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भारत में अच्छे विश्वविध्यालय होते तो ?

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 22 Jul

सार

निस्संदेह, छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा पाने की संभावनाओं का पूरी तरह से अवलोकन करना चाहिए, वे सर्वोत्तम नौकरियों के लिये खुद को तैयार करने के तमाम उपायों पर विचार भी करें..!

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विस्तार

आस्ट्रेलिया के पांच विश्वविद्यालयों ने भारत के पाँच राज्यों पंजाब, हरियाणा, गुजरात, यूपी व बिहार के आवेदकों को वीजा नियमों में हेरफेर करने का आरोप लगाकर प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है।वजह  पढ़ाई के बजाय वहां बसने के मकसद  है। निश्चित रूप से यह कार्रवाई भारत और देश इन राज्यों की प्रतिष्ठा पर आंच आने जैसी है क्योंकि भविष्य में इन राज्यों के योग्य छात्र-छात्राओं को भी इस सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।

 इन राज्यों को संदिग्ध सूची में डालने के बाद यहां के छात्रों के अध्ययन वीजा के आवेदनों को अधिक सावधानी से जांचना शुरू कर दिया गया है। दरअसल, वहां किसी भी शिक्षण संस्थान में यदि अधिक गैर-वास्तविक छात्र पाये जाते हैं तो आस्ट्रेलिया सरकार द्वारा जोखिम रेटिंग में परिवर्तन कर दिया जाता है। निस्संदेह, छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा पाने की संभावनाओं का पूरी तरह से अवलोकन करना चाहिए। वे सर्वोत्तम नौकरियों के लिये खुद को तैयार करने के तमाम उपायों पर विचार भी करें। यदि कोई विश्वविद्यालय इस दृष्टि से कसौटी पर खरा उतरता है तभी फीस का भुगतान करना चाहिए। वीजा हासिल करते वक्त भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे विश्वविद्यालय सभी नियमों का पालन करते भी हैं या नहीं। 

युवाओं को जागरूक होना होगा कि वे फर्जी एजेंटों के चंगुल में न फंसें। इन्हें विदेशों में अवैध प्रवासियों की दुर्दशा की जानकर  इस बारे में सजग होना चाहिए। साथ ही यह भी जानना चाहिए कि विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के लिए आवेदन हेतु फॉर्म भरते समय छात्र अतिरिक्त सावधानी बरतें। कुछ प्रतिष्ठित संस्थान भी है, जो पूरी निष्ठा से भारतीय छात्रों का मार्गदर्शन भी करते हैं।

इसके साथ विदेशों में पढ़ने की चाह रखने वाले छात्रों को अपने लक्षित विश्वविद्यालय और उस देश के नियम-कानूनों की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। उन्हें इन संस्थानों की वेबसाइटों की भी जांच करनी चाहिए। उनकी शर्तों व नियमों को पूरी तरह पढ़ना चाहिए। विगत में देखा गया है कि उन्हें पर्याप्त नियम-कानूनों की जानकारी न होने के कारण उन देशों के सख्त कानूनों का भी शिकार होना पड़ सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि उन देशों में पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के बाद हासिल डिग्री व डिप्लोमा की अपने देश भारत में कितनी स्वीकार्यता होती है।

उन्हें यह भी जानना चाहिए कि  जब वे देश लौटें तो क्या उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। दरअसल, रोजगार का परिदृश्य उतना लुभावना नहीं होता है जितना कि छात्र कल्पना करते हैं। समस्या यह भी है कि विदेशों में पढ़ाई के लिये वीजा हासिल करना तथा उसकी अवधि समाप्त होने के बाद उन देशों में जमे रहना नियमों का उल्लंघन भी होता है। इतना ही नहीं, इन नियमों के उल्लंघन से , बेहतर भविष्य के लिये पढ़ाई की चाह रखने वाले वास्तविक छात्रों के लिये मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। निस्संदेह, नियम-कानूनों के उल्लंघन से विदेशों में भारत की छवि भी खराब हो सकती है। 

बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिये मां-बाप भी अपने तमाम आर्थिक संसाधन दांव पर लगा देते हैं। बाद में उन्हें पता लगता है कि उनके साथ ठगी हो गई है। दरअसल, अध्ययन वीजा के जरिये विदेश में बसने की सनक ने कुछ  नक़ली आव्रजन एजेंटों की फौज खड़ी कर दी है। जो युवाओं को भ्रामक पाठ्यक्रमों तथा यहां तक कि नकली विश्वविद्यालयों में प्रवेश दिलाकर धोखा तक दे रहे हैं। हाल में कुछ ऐसी ही दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं कनाडा और अमेरिका में सामने आई हैं जहां घोटाले के उजागर होने के बाद सैकड़ों छात्रों को निर्वासन का सामना करना पड़ा है। इससे निबटने का बेहतर तरीक़ा भारत में अच्छे विश्वविद्यालयों की स्थापना हो, जो फ़िलहाल  नहीं हैं।