मध्यप्रदेश में पहली बार ट्राइबल जिले में ट्राइबल संस्कृति के बीच डेस्टिनेशन कृषि कैबिनेट आयोजित की है. इसमें कई फैसले हुए. सरकार ने इसे लोक संस्कृति का सम्मान और विकास का अभिनव अभियान बताया..!!
नागलवाड़ी आदिवासी संस्कृति का प्रमुख केंद्र है. यहां का भगोरिया काफी लोकप्रिय है. राष्ट्रीय पर्व के रूप में सरकार इसे मना रही है. अब जबकि पूरा विश्व इंटरनेट पर ग्लोबल विलेज सा है. हर व्यक्ति, संस्था, सरकार और संस्कृति इंटरनेट पर अपना डेस्टिनेशन तलाश रही है, वहीं एमपी सरकार इस फॉर्मेट के इतर लोगों के बीच पहुंच विकास संस्कृति और पर्यटन के विस्तार की संभावनाओं पर काम कर रही है.
डिजिटल इंडिया आज पूरे विश्व में अपनी धाक स्थापित कर रहा है. ग्रामीण अंचलों में भी यूपीआई की पहुंच है. सरकार के सारे बेनिफिट डीबीटी के माध्यम से हो रहे हैं. किसानों की सम्मान निधि सिंगल क्लिक से खातों में पहुंच जाती है. मध्यप्रदेश भी इसमें पीछे नहीं है. लाडली बहना सहित सभी प्रमुख योजनाओं की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होती है. डिजिटल गवर्नेंस ने दुनिया के शासकीय संस्थाओं की कार्य प्रणाली को बदल दिया है.
लोकसेवक के नाते कैबिनेट के सदस्य हर दिन जनता के बीच जाते ही हैं. कैबिनेट की एक पवित्रता है. सरकार मंत्रालय से चलती है. मंत्रालय कैबिनेट की पवित्र पीठ है. इसका ही महत्व है, वैसे तो कैबिनेट कहीं भी हो सकती है. इस पर कोई संवैधानिक सवाल नहीं है. आम धारणा में जो भी तीर्थ हैं उनके स्थान का महत्व है. उनकी प्रतिकृति तो बनाई जा सकती हैं लेकिन उन्हें दूसरे स्थान पर नहीं ले जाया सकता है.
कृषि कैबिनेट की अवधारणा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी. इस तरह के जो भी प्रयोग होते हैं वे नयापन लाकर पब्लिसिटी से ज्यादा महत्व नहीं रखते हैं. कैबिनेट को इवेंट के रूप में नहीं देखा जा सकता है. यह एक संवैधानिक व्यवस्था है. इस पर राज्य की आस्था है. इसकी पवित्रता हर सरकार का प्राथमिक दायित्व है.
अगर इस विचार को मान लिया जाए कि डेस्टिनेशन कैबिनेट करने से उस स्थान का महत्व प्रतिपादित होता है या स्थानीय संस्कृति को प्रचार-प्रसार मिलता है तो फिर भोपाल में कैबिनेट बैठक इन अवसरों को खोने जैसा है. जब इससे ही डेस्टिनेशन और डेवलपमेंट को लोक संस्कृति से जोड़ने में सफलता मिल सकती है तो फिर हर कैबिनेट किसी न किसी डेस्टिनेशन पर ही होना चाहिए. कोई भी कैबिनेट भोपाल में क्यों हो? अगर कैबिनेट से ही विकास,पर्यटन और संस्कृति को विस्तार मिले तो फिर इस दुर्लभ अवसर को किसी भी स्थिति में एक बार भी क्यों गंवाना चाहिए?
मूल चिंतन लोकसेवा की प्रतिबद्धता का है. पीएम नरेंद्र मोदी ने तो पीएमओ का नाम बदलकर सेवा तीर्थ कर दिया है. राज्यों के राजभवन का नाम भी लोकभवन, जनसेवा की सोच पर ही किया गया है. राजपथ को अगर कर्तव्य पथ बनाया गया है तो वह जनसेवा के कर्तव्य की ही सोच है.
विचार और भाव निजी शक्ति और आस्था है. सेवा का कर्तव्य भी यही से ऊर्जा पाता है. यह सोचना अपने आप में सही नहीं है कि डेस्टिनेशन पर जाकर ही विकास और संस्कृति के विस्तार के लिए बेहतर किया जा सकता है. बेहतर करने की सोच और कमिटमेंट किसी भी कोने से अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है. फेसबुक, व्हाट्सएप, YOU TUBE सहित अधिकांश सोशल प्लेटफार्म के मुख्यालय अमेरिका में हैं. टेक्नोलॉजी का केंद्र कहीं भी हो उसका प्रभाव पूरी दुनिया में देखा जा सकता है.
धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती भीड़ यही बताती है कि अगर सरकारों द्वारा सुविधाओं का विकास कर दिया जाता है तो फिर पर्यटन के विकास के लिए अन्य प्रयास की आवश्यकता नहीं होती. अयोध्या में राम मंदिर, उज्जैन में महाकाल लोक और काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि यही बताती है कि सरकार और उसके लोकसेवकों को केवल ईमानदारी से सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है. डेस्टिनेशन पर तो पर्यटकों की संख्या अपने आप ही बढ़ जाएगी. इसके लिए डेस्टिनेशन कैबिनेट से ज्यादा सुविधाओं का विकास जरूरी है.
जब भी ऐसी डेस्टिनेशन कैबिनेट होती है तो अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन दिए जाते हैं. लाखों रुपए खर्च होते हैं. जो कैबिनेट राज्य का भाग्य तय करती है उसकी संवैधानिक मर्यादा और पवित्रता को इवेंट के रूप में उपयोग की प्रवृत्ति उचित नहीं कहीं जा सकती है. किसी पर्व त्यौहार या भगोरिया जैसे सांस्कृतिक आयोजन में पूरी कैबिनेट शामिल हो सकती है. इसके लिए कैबिनेट मीटिंग की जरूरत नहीं होती. कैबिनेट तो मंत्रालय में अपनी पीठ पर ही शोभायमान होती है.
डेस्टिनेशन कैबिनेट का लक्ष्य अगर पब्लिसिटी के लिए है तो फिर इसे जनहित की कसौटी पर कैसे कसा जा सकता है? राज्य सरकार का पूरा गवर्नेंस ऑनलाइन ही केंद्रित हो रहा है. जनशिकायतों के निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन है. पहले तो CM आम लोगों से मिल कर समस्याएं सुनते थे. अब तो सब कुछ ऑनलाइन ही सुना और निराकृत किया जाता है.
नागलवाड़ी में हुई कृषि कैबिनेट में CS ऑनलाइन ही जुड़े हैं. कैबिनेट की प्रोसीडिंग का डॉक्यूमेंटेशन मुख्य सचिव की ही जिम्मेदारी है. जब यह जिम्मेदारी ऑनलाइन पूरी की जा सकती है तो फिर डेस्टिनेशन कैबिनेट का तर्क अपने आप कमजोर पड़ जाता है.
लोगों के बीच सरकार का जाना अच्छी बात है. जनहित के निर्णय में पब्लिसिटी अंतरनिहित है. जो निर्णय लेता है, जो विकास का नेतृत्व करता है, उसे समझने में जनता देर नहीं लगाती. सरकार की इमेज केवल डेस्टिनेशन कैबिनेट से नहीं बल्कि सरकार के डाइमेंशन से बनती है.
राज्य और लोगों की डेस्टिनी को बेहतर और उज्जवल बनाने के हर प्रयास को न केवल स्वीकारा जाता है, बल्कि उसका प्रतिफल भी मिलता है. ऑनलाइन मार्केट ऑनडोर हो गया है. बिना ऑनलाइन अब कोई भी डेस्टिनेशन आकाश छूने की कल्पना नहीं कर सकता.