सरकारें पांच राज्यों में बनी और बदली हैं, लेकिन असली बदलाव बंगाल में दिखाई पड़ रहा है. सेकुलरिज्म के नाम पर सेकुलर फ्रॉड की परतें उखड़ रही हैं. टीएमसी के राज में तो ऐसा माहौल था कि जैसे बंगाल भारत सरकार से अलग है..!!
केंद्र की योजनाएं राज्य में लागू ही नहीं की जा रही थीं. शुभेन्दु अधिकारी की नई सरकार ने केंद्र की सभी योजनाओं को लागू करने का निर्णय पहली कैबिनेट में ही ले लिया. वंदे मातरम की जननी बंगाल में पहली बार इसे अनिवार्य कर दिया गया. ओबीसी कोटे में मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए शामिल की गई, मुस्लिम जातियों के ऑर्डर को रद्द कर दिया गया है. हाईकोर्ट ने इसे रद्द करने के लिए आदेश ममता बनर्जी सरकार को ही दिया था, लेकिन कोर्ट का आदेश भी नहीं माना गया था. चुनाव की घोषणा के दिन ही इमाम और पुजारियों को मानदेय बढ़ाने के आदेश को भी रद्द कर दिया गया है.
सड़क पर नमाज रोक दी गई है. धार्मिक स्थानों से लाउडस्पीकर की आवाज सार्वजनिक रूप से बाहर आने को प्रतिबंधित कर दिया गया. करप्शन की जांच के मामले तो खुल ही गए हैं. बीजेपी ने चुनाव में जो वायदे किए थे, उन पर अमल तेजी से शुरु हो गया है. पुरानी फाइलें खोली जा रही हैं. प्रशासन के जो अफसर सरकार के संरक्षण में अन्याय-अत्याचार कर रहे थे, ऐसे अफसरों के खिलाफ़ सस्पेंशन और टर्मिनेशन की कार्रवाई तक शुरु कर दी गई है. अभी तो सरकार बने एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ है, लेकिन नए मुख्यमंत्री ने जिस तरह से एडमिनिस्ट्रेशन में अपनी धमक स्थापित की है, यह उनकी पॉपुलैरिटी को दर्शाता है. भले ही शुभेंदु अधिकारी टीएमसी से ही बीजेपी में आए हैं, लेकिन उनका जो स्वरूप सरकार में दिखाई पड़ रहा है, वह मेन कैडर के कार्यकर्ता से भी आगे दिख रहा है.
बंगाल में घुसपैठ को रोकना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा था. इस पर पहली कैबिनेट में ही बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए राज्य सरकार ने भूमि देने का निर्णय लिया. इसके लिए केंद्र सरकार और बीएसएफ ममता बनर्जी से बार-बार अनुरोध कर रही थी, लेकिन सेकुलर फ्रॉड के चलते कदम नहीं उठाया गया था. जब पूरे भारत में दो पहिया वाहनों पर सुरक्षित यात्रा के लिए हेलमेट अनिवार्य है, तब बंगाल की राजधानी में खुली छूट देकर सेकुलरिज्म को संतुष्ट किया जा रहा था.
सरकारी तंत्र चलाने वाले पर निर्भर करता है. पूरा तंत्र वही है, लेकिन वह सरकार के साथ बदला हुआ दिखाई पड़ रहा है. जो पुलिस टीएमसी में अन्याय-अत्याचार का प्रतीक बन गई थी, वही पुलिस अन्याय के खिलाफ लड़ती दिखाई पड़ रही है. नए मुख्यमंत्री गृह मंत्री के रूप में पुलिस के साथ मजबूती से खड़े दिखाई पड़ रहे हैं. कानून व्यवस्था की स्थिति को सुधारना सबसे बड़ी चुनौती है. बंगाल इसलिए विशेष है, क्योंकि आजादी के बाद वहां पर अब तक केवल कांग्रेस वामपंथी और टीएमसी की सरकार ही रही है. बीजेपी की सरकार पहली बार बनी है. इसके पहले की सारी सरकारें कम से कम सेकुलरिज्म के मामले में एक जैसा ही सोचती रही हैं. उनका सेक्युलरिज्म एक तरह का कम्युनल एजेंडा ही बन गया था. सेकुलरिज्म अब केवल वोट बैंक टेररिज्म जैसा चुनावी लाभ लेने के लिए काम करने लगा था.
राजनीति हिंदू मुस्लिम में विभाजित जरूर है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण बंगाल की डेमोग्राफी में अप्रत्याशित बदलाव हुआ है. इसके कारण राज्य के हालात चिंताजनक ढंग बिगड़ते गए. हिंदुओं में असुरक्षा की भावना बढ़ी. टीएमसी सरकार में मुस्लिम बहुल इलाकों में जिस तरह का घटनाक्रम होता रहा है, उससे हिंदुओं का पलायन भी हुआ. बाबरी मस्जिद बनाने की कोशिशों का भी टीएमसी को खामियाजा भुगतना पड़ा.
बीजेपी सरकार के सामने जहां एक तरफ अपने संकल्प पत्र को पूरा करने की चुनौती है. कानून व्यवस्था सुधारना है. महिलाओं को तीन हजार रुपए प्रतिमाह देने के साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करना है. वहीं कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने का वायदा भी पूरा करना है. वित्तीय स्थिति तो बंगाल की बेहद खराब स्थिति में है. डबल इंजन सरकार का लाभ बंगाल को जरूर मिलेगा. वहां की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति को सुधारने के लिए आर्थिक सहयोग के साथ ही जरूरी फोर्स भी उपलब्ध कराया जाएगा.
चुनावी सभा में प्रधानमंत्री ने सबका साथ सबका विकास के साथ बीजेपी की सरकार बनने पर सबका हिसाब करने की बात कही थी. नई सरकार उस दिशा में मजबूती से काम कर रही है. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर भी एफआईआर दर्ज हो गई है. यद्यपि शपथ समारोह से ही यह संदेश सरकार दे रही है, कि बदला नहीं बल्कि बदलाव के लिए काम किया जाएगा. लेकिन गड़बड़ियों का लेवल इतना है, कि दोषी लोगों पर कार्रवाई करनी ही पड़ेगी. जन भावनाएं भी यही मांग कर रही हैं. जिन्होंने भी अन्याय किया है टीमसी की सरकार के संरक्षण में जनधन की लूट की है, उन पर निश्चित रूप से कार्रवाई हो.
राजनीति का सेकुलर फ्रॉड फैलाने की पूरी कोशिश होगी, लेकिन नई सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा, कि सभी वर्गों और समुदायों के साथ बिना भेदभाव के न्याय किया जाए. कानून का राज स्थापित किया जाए. किसी के साथ भी अन्याय नहीं हो. लेकिन घुसपैठियों को किसी भी तरह से बर्दाश्त भी नहीं किया जाएगा. बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित हो ऐसी उम्मीद है, कि बंगाल कानून के राज का मॉडल बनेगा. लॉ एण्ड ऑर्डर पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. गलत काम का नतीजा गलत ही होगा. हर गुंडे के साथ यही हुआ है. गुंडागर्दी की हर राजनीति और दल के साथ यही हुआ है.
बीजेपी की सरकार को अपने लोगों पर भी ना केवल नजर रखनी होगी, बल्कि उन गलतियों से दूर रखना होगा, जो अब तक की सरकारें करती रही हैं. बंगाल में गुजरात से भी ज्यादा बड़ा बीजेपी का गढ़ बनने की संभावना है. बेहतर कानून व्यवस्था विकास और औद्योगीकरण की नीतियां इसमें सर्वाधिक कारगर साबित होंगी.