं।... जो चल रहा, जैसे चल रहा, चलने देते हैं।

मै एनकाउंटर और पुलिस दोनो का समर्थन करता हूँ। मेडिकल साइंस के जानकार जानते हैं कि अगर शरीर के किसी अंग में कैंसर होता है तो उस अंग को तुरंत काट कर निकाल दिया जाता है। अगर काट कर हटाया नहीं गया तो कैंसर निरंतर बढ़ता ही जाएगा और हमारी जान भी नहीं बचेगी। बलात्कारी भी समाज के लिए ऐसा ही कैंसर है और बलात्कारियों को तुरन्त गोली मारी जानी चाहिए। समाज में सीधा संदेश जाना चाहिए कि समाज में बलात्कार के लिए कोई जगह नहीं है।

सीमा पर भी घुसपैठियों को देखते ही गोली मार दी जाती है। ये बलात्कारी दरिंदे भी हमारे समाज में घुसपैठिये ही हैं, इनके साथ भी वैसा भी सुलूक किया जाना चाहिए। हैदराबाद पुलिस ने उन चारों दरिंदों के साथ बिलकुल उचित व्यवहार किया, जनभावनाओं के अनुरूप सही कदम उठाने के लिए वे प्रशंसा के पात्र है। उनको सम्मानित किया जाना चाहिए न कि उनको सस्पेंड करके कोर्ट में दौड़ा दौड़ा कर मानसिक यातना दी जाए।

माननीय न्यायालय को सजा देनी ही है तो उन पुलिस वालों के साथ उनकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले हर राजनेता को भी आरोपी बनाना चाहिए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, योग गुरू रामदेव आदि को भी आरोपी बनाना चाहिए। उनपर फूल बरसाने वालों को भी आरोपी बनाना चाहिए। पुलिस वालों का कलाइयों पर राखी बांधने वाली हर बहन को भी आरोपी बनाना चाहिए।

कुल मिलाकर, माननीय न्यायालस को इस मामले में देश के हर उस व्यक्ति को आरोपी बनाना होगा जिसने भी उस दिन हुए एनकाउंटर पर खुशी जाहिर की थी। बता दूं कि मैंने भी उस दिन सोशल मीडिया पर हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी जाहिर की थी।

वेटनरी डॉक्टर के साथ 2019 में हुआ था दुष्कर्म-

हैदराबाद में नवंबर 2019 में 25 साल की एक वेटनरी डॉक्टर के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। डॉक्टर का शव शादनगर में एक पुल के नीचे जली हुई अवस्था में मिला था। इसके बाद हैदराबाद पुलिस ने चार आरोपियों - मोहम्मद आरिफ, चिंताकुंटा चेन्नाकेशवुलु, जोलू शिवा और जोलू नवीन को वेटनरी डॉक्टर के साथ सामूहिक दुष्कर्म के और हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।

हैदराबाद के राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर इन चारों आरोपियों एनकाउंटर किया गया था। यह वही राजमार्ग था, जिसके पुल के नीचे 25 वर्षीया पशु चिकित्सक का जला हुआ शव मिला था। पुलिस ने दावा किया था कि 27 नवंबर, 2019 को महिला पशु चिकित्सक का अपहरण किया गया था। उसका यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी।

 जानिए दिशा रेप कांड का पूरा घटनाक्रम-

•    27 नवंबर 2019: सरकारी अस्पताल में कार्यरत महिला पशु चिकित्सक के साथ चार आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। शराब पीते हुए आरोपियों ने डॉक्टर को अपनी खराब हुई स्कूटी पार्क करते हुए देखा और दरिंगदी का प्लान बनाकर वारदात को अंजाम दिया। 
•    28 नवंबर 2019:  25 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक का अधजला शव शादनगर में एक पुल के नीचे मिला। शव मिलने के बाद इस जघन्य केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
•    29 नवंबर 2019: तेलंगाना पुलिस ने इस मामले की छानबीन के दौरान 20 से 24 साल के उम्र के चार लोगों को दुष्कर्म और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।
•    29 नवंबर 2019: कोर्ट ने  आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने कहा कि इस घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया। पीड़िता की मां ने सभी दोषियों को सबके सामने जिंदा जलाने की मांग की। 
•    29 नवंबर: शादनगर बार असोसिएशन ने ऐलान किया कि डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों को किसी भी तरह की कानूनी मदद नहीं दी जाएगी। हैदराबाद के वकीलों ने भी समर्थन दिया।
•    30 नवबंर 2019: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने तेजी से मुकदमा चलाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालत के गठन की घोषणा की। राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्यों ने पीड़ित परिवारवालों से मुलाकात की।
•    एक दिसंबर 2019: तेलंगाना पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एम महेंद्र रेड्डी ने इस मामले में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया।
•    दो दिसंबर 2019: तेलंगाना के हैदराबाद में डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या का मामले की गूंज संसद में भी सुनाई दी।
•    तीन दिसंबर 2019: दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कड़े कानून की मांग को लेकर दिल्ली में अनशन शुरू किया।
•    तीन दिसंबर 2019: चेरलापल्ली जेल में बंद चार आरोपियों में से एक चेन्नाकेशावुलू ने किडनी की बीमारी का इलाज मुहैया कराने की मांग की है।
•    चार दिसंबर 2019: हैदराबाद में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले की सुनवाई के लिए महबूबनगर जिला अदालत में जल्द एक विशेष कोर्ट के गठन का ऐलान।
•    छह दिसंबर 2019: केस के चारों आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस ने बताया कि क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट करने के दौरान आरोपियों ने पुलिस से हथियार छीनकर उन पर फायर किया। जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में चारों आरोपी ढेर हो गए।