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माल के साथ जान भी ले रहे हैं “ऑनलाइन गेम्स”

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sun , 04 Jul

सार

जब से इन खेलों का प्रादुर्भाव हुआ है, युवाओं द्वारा कर्ज में फंस कर जान गंवाने के कई मामले सामने आये हैं|इन गेम्स में जीतने की संभावना बहुत कम होती है, कुछ मामलों में तो इन एप्स के कारण जुए की लत के चलते युवाओं द्वारा भारी कर्ज उठाने के कारण परिवार भी बर्बाद हुए हैं|

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विस्तार

प्रतिदिन राकेश दुबे                                                                              

आज आपको आश्चर्य लगे  हमारे युवा आज जिन ऑनलाइन खेलों में डूबते जा रहे हैं, वे कितने घातक हैं | देश में इंटरनेट और मोबाइल के विस्तार के कारण ‘मनी गेमिंग’ उद्योग का  अच्छा ख़ासा विस्तार हुआ है| अनुमान लगाया  माना जा रहा है कि  अगले तीन सालों यानि २०२५  तक इस उद्योग का व्यवसाय पांच अरब डालर से अधिक हो जायेगा| जब से इन खेलों का प्रादुर्भाव हुआ है, युवाओं द्वारा कर्ज में फंस कर जान गंवाने के कई मामले सामने आये हैं|इन गेम्स में जीतने की संभावना बहुत कम होती है, कुछ मामलों में तो इन एप्स के कारण जुए की लत के चलते युवाओं द्वारा भारी कर्ज उठाने के कारण परिवार भी बर्बाद हुए हैं|

क्या सरकर क्या जनता सभी ने वे विज्ञापन देखे होंगे, जिसमें प्रसिद्ध खिलाड़ी ऑनलाइन खेलों के विज्ञापन करते दिखाई देते हैं| साथ ही, उसी विज्ञापन में तेज-तेज गति से एक चेतावनी भी दी जाती है कि इन्हें संभलकर खेलें, इनकी लत लग सकती है| विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन और एप्स आधारित गेम्स, जिनमें आभासी खेल यानी फैंटेसी स्पोर्ट, रम्मी, लूडो, शेयर ट्रेडिंग संबंधित गेम्स, क्रिप्टो-आधारित खेल आदि होते हैं, जो रियल मनी गेम्स कहलाते हैं, पैसे और इनाम के लिए खेले जाते हैं|

ये खेल कौशल (स्किल) आधारित भी होते हैं और संयोग (चांस) आधारित भी|कुछ मामलों में तो इन एप्स के कारण जुए की लत के चलते युवाओं द्वारा भारी कर्ज उठाने के कारण परिवार भी बर्बाद हुए हैं| २०२० में ड्रीम-११  नामक एप कंपनी ने २२२  करोड़ देकर आइपीएल क्रिकेट के प्रायोजक के अधिकार खरीद लिये थे| इसके बाद ड्रीम-११  एप प्रसिद्ध  हो गया| एक  अन्य काल्पनिक क्रिकेट के एक अन्य एप्स ने भी आइपीएल में विज्ञापन अधिकार खरीदे| ये सभी एप्स बड़ी-बड़ी क्रिकेट हस्तियों द्वारा प्रोत्साहित किये गए |इन हस्तियों में  एमएस धौनी, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या सहित कई खिलाड़ी शामिल हैं|

हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती हैं कि इन एप्स के माध्यम से जुए की लत के कारण आत्महत्या करने वाले अधिकतर युवा १९  से २५  वर्ष के हैं, जिनमें विद्यार्थी, प्रवासी मजदूर और व्यापारी शामिल हैं|विभिन्न न्यायालयों ने भी इन काल्पनिक खेलों को यह कह कर सही ठहराया है कि यह जुआ नहीं, बल्कि कौशल का खेल है | इसके बावजूद विषय की गंभीरता को समझते हुए छह राज्य सरकारों ने अभी तक काल्पनिक क्रिकेट प्लेटफार्मों को प्रतिबंधित किया है या अनुमति नहीं दी है| इसमें अंतिम राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने तो इस प्रकार के १३२  एप्स को प्रतिबंधित करने के लिए निवेदन किया भी  है|

कुछ अध्ययनकर्ता यह मानते हैं कि इस काल्पनिक क्रिकेट खेल में जीतने के लिए कुछ भी संयोग नहीं है, इसलिए यह जुआ नहीं है, लेकिन कुछ खेल मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि काल्पनिक क्रिकेट जुआ ही है और इसके कारण जुए के व्यवहार का रोग लग सकता है| इस ‘उद्योग’ से जुड़े लोगों का तर्क यह है कि लत पड़ने का कोई कारण भी नहीं है और इसमें टिकट का औसत मूल्य ३५  रुपये ही है, इसलिए इससे एक व्यक्ति अपने जीवन काल में 10 हजार से ज्यादा नुकसान नहीं कर पायेगा, लेकिन इन ‘खेलों’ में हार कर लाखों रुपये के कर्जे के कारण आत्महत्या करने वालों के बारे में जानकारी से यह बात असत्य सिद्ध हो जाती है|

इन आभासी खेल कंपनियों के दावों की अधिक जांच की जरूरत है, अभी यह ‘उद्योग’ किन्हीं नियामक कानूनों के तहत न होकर ‘स्व-नियामक’ यानी सेल्फ रेगुलेटेड ही है| इसलिए इस उद्योग से जानकारी लेने की बजाय इन एप्स के बारे में सघन जांच से ही सत्यता पता चल सकती है, पर यह भी सच है कि लोग इन आभासी खेलों के कारण बहुत पैसा खो रहे हैं|

आज नये आर्थिक सिद्धांतों में जोखिम लेना महत्वपूर्ण कहा जाता है| नव उदारवादी नीतियों के युग में कई वित्तीय उपकरण का प्रवेश हो चुका है और सट्टेबाजी अर्थव्यवस्थाओं का अभिन्न अंग बन चुका है| हालांकि शेयर बाजार, वस्तु बाजार और विदेशी विनिमय बाजारों में सट्टेबाजी के कई दुष्परिणाम भी हैं, लेकिन उन्हें वैधानिक अनुमति मिली हुई है|सट्टेबाजी के आम जन-जीवन में प्रवेश के कारण आभासी खेलों के चलन को भी सामान्य स्वीकार्यता मिल गयी, पर जहां सट्टेबाजी में भी कुछ संयोग का अंश होता है|

यहाँ लाभ की बात भी समझना होगी  कि उनका लाभ उन गरीब विद्यार्थियों, मजदूरों, किसानों और आम आदमी की कीमत पर है, जो इन खेलों में अपना सब कुछ लुटा देते हैं| न्यायालयों को अभी यह तय करना बाकी है कि क्या वास्तविक पैसे का दांव लगाने वाले कथित कौशल आधारित गेम्स जुआ हैं| यदि संयोग का अंश रहता है, तो देश के कानून के अनुसार वह वैधानिक नहीं हो सकता| कई एप्स में कौशल आधारित खेलों की आड़ में विशुद्ध जुआ चल रहा है| इन एप्स ने बड़ी मात्रा में विदेशी निवेशकों से निवेश लिया हुआ है और उनका एकमात्र उद्देश्य लोगों को जुए की लत लगाना है| इन एप्स का डिजाइन ही लत लगाने वाला है, यही नहीं, कई कथित कौशल आधारित गेम्स के सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ कर ग्राहकों को बेवकूफ बना कर उन्हें लूटा भी जा रहा है|