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जी हाँ ! हम शतायु हो सकते हैं

राकेश दुबे राकेश दुबे
Updated Sat , 26 Feb

सार

आज धन त्रयोदशी भारतीय मान्यता के अनुसार दीपावली के पांच दिन के उत्सव का पहला दिन, शास्त्रों के अनुसार आज का दिन स्वास्थ्य के नाम पर, स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वन्तरी को समर्पित है. जो मनुष्य के शतायु होने की पद्धति और आशीर्वाद दिया था..!

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विस्तार

प्रतिदिन विचार -राकेश  दुबे

22/10/2022

कल मेरे एक मित्र भारत में आम आदमी के जीवन पर बात कर रहे थे | लम्बी बहस के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे की भारत में जीवन जीने की पद्धतियों में कुछ ऐसी पद्धतियाँ मौजूद है जो मानव जीवन को सौ बरस करती है | निसंदेह भारत में शाकाहार और धर्म के समन्वय से  विकसित  कई पद्धतियाँ उत्तर से दक्षिण तक मौजूद है, जो मनुष्य को शतायु बनाने में समर्थ है | उदाहरण के तौर पर आयुर्वेद और जैन उपसना पद्धति के सिद्धांत लिए जा सकते है |आज धन त्रयोदशी भारतीय मान्यता के अनुसार दीपावली के पांच दिन के उत्सव का पहला दिन | शास्त्रों के अनुसार  आज का दिन स्वास्थ्य के नाम पर, स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वन्तरी को समर्पित है | जो मनुष्य के शतायु होने की पद्धति और आशीर्वाद दिया था |

अब विश्व भी मानव के शतायु होने की कल्पना को हकीकत मानने लगा है | संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार, इस शताब्दी के अंत तक यानी 2100  तक हमारे देश की जीवन प्रत्याशा 81.96 वर्ष हो जायेगी| यह अभी 70 वर्ष के आसपास है| जीवन प्रत्याशा किसी समूह, क्षेत्र या देश में एक व्यक्ति के औसत आयु का अनुमान है| भारत के विकास के साथ यह आयु बढ़ती जा रही है| हमारे देश में 1950  में जीवन प्रत्याशा मात्र 35.21 वर्ष थी|

निश्चित ही यह वृद्धि उत्साहजनक है, परंतु आज जो जीवन प्रत्याशा लगभग 70  वर्ष है, वह 72.6  वर्ष के वैश्विक औसत से अभी कम ही है| इसके कम होने का मुख्य कारण  देश की जीवन पद्धति है  जैसे शिशुओं और बच्चों की मृत्यु दर इसमें निरंतर सुधार संतोषजनक है| आंकड़ों के अनुसार, 1970-75 की तुलना में 2015-19 में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में 20 वर्ष की वृद्धि हुई है|

हमारे देश में चिकित्सा सुविधाओं में बढ़ोतरी होने, अच्छा आहार उपलब्ध होने तथा जीवन स्तर में सुधार होने से जीवन प्रत्याशा में वृद्धि होती गयी है| अनाज उत्पादन में हम बहुत पहले आत्मनिर्भर हो चुके हैं| दवाओं और टीकों के निर्माण में भारत इतना आगे बढ़ चुका है कि आज हमारे देश को दुनिया का दवाखाना कहा जाता है| जब व्यापक स्तर पर टीकाकरण नहीं होता था, तब चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों से हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती थी|

ऐसे रोगों के उन्मूलन से मृत्यु दर में बड़ी गिरावट हुई है| पिछले कुछ समय से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने से भी रोगों की रोकथाम हो रही है| इस संबंध में हर घर तक नल के द्वारा पेयजल पहुंचाने की योजना चमत्कारिक परिणाम दे सकती है| हमारे देश में विभिन्न संक्रामक रोग गंदगी से पैदा होते हैं तथा लोगों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों, के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं|इसे दूर करने का संकल्प जरूरी है |

देशभर में विद्यालयों में शिक्षा पा रहे बच्चों को दोपहर का भोजन देने की योजना न केवल उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि इसके माध्यम से उन्हें पोषण आहार  भी दिया जा रहा है| हालांकि हम अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर देश हैं और सरकार खाद्य सुरक्षा के लिए कृतसंकल्प है, पर यह भी वास्तविकता है कि जनसंख्या के बड़े हिस्से को समुचित पोषणयुक्त भोजन नहीं मिल पाता है| हमें देश व्यापी अन्न सुरक्षा और जनसंख्या  नियंत्रण के कार्यक्रम चलाना होंगे |

संतुलित आहार और स्वस्थ जीवन शैली से हम अपनी आयु में अनेक वर्ष जोड़ सकते हैं, दीपावली के इस अवसर पर बधाई के साथ हर नागरिक को संकल्प करना चाहिए कि हम वो पद्धति विकसित करेंगे जिससे भारत हिनहि विश्व  का हर निवासी स्वस्थ और शतायु हो | शुभकामनायें |