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"भारत जोड़ो" नहीं "बुजुर्ग छोड़ो-युवा जोड़ो" अभियान चलाए कांग्रेस..!

सार

देश में अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसा कांग्रेस छोड़ो आंदोलन जोर पकड़ रहा है| गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल ने कांग्रेस छोड़ दी है, तो पंजाब के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं| इसके पहले राहुल गांधी  के कोरग्रुप के आरपीएन सिंह यूपी चुनाव के समय बीजेपी में शामिल हो गए थे| ऐसा माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं..!

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विस्तार

कांग्रेस छोड़ने वाले नेता क्यों छा जाते हैं, बीजेपी से बाहर जाने वाले क्यों हो जाते हैं फ्लॉप?

कांग्रेस में ऐसी क्या बात है कि युवा नेता लगातार पार्टी से बाहर होते जा रहे हैं| समस्या युवा नेताओं में है या पार्टी के सिस्टम में है? कांग्रेस छोड़ने वाले नेता जिस तरह से अपने दल बनाकर या बीजेपी में शामिल होकर छा जाते हैं, उससे तो ऐसा ही लगता है कि समस्या कांग्रेस संगठन की फंक्शनिंग में है| फिलहाल कांग्रेस छोड़कर अधिकांश नेता बीजेपी में शामिल हो रहे हैं| बीजेपी भी इन नेताओं को भरपूर तवज्जो देती है|

कांग्रेस छोड़ने वाले कम से कम चार नेता ऐसे हैं जिन्हें बीजेपी ने उनके राज्यों में मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचाया है| आसाम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा सरमा  और अभी हाल ही में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बनाए गए मानिक शाह कांग्रेस से ही निकले थे| इसके पहले नागालैंड और मणिपुर में भी कांग्रेस नेता बीजेपी में शामिल होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं|

युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और आज केंद्र में मंत्री हैं| सिंधिया के कारण तो विधायकों के एक बड़े समूह ने कांग्रेस छोड़ दी थी| इसके कारण कमलनाथ की सरकार को जाना पड़ा था| विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफे तक दे दिए थे और फिर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर चुनाव जीतने में सफल रहे| कुछ पुराने विधायक चुनाव में हार गए थे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इन सारे हारे हुए विधायकों को भी निगम मंडल में पद देकर एडजस्ट किया है| 

बीजेपी द्वारा बाहर से आने वाले नेताओं को दिए जा रहे सम्मान का सक्सेसफुल मॉडल मध्यप्रदेश में चल रहा है| इस मॉडल को देखकर कांग्रेस के अनेक युवा नेता बीजेपी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं| यूपी में जितिन प्रसाद ब्राह्मण चेहरे के रूप बीजेपी में शामिल हुए थे और आज राज्य में मंत्री पद हासिल किए हुए हैं|

आधुनिक समय में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं का इतिहास देखें तो इसमें सबसे पहला नाम शरद पवार का आता है| उन्होंने एनसीपी पार्टी बनायी, महाराष्ट्र में बड़ी ताकत के रूप में वे अभी तक कायम हैं|  इसी प्रकार ममता बनर्जी भी कांग्रेस से ही निकली थी| आज पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अकेले दम पर सरकार बनाने में कामयाब हुयी हैं|

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी भी कांग्रेस से ही बाहर आए थे और आज स्वयं अपनी पार्टी की सरकार बनाकर संचालित कर रहे हैं| भारतीय राजनीति में भाजपा के शिखर पर पहुंचने के पहले जो भी नेता कांग्रेस छोड़ते थे वह अपना रीजनल दल बनाकर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हो जाते थे| अब कांग्रेस नेताओं के सामने बीजेपी ऑप्शन के रूप में मौजूद है| 

सुनील जाखड़ का कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होना पार्टी को पंजाब में लाभ पहुंचाएगा| कांग्रेस युवा चेहरे हार्दिक पटेल को भविष्य के चेहरे के रूप में गुजरात में लाई थी| वह भी निराश होकर पार्टी से बाहर हो गये हैं| जो नेता पार्टी से बाहर जा रहे हैं, उनके द्वारा पार्टी के अंदर की संरचनात्मक कमजोरियों और नेतृत्व को लेकर जो रहस्योद्घाटन किये जाते हैं उससे भी पार्टी में निराशा बढ़ रही है| 

उदयपुर चिंतन शिविर में कांग्रेस से पब्लिक कनेक्ट बढ़ाने के लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक, भारत जोड़ो आंदोलन चलाने का ऐलान किया गया है| यह आंदोलन कैसा होगा और इसके क्या परिणाम होंगे यह तो वक्त ही बताएगा| लेकिन कांग्रेस पार्टी को भारत जोड़ो आंदोलन से ज्यादा “बुजुर्ग छोड़ो-युवा जोड़ो” आन्दोलन चलाने की जरूरत है| 

नीति, नीयत नेतृत्व और  चेहरों में नयापन लाए बिना कांग्रेस छोड़ो आंदोलन को रोकना असंभव लग रहा है| कांग्रेस आज बूढों के कब्जे में है| बूढों के कारण यूथ  में बढ़ती निराशा से युवा नेता पार्टी छोड़ रहे हैं| एक तरफ कांग्रेस छोड़ने वाले नेता क्षेत्रीय दलों के ज़रिये या बीजेपी में जाकर सफल हो रहे हैं|

दूसरी तरफ भाजपा छोड़ने वाले नेता अक्सर फ्लॉप हो जाते हैं| ऐसे नेताओं को या तो दोबारा पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर होना पड़ता है, या यह नेता राजनीति के  बियाबान में भटकते रहते हैं| साल 1980 में भाजपा का गठन हुआ था| शुरू से ही गुजरात और मध्य प्रदेश में भाजपा का आधार मजबूत रहा है| भाजपा में भी नेताओं में टकराहट होती रहती है| बीजेपी से भी नेता अलग होते हैं| लेकिन अक्सर ऐसा देखा गया है कि यह नेता बीजेपी से बाहर सफलता हासिल नहीं कर पाते हैं|

उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह, बीजेपी के कद्दावर बड़े नेता थे| उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला था, लेकिन बाद में उन्होंने बीजेपी छोड़ दी थी| बीजेपी छोड़ने के बाद वे समाजवादी पार्टी से भी जुड़े थे लेकिन भटकने के बाद अंततः फिर से उन्हें बीजेपी में शामिल होना पड़ा था|  कल्याण सिंह ने अपना एक राजनीतिक दल भी बनाया था जिसे बाद में बीजेपी में समाहित कर दिया गया था|

गुजरात में पार्टी की ओर से नरेंद्र मोदी को जब पहली बार मुख्यमंत्री बनाया गया था तब उस समय के मुख्यमंत्री रहे केशुभाई पटेल ने बगावत की थी, उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी बनाई थी, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली| उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया था| गुजरात में ही शंकर सिंह वाघेला ने भी भाजपा छोड़ी थी वह कांग्रेस में शामिल हुए थे लेकिन कालांतर में उनको राजनीतिक बनवास ही भोगना पड़ा था|

मध्यप्रदेश में कद्दावर नेता उमा भारती शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में पार्टी से बाहर गई थी, उन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी का गठन किया था, पार्टी विधानसभा के चुनाव में भी उतरी, लेकिन अच्छा जन समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरीवश अपनी पार्टी का विलय भाजपा में करना पड़ा था| 

वर्तमान में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी उमा भारती के साथ भारतीय जनशक्ति पार्टी में गए थे लेकिन जल्दी ही उन्हें गलती का एहसास हुआ और दोबारा बीजेपी में शामिल हो गए थे| बिहार में शत्रुघ्न सिन्हा और यशवंत सिन्हा भी बीजेपी से बाहर गए थे| यह दोनों नेता भाजपा में जिस पोजीशन पर थे वह पोजीशन बाहर जाकर हासिल नहीं कर सके| 

हाल ही में यूपी चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके साथ गए विधायकों और अन्य नेताओं के उदाहरण सबके सामने है| ये सारे नेता आज राजनीतिक वनवास भोग रहे हैं| भाजपा में संगठन और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ऐसा जोड़ है, जो बाहर जाने वाले नेता को वापस पार्टी में आने के लिए मजबूर कर देता है|

बीजेपी छोड़ने वाले नेता अक्सर अकेले पड़ जाते हैं| संघ और संगठन उनके साथियों और कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण बनाए रखता है| ऐसी स्थिति में ऐसे नेताओं का फ्लॉप होना स्वाभाविक है| चुनाव के समय पार्टियां बदलने की परिपाटी चल पड़ी है| हाल फिलहाल तो कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने का दौर चल रहा है|