मोदी के ऑपरेशन ग्रीन के तहत फसलों के परिवहन और भंडारण पर केंद्र सरकार की सब्सिडी बंद: गणेश पाण्डेय

ढाई साल पहले शुरू स्कीम कोविड काल में हुई बंद, अब केंद्रीय केबिनेट में मामला उलझा
मप्र के केवल सात किसान-ट्रांसपोटरों को ही मिला सब्सिडी का लाभ

गणेश पाण्डेय

GANESH PANDEY 2भाेपाल। केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर मप्र के तहत कोविड में फसलों की ढुलाई और भंडारण के लिए ऑप्रेशन ग्रीन (टॉप टू टोटल) योजना लागू थी, लेकिन वर्ष 2021 में किसानों को इसका लाभ ही नहीं मिल सका। कुछ माह चलने के बाद सरकार ने इस योजना की आवेदन की प्रक्रिया बंद कर दी। भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्धेश्य लॉकडाउन की वजह से फलों व सब्जियों की पैदावार करने वाले किसानों द्वारा मजबूरी में की जाने वाली बिक्री से उन्हें बचाना और फसलों की हानियों को कम करना था। केंद्रीय मंत्रालय द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के एक भाग के रूप में ऑपरेशन ग्रीन्स स्कीम को प्रायोगिक आधार पर टमाटर, प्याज और आलू (टीओपी) से सभी फलों व सब्जियों तक की ढुलाई और भंडारण के लिए सब्सिडी स्कीम शुरू की थी। फलों व सब्जियों के प्रसंस्करण/विपणन कार्य में कार्यरत खाद्य प्रसंस्करणकर्ता, एफपीओ/एफपीसी, सहकारी समितियां, एकल किसान, लाइसेंसधारक कमीशन एजेंट, निर्यातक, राज्य विपणन/सहकारी संघ, खुदरा विक्रेता आदि को इसका लाभ देने की योजना थी।

मोदी केबिनेट से होना है फैसला

भारत सराकर ने इस योजना को फिलहाल बंद कर दिया है और अब इसकी खामियों को दूर कर नये सिरे से स्कीम केबिनेट से स्वीकृृत होने के बाद ही लागू की जायेगी। ढाई साल पहले स्कीम की शुरूआत हुई थी। बाद में कोविडकाल में  सार्ट टर्म के लिए योजना को कुछ फसलों को चिन्हित कर उसके भंडारण और ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) की लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का भी प्रावधान कर दिया, लेकिन स्कीम शुरू होने के कुछ माह बाद ही बंद हो गई। जिसे भारत सरकार की केबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही दोबारा शुरू किया जा सकेगा।

मप्र के केवल सात किसान-ट्रांसपोटरों को ही मिला सब्सिडी का लाभ

मप्र के पांच किसानों को ही इस स्कीम का लाभ मिल सका। इनमें शाजापुर के किसान ओमप्रकाश पाटीदार को 50.51 मिट्रिक टन फसल के मप्र से बिहार राज्य में ट्रांसपोर्ट पर कुल लागत की 50 प्रतिशत सब्सिडी 1,14963 रुपये सब्सिडी दी गई। इसी तरह शाजापुर के किसान नंदकिशोर पाटीदार को बिहार और वेस्ट बंगाल में 61.15 मिट्रिक टन फसल ट्रांसपोर्ट पर 1,13,450 रुपये सब्सिडी, शाजापुर के बालचंद पाटीदार को बिहार और उत्तर प्रदेश में 100.45 मिट्रिक टन फसल के ट्रांसपोर्ट पर 1,16,734.55 रुपये सब्सिडी, इंदौर के रमेश अहीर को ओडिसा राज्य में 75.51 मिट्रिक टन फसल ट्रांसपोर्ट की 50 प्रतिशत सब्सिडी 97 हजार 312.88 रुपये, धार-इंदौर के आरएम डिहाड्रेट डी फूड इंडस्ट्रीज को 606.12 मिट्रिक टन प्यास का गुजरात में ट्रांसपोर्ट पर 4,70,430 रुपये सब्सिडी, बुरहानपुर की श्री साइनी केला सप्लायर्स काे राजस्थान में केले की 545.90 मिट्रिक टन फसल पर 6, 47,968.26 रुपये सब्सिडी दी गई। इसके अलावा उज्जैन के लाइसेंस कमिशन एजंेट जय बजरंगी ट्रेडर्स को 541.85 मिट्रिक टन प्याज की फसल के ट्रांसपोर्ट की कुल लागत पर 10,39,146.16 रुपये सब्सिडी केंद्र सरकार ने दी।

Operation-Green
इन फसलों पर की ढुलाई और भंडारण पर दी जाती है सब्सिडी

फल- आम, केला, अमरूद, कीवी, लीची, पपीता, खट्टे फल, अनन्नास, अनार, कटहल, सब्ज्यिां- फ्रेंच बीन्स, करेला, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, गोभी, मिर्च (हरी), भिण्डी, प्याज, आलू तथा टमाटर की फसल पर सब्सिडी का प्रावधान है। सरकार ने यह प्रावधान भी किया कि भविष्य में कृषि मंत्रालय अथवा राज्य सरकार पात्र फसलों की सूची, चुने हुए अधिशेष उत्पादन वाले क्लस्टरों तथा स्कीम के अंतर्गत ट्रीगर प्राइस के लिए की गई सिफारिश के आधार पर किसी अन्य फल अथवा सब्जी को जोड़ सकती है, लेकिन पोर्टल मेें आवेदन की प्रक्रिया बंद होने के साथ ही राज्य सरकार ने नई फसलों को जोड़ने की प्रक्रिया पर भी विचार नहीं किया।

लागत पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान

स्कीम में किसानों को ढुलाई और भंडारण लागत की दर पर 50% सब्सिडी देने का प्रावधान था। फसलों की ढुलाई के अलावा फसलों का भंडारण करने पर अधिकतम तीन माह के लिए भंडारण कक्ष (कोल्ड स्टोरेज) किराये पर लेने की सुविधा भी थी। इन दोनांे ही कार्यों की कुल लागत पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराने का प्रावधान था। इसके लिए पात्र संस्थाएं केंद्रीय खाद्य मंत्रालय का पूर्व अनुमोदन लिए बगैर अधिसूचित सरप्लस प्रोडक्शन, क्लस्टरों से अधिसूचित फसलों की ढुलाई और भंडारण का कार्य कर सकती और उसके बाद ऑनलाइन पोर्टल https://www.sampada-mofpi.gov.in/Login.aspx पर अपना दावा प्रस्तुत कर सकती थी। आवेदक को फलों व सब्जियों की ढुलाई/भंडारण से पहले पोर्टल पर पंजीकरण करना पड़ता था।

इनका कहना है

किसानों की फसलों की ढुलाई और भंडारण पर 50 प्रतिशत सब्सिडी की स्कीम तो आई, लेकिन बजट के अभाव में लागू नहीं हो सकी। भारत सरकार से न तो इसको लेकर कोई दिशा-निर्देश मिले है। 
मनोज अग्रवाल संचालक मप्र उद्यानिकी विभाग

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Priyam Mishra



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