पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यकाल के 12 साल पूरे हो गए हैं. विकसित भारत की ओर मजबूत कदम बढ़ाते देश के सामने उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है. तो गूंजते बहुत सारे सवाल हैं. जो हासिल हो गया वह तो भुला दिया जाता है, लेकिन जो दर्द है वह हमेशा याद आता रहता है..!!
भारत में सरकारों के कामकाज से निराशा के कारण लगभग तीन दशक तक खंडित जनादेश मिलता रहा. मोदी के रूप में लंबे अरसे बाद स्पष्ट बहुमत का जनादेश देश ने दिया. जिस उम्मीद से मोदी को जिताया, निश्चित वह पूरी हुई है. आशाएं कभी खत्म नहीं होतीं. जो टॉपर होता है उसी से अपेक्षा भी होती है.
मोदी का उदय देश की राजनीति में कांग्रेस की विचारधारा के सूर्यास्त और बीजेपी की विचारधारा के सूर्योदय के रूप में भी देखा जा सकता है.
कोई कम्प्लीट नहीं होता. डेमोक्रेसी बहुमत का सिस्टम है. बहुमत की इच्छा सरकारों का संविधान होता है. आजादी के बाद कांग्रेस की विचारधारा शासन का सिस्टम बनी थी. मोदी के आने के बाद इसमें बदलाव दिखाई पड़ा. भाजपा अपने गठन से ही कुछ मुद्दों पर वचनबद्ध रही है. इसमें कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रमुख रहा है. इन तीनों पर मोदी सरकार पूरी तरह से सफल कही जा सकती है. अयोध्या में भव्य राम मंदिर हिंदुओं की आस्था को संतुष्ट कर रहा है. कश्मीर में अब धारा 370 इतिहास बन चुकी है. यूनिफॉर्म सिविल कोड कई राज्यों में लागू है. राष्ट्रीय स्तर पर इसे लागू करने की तरफ देश बढ़ रहा है.
भारत में विकास की अपनी समस्या है, लेकिन यहां जातिवाद और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण उससे भी बड़ी समस्या है. राष्ट्र की सुरक्षा पहले दिन से ही चुनौतीपूर्ण रही है. देश के विभाजन के बाद सीमाओं की सुरक्षा उस मजबूती से नहीं हुई जिस पर होना था. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत के लिए नासूर बन गया.
मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को ऐसा संदेश दिया है कि नया भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा. अब भारत घुसकर मारने की क्षमता रखता है. देश की रक्षा तैयारी और डिफेंस इक्विपमेंट में वैज्ञानिक प्रगति पूरी दुनिया को चौंका रही है. भारत की आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर में जो कमाल दिखाया है, वह देश की नई नीति और रणनीति का ही प्रतिफल है.
देश के सामने जो प्रमुख समस्याएं हैं, उनमें घुसपैठ भी एक बड़ा मामला है. धर्मांतरण भी बड़ी चुनौती है. अंग्रेजों के समय से बने कानूनों और प्रोसीजर को बदलना बड़ा काम है. मोदी सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है. आईपीसी और सीआरपीसी का भारतीय स्वरूप बनाकर लागू कर दिया गया है.
मोदी ने सीएए कानून बनाया. हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त हुआ. एनआरसी भी लागू होकर रहेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी मोदी सरकार का कामकाज न केवल संतोषजनक दिखता है, बल्कि चमकते एक्सप्रेस-वे देश की गति को बढ़ा रहे हैं. अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी प्रगति देखी जा सकती है. महंगाई, बेरोजगारी ऐसा विषय है जो कभी खत्म नहीं होगा. जितना भी विकास होता है, वह बढ़ती जनसंख्या के दबाव में कम ही साबित होता है. जनसंख्या नियंत्रण पर अब मोदी सरकार को मजबूत कदम उठाने का वक्त आ गया है.
एक और उपलब्धि देखी जा सकती है, जहां पीएमओ का नाम सेवातीर्थ किया गया है. राज्यों के राजभवन को अब लोकभवन के रूप में पहचाना जा रहा है. अंग्रेजों की स्मृतियों को बदला गया है. राजपथ, कर्तव्य पथ बन गया है. इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित हुई है. मोदी का ही क्रेडिट है कि भारत की स्वदेशी संसद बनकर तैयार हुई है.
मोदी को बदलाव के लिए याद किया जाएगा. कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें उन्हें बदलाव नहीं करना पड़ा हो. महिलाओं को आरक्षण देने की बात सभी दल करते हैं लेकिन वह काम भी मोदी के हाथों ही पूरा हो सका है. महिला आरक्षण कानून लागू हो चुका है. अब इसके क्रियान्वयन की बाधाओं को दूर करना सरकार का सबसे बड़ा काम होगा.
बीजेपी संगठन आधारित दल है, लेकिन मोदी के पहले उसको केंद्र में सत्ता नहीं मिल सकी. मोदी के पीएम बनने के बाद बीजेपी की छः राज्यों में सरकारें थीं. 12 साल बाद देश के 22 राज्यों में बीजेपी और एनडीए की सरकारें सत्ता में है. बीजेपी की यह ग्रोथ निश्चित ही मोदी के नेतृत्व में विकास और बदलाव पर देश की मोहर के रूप में देखा जा सकता है.
मोदी ऐसे नेता हैं, जिनको जितनी प्रशंसा मिलती है, उससे ज्यादा गालियों का सामना करना पड़ता है. मोदी अगर देश में सत्ता के प्रतिमान हैं, तो राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में परफॉर्म कर रहे हैं. जिस टॉप पोजीशन के लिए दोनों पक्ष लड़ रहे हैं, उसमें जो जीत रहा है, वही टॉपर होगा, जो हार रहा है उसे फेल ही माना जाएगा. राहुल का सियासी हाल भी मोदी और बीजेपी की सियासी जीत दिखा रही है.
राहुल गांधी की नजर में तो पीएम मोदी और उनकी सरकार में एक भी अच्छाई नहीं दिखाई पड़ती. जो उपलब्धि देश की जनता को दिखाई पड़ती है, वह विपक्षी दलों को नहीं दिखाई पड़ती. मोदी पर अब तक करप्शन का कोई भी आरोप नहीं लगाया जा सका है.
मोदी भारत के डेवलपमेंट की गति के प्रतीक के रूप में अपने को स्थापित करने में सफल रहे हैं. 2047 तक विकसित भारत की उनकी सोच को नारा समझने वाले तो अब तक अपने ही जाल में उलझते रहे हैं. परिसीमन, एक देश एक चुनाव भी मोदी का एजेंडा है. जब तक मोदी हैं, तब तक कोई भी दबाव-प्रभाव उनके इरादों और एजेंडे को डिगा नहीं सकता.