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​​​​​​​मोदी राज्यों के गवर्नेंस पर रखते सीधी नजर

सार

मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक साल का एक्सटेंशन मिल गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आने के बाद भोपाल से एक्सटेंशन का प्रस्ताव केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेजा गया..!! 

janmat

विस्तार

    क्योंकि पीएमओ से एक्सटेंशन देने की पहल हुई थी इसलिए राज्य के प्रस्ताव को घंटों के भीतर मंजूर कर लिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक्सटेंशन की जानकारी दी. मुख्य सचिव का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा था. इसके पहले दो दिन शासकीय अवकाश थे, इसलिए एक्सटेंशन का फैसला तत्परता से लिया गया. इससे यह तो मैसेज स्पष्ट है कि अनुराग जैन को केंद्र से एक्सटेंशन का तोहफा मिला है. उन्हें जब मुख्य सचिव बनाया गया था, तब भी राज्य में दूसरे अफसर का नाम मुख्य सचिव के लिए लगभग फाइनल हो गया था.

    ग्यारह महीने का कार्यकाल होने के बाद भी केंद्र की ओर से अनुराग जैन को मुख्य सचिव बना कर भेजा गया था. तब ही ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें एक्सटेंशन मिलेगा. इसके बावजूद स्टेट ब्यूरोक्रेसी में नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं चल रही थीं.

    अनुराग जैन ईमानदार अफसर माने जाते हैं. उनकी कार्यप्रणाली केंद्र स्तर पर काफी पसंद की गई है. पीएमओ में भी काम कर चुके हैं. पीएम स्वयं उनकी कार्यशैली से वाकिफ हैं. केंद्र का भरोसेमंद अफसर किसी भी सरकार को राज्य में सूट नहीं करता. राज्य नेतृत्व हमेशा इस आशंका में रहता है कि उसके मुख्य सचिव के पीएमओ में सीधे संबंध हैं. यद्यपि इसका राज्य को लाभ भी मिलता है. 

    अनुराग जैन को अभी मुख्य सचिव बने एक साल भी पूरा नहीं हुआ है. उनके द्वारा कई विभागों की नीतियों का निर्माण नए सिरे से किया गया है. मंत्रालय में ई फाइलिंग भी प्रारंभ हो सकी है. सामान्यत: एक्सटेंशन को प्रशासकीय तंत्र में अच्छा कदम नहीं माना जाता है. राज्य सरकार के स्तर पर तो एक्सटेंशन प्रतिबंधित है. संविदा नीति के आधार पर पुनर्नियुक्ति के नियम बनाए गए हैं.

     प्रशासनिक सुधार और नीतियों का सरलीकरण मुख्य सचिव कार्यालय का महत्वपूर्ण काम होता है. इस दिशा में अनुराग जैन ने प्रयास तो किया है, यहां तक कि राज्य की प्रमोशन पॉलिसी भी बनी, लेकिन उच्च न्यायालय से स्थगन मिल गया. केंद्र शासन की नीति में केवल मुख्य सचिव के लिए ही एक्सटेंशन के प्रावधान हैं. राज्यों में डीजीपी के लिए तो दो साल का कार्यकाल नियमों में निर्धारित कर दिया गया है. मुख्य सचिव के लिए अब तक ऐसा नहीं किया गया है. इस पद पर भी दो साल का न्यूनतम कार्यकाल निश्चित किया जाना प्रशासकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम होगा.

    प्रशासकीय तंत्र में किसी का भी एक्सटेंशन दूसरे अफसर को टेंशन का कारण बनता है. अफसर रिटायर होता तो क्रमिक रूप से नीचे तक दूसरे अफसरों को प्रमोशन का मौका मिलता है. रिटायरमेंट एक ऐसी हकीकत है जो सर्विस में आने के दिन ही सबको पता होती है. हर अफसर की पसंद-नापसंद सिस्टम को प्रभावित करती है. इसलिए सिस्टम रिटायरमेंट की तिथि की प्रतीक्षा करता रहता है. जब एक्सटेंशन के निर्णय की जानकारी मिलती है, तो एक पक्ष सेटिस्फेक्शन तो दूसरा टेंशन महसूस करता है.

    पीएम नरेंद्र मोदी का यह न्यू नॉर्मल है कि भाजपा शासित राज्य सरकारों में गवर्नेंस पर सीधी नजर रखते हैं. ऐसी संस्थागत व्यवस्था बनाई गई है कि राज्यों के मुख्य सचिव की नियुक्ति बिना केंद्र की सहमति के नहीं की जा सकती है. राज्य के पॉलिटिकल नेतृत्व को भले ही फ्री हैंड दिया जाता हो, लेकिन गवर्नेंस को किसी एक की मर्जी पर नहीं छोड़ा जा सकता. ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम को फुल सपोर्ट केंद्र से मिलता है.

    केवल मध्य प्रदेश में ही नहीं भाजपा शासित लगभग सभी राज्यों में मुख्य सचिवों के मामले में ऐसी ही नीति अपनाई जाती है. गुड गवर्नेंस और करप्शन पर जीरो टॉलरेंस पीएम की पॉलिसी है. इसको सुनिश्चित करने के लिए गवर्नेंस सिस्टम में चेक एंड बैलेंस बहुत जरूरी होता है. 

     सिंहस्थ का ऐतिहासिक आयोजन प्रदेश में 2028 में होना है. इस आयोजन के लगभग छ: माह बाद राज्य में चुनाव होंगे. सिंहस्थ की तैयारी शुरू हो गई है. यह पहला अवसर है जब सिंहस्थ की तैयारी उज्जैन से आने वाले मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में ही हो रही है. कांग्रेस और बीजेपी में यही अंतर दिखाई पड़ता है कि कांग्रेस में किसी को एक बार नेतृत्व दे दिया गया तो सारा ठेका उसी के पास रहता है. बीजेपी में ऐसा संभव नहीं होता.

    सिंहस्थ में लैंडपूलिंग को लेकर अभी पिछले दिनों ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक उच्च स्तरीय बैठक की. इस बैठक में मुख्यमंत्री मुख्य सचिव के साथ ही शासन प्रशासन के सारे जिम्मेदार लोग उपस्थित थे. मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जाए तो पूरा तंत्र सिंहस्थ के लिए लैंड पूलिंग की राज्य की नीति के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री को संतुष्ट करने में सफल नहीं हो पाया. यह देखने वाली बात होगी कि इस नीति पर किस तरह से अमल किया जाता है. जिन किसानों की जमीन जा रही है, उनके द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. 

    रिजल्ट और रूल ओरिएंटेड ट्रांसपेरेंट गवर्नेंस राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाता है. सिविल सेवाओं में ईमानदारी और जवाबदेही को सुनिश्चित करना, मुख्य सचिव का बेसिक काम है. ट्रांसफर नीति आधारित हो तभी गवर्नेंस को बेहतर कर सकता है. मर्जी आधारित ट्रांसफर सिस्टम को प्रभावित करते हैं. ट्रांसफर जब उद्योग बन जाता है, तो सरकार की छवि और विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है. 

    टाइमली प्रमोशन अधिकारी, कर्मचारियों का हक है. इस दिशा में मुख्य सचिव का रोल महत्वपूर्ण है. अनुराग जैन के एक्सटेंशन के कार्यकाल का लाभ मध्यप्रदेश को मिलना चाहिए. कुछ ऐसा बदलना चाहिए जो उस विश्वास को पूरा करे, जिस पर यह एक्सटेंशन दिया गया है.