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सबसे जागरुक लेकिन सबसे उपेक्षित क्यों है विंध्य प्रदेश?

सार

मध्यप्रदेश का विंध्य क्षेत्र राजनीतिक रूप से सबसे जागरुक क्षेत्र माना जाता है. इस अंचल से बड़े-बड़े राजनेता मध्यप्रदेश की राजनीति का नेतृत्व करते रहे हैं. अर्जुन सिंह जैसे कद्दावर मुख्यमंत्री इसी अंचल की देन थे. विंध्यप्रदेश राजनीति में नजीर पेश करता रहा है. जो क्षेत्र राजनीतिक रूप से इतना प्रभावशाली रहा हो वहां विकास के मामले में उपेक्षा अविश्वसनीय लगती है.

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विस्तार

वास्तविकता यही दिखाई पड़ती है कि विंध्य प्रदेश विकास के मामले में अब तक उपेक्षित रहा है. विंध्य प्रदेश का सबसे बड़ा शहर रीवा माना जाता है. यह शहर पुराने विंध्य प्रदेश राज्य की राजधानी भी थी. बहुत लंबे संघर्ष के बाद तो रीवा को रेल कनेक्टिविटी प्राप्त हुई थी. अब एयर कनेक्टिविटी की शुरुआत हो रही है.

आजादी के अमृत काल में रीवा में एयरपोर्ट बनाने का शिलान्यास बहुत पुरानी इच्छा के बहुत देर से पूरा होने जैसा है. कभी श्रीनिवास तिवारी विंध्य प्रदेश के सफेद शेर के रूप में राजनीति में पहचाने जाते थे. आज विंध्य प्रदेश की राजनीतिक पहचान धूमिल से हो रही है. यद्यपि विंध्य प्रदेश में पिछले चुनावों में बीजेपी को भरपूर समर्थन मिला है. एमपी में आज बीजेपी की सरकार कायम है तो सिंधिया समर्थक विधायकों की फूट के बाद भी अगर विंध्य प्रदेश का भरपूर समर्थन नहीं मिला होता तो शायद बीजेपी सरकार बनाने का सामर्थ्य ही हासिल नहीं कर सकती थी.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रीवा में एयरपोर्ट के निर्माण कार्य की आधारशिला रखी और विंध्य एक्सप्रेस-वे का ऐलान किया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि एयरपोर्ट का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा और विंध्य प्रदेश को यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई सफर से जोड़ सकेगा.

इस एयरपोर्ट के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने में रीवा के स्थानीय विधायक और पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला की भूमिका की निश्चित रूप से सराहना की जानी चाहिए. इसके पहले उन्होंने व्हाइट टाइगर सफारी का निर्माण पूरा करा कर विंध्य प्रदेश के माथे पर गौरव स्थापित किया था.

अलग विंध्य प्रदेश की मांग भी उठ रही है. बीजेपी के ही बागी विधायक इस मांग को हवा दे रहे हैं. एमपी में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में विंध्य प्रदेश ने अपना जितना समर्थन दिया है उतना प्रतिसाद विंध्य प्रदेश को नहीं मिल सका है. चाहे मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व को लेकर हो, चाहे विकास के दूसरे आयाम को लेकर हो, विंध्य प्रदेश को उपेक्षा ही झेलनी पड़ रही है.

रीवा जिले में सभी विधायक बीजेपी से चुने गए हैं. इसके बाद भी मंत्रिमंडल में रीवा जिले को कोई स्थान नहीं दिया गया है. रीवा नगर निगम के चुनाव में इस अंचल की उपेक्षा के कारण परिणामों में उलटफेर हुआ है. रीवा में आज कांग्रेस का महापौर निर्वाचित होकर काम कर रहा है, जिस भी राजनीतिक दल को एमपी में अगली सत्ता पर काबिज होना है उसके लिए विंध्य प्रदेश का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण रहेगा.

विंध्य प्रदेश को बीजेपी से जिस भागीदारी की उम्मीद थी वो शायद अभी तक पूरी नहीं हो सकी है, यह बात विंध्य प्रदेश के लोगों को अभी तक समझ नहीं आ सकी है कि राजेंद्र शुक्ल जैसे सक्रिय और कर्तव्यनिष्ठ जननेता को शासन में प्रतिनिधित्व का मौका क्यों नहीं दिया गया? इसके राजनीतिक कारण हो सकते हैं लेकिन चुनाव की दृष्टि से यह हालात बीजेपी के लिए लाभकारी नहीं कहे जा सकते.

रीवा में एयरपोर्ट की आधारशिला निश्चित ही ऐतिहासिक और अविस्मरणीय अवसर इस क्षेत्र के लिए कहा जाएगा. रीवा भविष्य में उत्तर मध्य भारत का महत्वपूर्ण एयर ट्रेफिक डेस्टिनेशन बनकर उभर सकता है. यह क्षेत्र माइनिंग, पावर सेक्टर, वाइल्ड लाइफ टूरिज्म की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. एयर कनेक्टिविटी के अभाव में इस क्षेत्र में विकास प्रभावित हो रहा था. 

दिल्ली मुंबई से रीवा पहुंचना एक कठिन कार्य होता है. ट्रेन कनेक्टिविटी जब नहीं थी तब राजधानी भोपाल से ही रीवा पहुंचना दुरूह माना जाता था. मध्यप्रदेश में जब छत्तीसगढ़ था, तब अधिकारियों कर्मचारियों को दंडित करने के लिए दंतेवाड़ा और बस्तर भेजा जाता था. छत्तीसगढ़ बनने के बाद यह स्थान रीवा ने ले लिया. मध्यप्रदेश में जिन अधिकारियों को प्रताड़ित करना होता है उन्हें विंध्य प्रदेश ट्रांसफर किया जाता है.

शायद ऐसा इसलिए किया जाता है क्योकि विंध्य प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के सेक्टर में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. कनेक्टिविटी का संकट है. यद्यपि सांस्कृतिक दृष्टि से विंध्य प्रदेश बहुत ही समृद्ध इलाका है और वहां प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है.

ऐसा माना जाता है कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, वहां विकास अपने आप आएगा लेकिन रीवा और विंध्य प्रदेश शायद उन भाग्यशाली क्षेत्रों में नहीं हैं जहां प्राकृतिक संसाधनों का होना भी लाभकारी साबित नहीं हो सका है. इसके विपरीत यहां तक कहा जा सकता है कि विंध्य प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों के अभिशाप का शिकार रहा है. इस क्षेत्र के संसाधनों का दोहन तो हुआ लेकिन उसका लाभ उस अंचल में जितना होना चाहिए था उतना नहीं हो सका है.

राजनीतिक दृष्टि से विंध्य प्रदेश को कांग्रेस के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है. बीजेपी ने पिछले वर्षों में इस इलाके में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. विंध्यप्रदेश में राजनीतिक समर्थन अगली सरकार के लिए निर्णायक साबित होगा. बीजेपी को विंध्य प्रदेश पर बनाई अपनी पकड़ को नए सिरे से देखने और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है. विंध्य प्रदेश के वासियों में ऐसी धारणा बढ़ती जा रही है कि विंध्य प्रदेश की उपेक्षा हो रही है.

विंध्य प्रदेश के लोग आत्म सम्मान और गौरव के प्रति बहुत अधिक सजग होते हैं. देश के किसी भी अंचल के किसी भी क्षेत्र में अगर देखा जाए तो इस अंचल के लोगों ने अपनी उपलब्धियां हासिल की हैं. मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में विंध्य प्रदेश को कमजोर करने की कोशिशें भविष्य में राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकती हैं क्योंकि यह तय है एमपी में सत्ता की बिंदी विंध्य से ही चमकेगी.