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जरूरी है, मंत्रीस्तर का भ्रष्टाचार रोकना-राकेश दुबे 

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Mon , 14 Apr

सार

भ्रष्टाचार में संलिप्तता को लेकर पंजाब में हुई कार्रवाई से देश के उन राज्यों में हलचल है, जहाँ बरसों से एक पार्टी की सरकारें काबिज है..!

janmat

विस्तार

मंत्रीमंडल के सदस्यों की भ्रष्टाचार में संलिप्तता को लेकर पंजाब में हुई कार्रवाई से देश के उन राज्यों में हलचल है, जहाँ बरसों से एक पार्टी की सरकारें काबिज है| आम आदमी पार्टी की सरकार के, मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को बर्खास्त करना एक मिसाल कहा जा रहा है।

हालांकि, अभी मामले में लगे आरोपों के विवरण की अंतिम जांच की जानी बाकी है लेकिन मंत्री की बर्खास्तगी और तत्काल गिरफ्तारी एक सख्त संदेश जरूर देती है कि पार्टी नेतृत्व कैबिनेट में भी भ्रष्टाचार के साथ नहीं खड़ा है। साथ ही इससे पंजाब के स्वास्थ्य विभागके साथ अन्य विभागों में साफ-सुथरी कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। निस्संदेह, एक प्रगतिशील लोकतंत्र में मजबूत व पारदर्शी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अनिवार्य माना जाता है जो कि जनता व सरकार के बीच भरोसे को बढ़ाती है।

देश के हर राज्य में पहले से ही चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था व रोगियों के बढ़ते दबाव के चलते पर्याप्त संसाधन जुटाने और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर करने की जरूरत है। ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि देश के ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, विशेषकर सर्जनों, प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञों की। कमोबेश ऐसी ही स्थिति बालरोग विशेषज्ञों की भी है। अनुमान है कि देश के पांच हजार से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग बाईस हजार विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। वहीं स्वीकृत पदों को भी नहीं भरा जा रहा है।

इसमें भ्रष्टाचार भी एक कारक है। लेकिन एक बात तो तय है कि जरूरत व उपलब्धता के बीच एक बड़ी खाई है, जिसकी कीमत पहले ही रोगों से हलकान लोगों को चुकानी पड़ती है। एक विसंगति यह भी है कि राज्यों में डॉक्टरों के खाली हैं मगर इसके बावजूद विशेषज्ञों वरिष्ठ डॉक्टरों को प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है जो कि नौकरशाहों व राजनेताओं से सीधे  जुड़े हैं। ये स्वास्थ्य मंत्रालयों में वातानुकूलित भवनों में विराजते  हैं। मरीज निजी अस्पतालों के रहमोकरम पर रहने और अच्छे इलाज के लिये शहरों की ओर जाने को मजबूर हैं।

पंजाब में स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी व गिरफ्तारी के गहरे निहितार्थ हैं जो बताता है कि साफ-सुथरा शासन देने का दावा करने वाली पार्टी भी भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है। हालांकि, तत्काल हुई कार्रवाई कई सवालों को भी जन्म देती है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं आनन-फानन में हुई कार्रवाई इस साल के अंत में हिमाचल व गुजरात में होने वाले चुनावों के मद्देनजर एक प्रतीकात्मक संदेश देने की भी कोशिश है।

लेकिन यह ‘आप’ के लिये आत्ममंथन का विषय है कि राजनीतिक शुचिता की दुहाई देने वाली पार्टी में भी ऐसे नेता सत्ता की चौखट तक कैसे पहुंचे हैं जो खुलेआम भ्रष्टाचार के खेल में लिप्त हैं। लेकिन यह अच्छी बात है कि लीक को तोड़ते हुए मान सरकार ने मामले में कानूनी जटिलताओं को दरकिनार करके तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की है।

वैसे कानूनी प्रक्रिया की चाल से आरोपियों को राहत ही मिलती है और वे येन-केन-प्रकारेण कानूनी प्रक्रिया के छिद्रों से बचाव के रास्ते निकाल लेते हैं। सारी सरकार को  जनता में यह संदेश देने का प्रयास करना चाहिये की सरकार भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस दिखाएगी।

यह भी है कि भ्रष्टाचार का मामला संज्ञान में आने के बाद मंत्री से लेकर संतरी तक को बख्शा नहीं जायेगा। निस्संदेह आज दैनिक जीवन में हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार से आम आदमी बुरी तरह त्रस्त है। ऐसे में भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस दिखाकर बिना पक्षपात के सख्त कार्रवाई से ही जनता को राहत पहुंचायी जा सकती है।

अन्य  राज्यों में भी जनता को जनप्रतिनिधियों की कारगुजारियों पर भी नजर रखने की जरूरत है। विधानसभा में चुनकर आये दागी जनप्रतिनिधियों की कारगुजारियों की भी निगहबानी हो इसकी पुख्ता व्यवस्था जरूरी है ।