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मुलायम की बहू का भाजपा में प्रवेश, क्या सपा का आत्मविश्वास डोल रहा है ? परसेप्शन वार में सपा कहीं पिछड़ तो नहीं रही ? सरयुसुत मिश्र

सार

यूपी चुनाव की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है. भाजपा ने मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव को पार्टी में शामिल कर सपा पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. यह विवाद शायद टिकट का है ही नहीं....

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विस्तार

उत्तर प्रदेश में नेताओं का एक दल से दूसरे दल में आना-जाना चुनाव की घोषणा के साथ ही शुरू हो गया था| सपा ने भाजपा को तगड़ा झटका देते हुए तीन मंत्री और 10 से ज्यादा विधायक तोड़कर पार्टी में शामिल कराकर परसेप्शन वार का पहला राउंड जीत लिया था| ऐसा लगा था कि भाजपा के लिए इस झटके से उबरना मुश्किल होगा| भाजपा ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के घर में सेंध लगाकर मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव को पार्टी में शामिल कर सपा पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी| 

यूपी चुनाव की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है| राजनीतिक प्रेक्षक ऐसा महसूस कर रहे हैं कि हो सकता है अपर्णा यादव के भाजपा प्रवेश में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की सहमति और आशीर्वाद रहा हो| अपर्णा स्वयं कह रही हैं कि  ससुर यानी मुलायम सिंह का आशीर्वाद लेने के बाद ही उन्होंने भाजपा ज्वाइन की है| अपर्णा स्ट्राइक से सपा और अखिलेश यादव पर जो मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ा है, उससे सपा कार्यकर्ताओं में भी निराशा का भाव पैदा हुआ है|

मुलायम सिंह यादव ने ही समाजवादी पार्टी का गठन किया था| मुलायम सिंह की पहली पत्नी के बेटे अखिलेश यादव को उन्होंने 2012 में मुख्यमंत्री बनाया था| 2017 के चुनाव से पहले पार्टी की बागडोर को लेकर मुलायम और अखिलेश में वैचारिक मतभेद के बाद, अखिलेश ने पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए, राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद हथिया लिया था| मुलायम का पूरा कुनबा सपा में शामिल था| परिवार के सभी लोगों भाई, भतीजे, भतीजी को मुलायम राजनीति में मौका देते रहे हैं| उन्होंने  परिवार को एकजुट रखते हुए अखिलेश को नेतृत्व दिया था| लेकिन अखिलेश परिवार की एकजुटता को कायम नहीं रख सके| साल 2017 में मुलायम के भाई शिवपाल यादव ने सपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी| उन्होंने  चुनाव भी लड़ा था| मुलायम परिवार का विश्वास मुलायम में तो है, लेकिन अखिलेश यादव की राजनीति में परिवार के सदस्यों की उतनी उपयोगिता और अहमियत नहीं है, जितनी मुलायम के समय थी|

सपा के पितामह मुलायम सिंह घर की शैय्या पर लेटे हुए अपनी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के घर परिवार के साथ रहते हैं| उम्र के लिहाज से आज मुलायम सिंह जिस स्थिति में है उसमें उनका सबसे प्रिय व्यक्ति वही हो सकता है, जो उनकी देखरेख और सेवा करता है| दूसरी पत्नी साधना गुप्ता, उनका परिवार मुलायम सिंह की सेवा में लगा हुआ है| इसलिए निश्चय ही उनका झुकाव अपनी दूसरी पत्नी के परिवार के प्रति ज्यादा हो गया होगा| अपर्णा यादव, केवल सपा से  टिकट नहीं मिलने की बात पर सपा परिवार की बुनियाद के विरुद्ध भाजपा में जाने का फैसला नहीं कर सकती| ज़रूर  परिवार में मनभेद  की चरम स्थिति बनी होगी तभी उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर सपा परिवार की बहू पहुंची होगी|

मुलायम सिंह यादव भले ही कट्टर मुस्लिम समर्थक माने जाते हैं,  लेकिन सामाजिक सद्भाव के लिए काम करने से भी वह पीछे नहीं रहे हैं| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और मुलायम के संपर्क और संबंध पर भी अटकलें लगाई जाती रही हैं| हाल ही में दिसंबर महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ प्रवास के दौरान, सार्वजनिक कार्यक्रम में, मुलायम सिंह से उनकी मुलाकात के चित्र काफी चर्चा में रहे थे|अपर्णा यादव के भाजपा में जाने पर प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव, भले ही यह कहें कि भाजपा में समाजवाद का विस्तार हो रहा है, लेकिन इस घटनाक्रम से उन पर और पार्टी पर पड़ने वाले असर से वे मुंह नहीं मोड़ सकते हैं|

समाजवादी पार्टी, प्रमुख विपक्षी दल के रूप में, भाजपा को चुनाव में कड़ी चुनौती दे रही है, पार्टी और पार्टी के मुखिया को यह संदेश, समाज में स्थापित करना है, कि उनके द्वारा अच्छी सरकार चलाई जाएगी, जब घर में ही इस तरह की तोड़फोड़ हुई हो, और ऐसी परिस्थितियों  को अखिलेश यादव रोकने में सफल नहीं हुए, तो जो “परिवार” अच्छे से चलाने में सक्षम ना हो, वह सरकार चलाने में कैसे सक्षम होगा? ऐसा परसेप्शन बनाने का कार्य बीजेपी चुनाव में करेगी, जो उसने शुरू भी कर दिया है| मुलायम परिवार में यह राजनीतिक टूट यहीं रुकेगी ऐसा लगता नहीं है| मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के भाई प्रमोद गुप्ता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं| मुलायम सिंह के समधी विधायक हरिओम यादव, भाजपा में जा चुके हैं| सपा परिवार, अखिलेश और मुलायम के बीच बटा हुआ है|

मुलायम, अखिलेश को तो पसंद करते हैं, लेकिन अखिलेश, मुलायम परिवार की पूरे कुनबे को राजनीतिक महत्व नहीं देना चाहते| शिवपाल यादव का 2017 का घटनाक्रम इस चुनाव में संभल गया है, लेकिन अपर्णा यादव और शिवपाल सिंह यादव के स्टैंड में बहुत अधिक अंतर नहीं है| यह भी चर्चा चल पड़ी है कि सपा परिवार में अभी और बड़ा धमाका हो सकता है| यूपी चुनाव में मुख्यतः भाजपा और सपा के बीच में ही मुकाबला है| दोनों अपने को बेहतर और संगठित साबित करने के लिए परसेप्शन वॉर लड़ रहे हैं| परसेप्शन का चुनाव में महत्वपूर्ण रोल होता है, जो हवा चलती है, तो बहुत सारे मतदाता उस हवा के साथ चले जाते हैं| अपर्णा यादव को विधानसभा का एक टिकट दिया जाता तो उससे सपा पर क्या फर्क पड़ता|

यह विवाद शायद टिकट का है ही नहीं| विवाद अहम और मनभेद का है| सपा में मुलायम परिवार के कई सदस्य पहले से ही विभिन्न पदों पर हैं| एक व्यक्ति और बढ़ जाता तो उससे वंशवाद का आरोप साबित नहीं हो जाता| इस पार्टी का तो उदय ही वंशवाद पर आधारित है| भाजपा के लिए मुलायम और अखिलेश परिवार में टकराव, चुनाव में बिखरती सपा का परसेप्शन विकसित करने में काम आएगा| चुनाव पर इसका क्या असर होगा, यह तो चुनाव परिणामों के बाद ही पता चलेगा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यदुवंशी परिवार में चल रही महाभारत, चुनाव प्रचार में मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने के लिए ज़ोरदार अस्त्र जरूर बनेगा| इससे समाजवादी पार्टी का आत्मविश्वास भी प्रभावित होगा|