रेलवे में कथित लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की चार्जशीट के आधार पर लालू, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप, मीसा भारती और हेमा यादव समेत 46 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। CBI के स्पेशल जज विशाल गोगने ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब्स केस में 52 आरोपियों को बरी भी कर दिया।
रेलवे में नौकरी के बदले ज़मीन लेने के आरोप में लालू के परिवार और दूसरों पर प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट (PC Act) के तहत आरोप तय किए गए हैं। लालू परिवार के खिलाफ़ अब ट्रायल आगे बढ़ेगा। शुक्रवार को दिल्ली की एक कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर सभी आरोपी खुद पेश हुए। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई और JJD अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी पहुंचे।
यह मामला UPA सरकार के दौरान लालू यादव के रेल मंत्री रहने के समय का है। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप D की पोस्ट पाने के लिए बहुत कम कीमत पर ज़मीन लालू परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम ट्रांसफर की गई थी। CBI क्रिमिनल केस की जांच कर रही है, जबकि ED मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर एक अलग केस कर रहा है।
CBI ने अपनी चार्जशीट में 103 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को एक अहम फैसले में कोर्ट ने 52 आरोपियों को बरी कर दिया। अब उन पर इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 120B और 420 और प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के तहत चार्ज लगाए गए हैं।
बता दें, कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने 2004 से 2009 तक UPA सरकार में रेल मंत्री रहते हुए ज़मीन के बदले नौकरी देने का ऑफर दिया था। लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि उन्होंने बिना कोई ऐड दिए रेलवे में ग्रुप D की नौकरियों के लिए बहुत सारे लोगों को भर्ती किया। लालू के दबाव में ग्रुप D की नौकरियां ऐसे लोगों को दे दी गईं जो अपना नाम भी नहीं लिख सकते थे।
CBI ने कोर्ट में दलील दी थी कि चुने गए कैंडिडेट्स ने लालू यादव, उनके परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर ज़मीन कम कीमत पर गिफ्ट की थी या बेची थी। CBI के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कहा कि नौकरी पाने वाले सभी कैंडिडेट्स बिहार के बहुत गरीब तबके से थे। उनके पास जो डॉक्यूमेंट्स थे, वे नकली स्कूलों से जारी किए गए थे।
इस मामले में सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120, 420, 468, 467, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8, 9, 11, 12 और 13 के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
पुराण डेस्क